
भागलपुर जिले के बाईपास थाना क्षेत्र से एक गंभीर ठगी का मामला सामने आया है, जहां करीब 32 महिलाओं को नौकरी का झांसा देकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी की गई। यह घटना मकससपुर हरिजन टोला की बताई जा रही है, जहां आर्थिक रूप से कमजोर और सीमित शिक्षा प्राप्त महिलाओं को बेहतर भविष्य और रोजगार का सपना दिखाकर जाल में फंसाया गया। अब जब वादे पूरे नहीं हुए और पैसे भी वापस नहीं मिले, तो पीड़ित महिलाएं न्याय की मांग को लेकर प्रशासन के दरवाजे तक पहुंच गई हैं।
इस मामले में पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि स्थानीय महिला मीना देवी ने उन्हें विश्वास में लेकर एक योजना के तहत पैसा इकट्ठा किया। महिलाओं को बताया गया कि अगर वे बैंक से लोन लेकर पैसे देंगी तो एक पेट्रोल पंप खोला जाएगा, जिसमें सभी को रोजगार दिया जाएगा और उनकी नियमित आय सुनिश्चित होगी। रोजगार और आर्थिक स्थिरता की उम्मीद में महिलाओं ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।
महिलाओं के अनुसार, उन्हें यह भरोसा दिलाया गया कि यह एक सामूहिक योजना है, जिसमें सभी को बराबर का लाभ मिलेगा। इसी भरोसे में आकर कई महिलाओं ने बैंक से कर्ज लिया। किसी ने दो लाख रुपये, किसी ने डेढ़ लाख रुपये तो किसी ने चार लाख रुपये तक का लोन लेकर मीना देवी को सौंप दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि अधिकांश लेन-देन बिना किसी लिखित समझौते या दस्तावेज के किया गया, जिससे अब कानूनी प्रक्रिया और भी जटिल हो गई है।
समय बीतने के बावजूद न तो पेट्रोल पंप खोला गया और न ही किसी महिला को कोई रोजगार मिला। जब महिलाओं ने अपने पैसे वापस मांगने की कोशिश की तो उन्हें टालमटोल का सामना करना पड़ा। धीरे-धीरे यह स्पष्ट हो गया कि उनके साथ ठगी हुई है। इसके बाद पीड़ित महिलाएं अपने परिवार के साथ थाने और कोर्ट के चक्कर काटने लगीं, लेकिन उन्हें अब तक कोई ठोस समाधान नहीं मिल पाया है।
बुधवार दोपहर करीब दो बजे, दर्जनों महिलाएं एकजुट होकर जिले के वरीय पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचीं और अपनी शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि उनके पैसे वापस दिलाए जाएं और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। महिलाओं की स्थिति को देखते हुए यह मामला न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक रूप से भी गंभीर बन गया है, क्योंकि कई परिवार अब कर्ज के बोझ तले दब गए हैं।
इस मामले में जिले के वरीय पुलिस अधीक्षक ने पीड़ित महिलाओं को आश्वासन दिया है कि मामले की जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञ का कहना है कि इस तरह के मामलों में लिखित दस्तावेज का अभाव पीड़ितों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। हालांकि, यदि पर्याप्त साक्ष्य और गवाह मौजूद हों तो कानून के तहत कार्रवाई संभव है। उन्होंने महिलाओं को सलाह दी कि वे सामूहिक रूप से अपनी शिकायत को आगे बढ़ाएं और सभी उपलब्ध प्रमाणों को सुरक्षित रखें।
पीड़ित महिलाओं में से एक ने बताया कि वे सभी बेहतर जीवन की उम्मीद में इस योजना से जुड़ी थीं, लेकिन अब उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि परिवार की आर्थिक स्थिति पहले ही कमजोर थी, ऐसे में लिया गया कर्ज अब उनके लिए बड़ी समस्या बन गया है।
यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि ग्रामीण और कम शिक्षित वर्ग को अक्सर झूठे वादों के जरिए निशाना बनाया जाता है। नौकरी और आय के नाम पर लोगों को फंसाने वाले ऐसे गिरोह समाज के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। जरूरत इस बात की है कि लोग इस तरह के प्रलोभनों से सतर्क रहें और किसी भी आर्थिक लेन-देन से पहले पूरी जानकारी और दस्तावेज सुनिश्चित करें।
प्रशासन के लिए भी यह एक बड़ी चुनौती है कि वह ऐसे मामलों पर त्वरित कार्रवाई करे और दोषियों को सजा दिलाकर समाज में एक सख्त संदेश दे। फिलहाल पीड़ित महिलाओं को उम्मीद है कि उन्हें न्याय मिलेगा और उनकी मेहनत की कमाई वापस मिल सकेगी।


