जन सुराज का बिहार सरकार पर तीखा हमला: मुख्य प्रवक्ता देवेश बोले- 5 साल में 1 करोड़ नौकरी का वादा तो 6 महीने में 10 लाख क्यों नहीं दी, भर्ती कैलेंडर पर श्वेत पत्र जारी करे सरकार

भागलपुर, 20 मई 2026। बिहार की मौजूदा त्रिस्तरीय राजनीतिक प्रणालियों और प्रशासनिक दावों के बीच मुख्य विपक्षी धार बनकर उभर रही जन सुराज पार्टी ने बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं में टालमटोल के मुद्दों पर सत्तारूढ़ सरकार के खिलाफ मोर्चा पूरी कड़ाई से खोल दिया है। भागलपुर के रानी तालाब स्थित जन सुराज पार्टी के जिला मुख्य कार्यालय में आयोजित एक वृहद और कड़क प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्टी के जिला मुख्य प्रवक्ता देवेश कुमार ने राज्य सरकार को उसके चुनावी घोषणापत्रों के विन्यासों पर घेरते हुए गंभीर सवाल दागे।

​पार्टी के वरिष्ठ कप्तानों ने सीधे शब्दों में कहा कि यदि सरकार अपने अस्तित्व में आने के समय किए गए वादों के प्रति जरा भी गंभीर होती, तो संचयी रूप से अब तक सूबे के लाखों युवाओं का भविष्य पूरी तरह संवर चुका होता। परंतु, नीतिगत विफलताओं और प्रशासनिक चक्रव्यूह के कारण आज बिहार का युवा सड़कों पर पुलिस की लाठियां खाने को मजबूर संधारित है। प्रेस वार्ता के दौरान पार्टी के जिला पदाधिकारियों ने महिला सशक्तिकरण और भूमिहीनों के पुनर्वास से जुड़ी सरकारी फाइलों को पूरी कड़ाई के साथ खोलकर जनता के समक्ष सच रखने की विधिक मांग की।

युवाओं की उम्मीदों से खिलवाड़: बड़े परीक्षाओं के पेपर लीक और लाठीचार्ज पर उठाए कड़े सवाल

​प्रेस वार्ता विलेख को संबोधित करते हुए जिला मुख्य प्रवक्ता देवेश कुमार ने कहा कि वर्तमान सरकार ने सत्ता की बागडोर संभालते ही बिहार के युवाओं को अगले पांच वर्षों के भीतर संचयी रूप से 1 करोड़ सरकारी नौकरियां देने का एक बहुत बड़ा और लोक-लुभावन वादा किया था। यह वादा बिहार के करोड़ों शिक्षित और बेरोजगार युवाओं की जीविका व उम्मीदों के मूल संरेखण से सीधे तौर पर जुड़ा संधारित है।

​मुख्य प्रवक्ता ने सांख्यिकीय गणना के आधार पर सरकार के दावों की हवा निकालते हुए निम्नलिखित कड़े बिंदु पटल पर रखे:

  • 6 महीने का हिसाब: यदि पांच साल में एक करोड़ नौकरियों का विधिक लक्ष्य है, तो उस औसत के अनुसार बीते छह महीनों के भीतर राज्य के युवाओं को कम से कम 10 लाख नौकरियां हस्तगत करा दी जानी चाहिए थीं। सरकार बताए कि इस अवधि में कितने युवाओं को विधिक नियुक्ति पत्र सौंपे गए।
  • भर्ती कैलेंडर और पेपर लीक का चक्रव्यूह: बिहार लोक सेवा आयोग या अन्य प्रादेशिक बोर्डों द्वारा अब तक कोई भी आधिकारिक और पारदर्शी ‘सरकारी नौकरी भर्ती कैलेंडर’ सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया है। समय पर परीक्षाएं आयोजित करने में प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह फेल साबित हो रही है, और बड़े-बड़े प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र (पेपर लीक) धड़ल्ले से आउट हो रहे हैं।
  • राजधानी में दमन चक्र: यदि युवाओं को रोजगार हस्तगत हो गया होता, तो आज राजधानी पटना की सड़कों पर अपनी विधिक मांगों के लिए प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं को बिहार पुलिस के जवानों द्वारा दौड़ा-दौड़ा कर बर्बरतापूर्वक पीटा नहीं जाता।

​जन सुराज ने कड़ा रुख अपनाते हुए मांग की है कि बिहार सरकार रोजगार के आंकड़ों पर एक विस्तृत श्वेत पत्र (White Paper) जारी करे, जिसमें यह पूरी तरह स्पष्ट हो कि सृजित की गई नौकरियां स्थायी पदों पर हैं या संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) प्रणालियों पर आधारित हैं, और वे कौन-कौन से विशिष्ट विभाग हैं जिनमें बहाली की संचिकाएं वर्तमान में लाइव हैं।

22 लाख महिलाओं की दो-दो लाख वाली किस्त और 3 डिसमिल जमीन के वादे पर सरकार मौन

​देवेश कुमार ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से महिलाओं और समाज के वंचित वर्गों के कल्याण के नाम पर चलाई जा रही योजनाओं के क्रियान्वयन को भी पूरी कड़ाई से ब्लॉक पाया। उन्होंने कहा कि सरकार ने महिला रोजगार योजना के तहत प्राथमिक रूप से दस-दस हजार रुपये हस्तांतरित करने के उपरांत, सूबे की 22 लाख महिलाओं को स्वरोजगार हेतु दो-दो लाख रुपये की अगली किस्त जारी करने की प्रखर घोषणा की थी। आज बिहार की आधी आबादी यह विधिक सवाल पूछ रही है कि वह वित्तीय सहायता राशि कब लाइव होगी। सरकार जिलावार सूची जारी कर स्पष्ट करे कि यह राशि पूर्ण अनुदान (सब्सिडी) है या कोई ऋण (लोन) व्यवस्था।

​इसके अतिरिक्त, प्रवक्ता ने राज्य के 90 लाख गरीब, भूमिहीन, दलित, महादलित, पिछड़े और वंचित परिवारों को आवासीय गरिमा प्रदान करने के लिए घोषित ‘3-3 डिसमिल जमीन’ की योजना पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सात निश्चय और गरीब कल्याण योजना के तहत कितने भूमिहीनों को भौतिक रूप से जमीन की पर्ची का सत्यापन मुकम्मल कराया गया और कितने परिवारों को धरातल पर बसाया गया, इसका कोई भी प्रामाणिक डेटा सरकारी संचिकाओं से बाहर नहीं आ सका है। इसके साथ ही, पूरे देश के विभिन्न राज्यों में हालिया महीनों में हुई 43 बिहारी प्रवासी मजदूरों की निर्मम हत्या और अनवरत जारी पलायन के कड़े मुद्दों पर बिहार सरकार पूरी तरह से मौन धारण कर चुकी है।

सुल्तानगंज की घटना कानून-व्यवस्था पर कलंक, पीरपैंती अडाणी प्लांट में स्थानीय युवाओं की अनदेखी

​भ्रष्टाचार और गिरती कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर सरकार की अभेद्य घेराबंदी करते हुए जन सुराज के जिला महामंत्रियों ने पत्रकारों के समक्ष प्रामाणिक तथ्य रखे। जिला महामंत्री मोहम्मद सबीर ने तीखे लहजे में कहा कि यदि सूबे से भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी का ग्रिड पूरी तरह नष्ट हो गया होता, तो आए दिन दिनदहाड़े सरकारी कार्यालयों के भीतर घुसकर लोक सेवकों की हत्या, डकैती, लूट और बलात्कार जैसे जघन्य विचलनों की अवस्थिति निर्मित नहीं होती। उन्होंने रेखांकित किया कि सुल्तानगंज में घटित हालिया आपराधिक घटना पूरे बिहार के प्रशासनिक इकबाल के लिए एक बहुत बड़ा सबक बन गई है, जहां कानून-व्यवस्था पूरी तरह पस्त संधारित परिलक्षित हुई।

पीरपैंती औद्योगिक प्रक्षेप पर जन सुराज का कड़ा रुख:

“पीरपैंती अंचल के भीतर वृहद स्तर पर निर्मित हो रहे ‘अडाणी पावर प्लांट’ (Adani Power Plant) के निर्माण विन्यासों में स्थानीय प्रभावित रैयतों और भागलपुर के युवाओं को रोजगार के विधिक अवसरों से पूरी तरह विमुक्त रखा गया है। जब स्थानीय योग्य युवा अपने रोजगार और हक की बात शांतिपूर्वक पटल पर रखते हैं, तो स्थानीय पुलिस-प्रशासनिक तंत्र अडाणी प्रबंधन के सिंडिकेट के दबाव में आकर उन युवाओं की सहायता करने के बदले उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को ही कड़ाई से ब्लॉक करने पर उतारू हो जाता है, जिसे जन सुराज कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।”

​प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंतिम विलेख के दौरान नाथनगर विधानसभा प्रक्षेत्र के पूर्व संयोजक मोहम्मद नवाज़ आलम सहित दर्जनों सांगठनिक कप्तानों ने भी अपनी बातें प्रखरता से रखीं। नेताओं ने एकजुट होकर संकल्प लिया कि आगामी समय में जन सुराज इन सभी बुनियादी हकों, युवाओं के रोजगार और भ्रष्टाचार मुक्त बिहार के निर्माण के संकल्प को लेकर भागलपुर के प्रत्येक प्रखंड और पंचायत स्तर पर एक कड़ा जन-आंदोलन लाइव करेगी, ताकि गूंगी-बहरी प्रशासनिक व्यवस्था को जनता की विधिक अदालत में जवाबदेह बनाया जा सके।

  • ये भी पढ़े..

    विक्रमशिला सेतु की सेहत जांचने पहुंचे विशेषज्ञ, एक्सपेंशन ज्वाइंट से लेकर वेंट सिस्टम तक की हुई गहन पड़ताल

    Share Add as a preferred…

    15 जून की आधी रात से बंद होगा बालू खनन, मानसून को लेकर सरकार ने जारी किए सख्त निर्देश

    Share Add as a preferred…