भागलपुर में अवैध गैस गोदाम पर बड़ा खुलासा, मापी से पहले रातोंरात तोड़ा गया गोदाम और हटाए गए सिलेंडर

भागलपुर के मधुसूदनपुर इलाके में स्थित एक गैस गोदाम को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। कंझिया क्षेत्र में संचालित अजय इंडेन गैस एजेंसी पर आरोप लगा है कि जिस जमीन पर गैस गोदाम निर्माण की स्वीकृति मिली थी, वहां गोदाम बनाया ही नहीं गया। मामले ने तब तूल पकड़ा जब जमीन मालिक ने प्रशासन से शिकायत कर जांच की मांग की। जांच प्रक्रिया आगे बढ़ने और दोबारा मापी की तारीख तय होने के बीच ही रातोंरात कथित अवैध गोदाम को ध्वस्त कर वहां रखे गैस सिलेंडरों को दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्यशैली, मापी रिपोर्ट और गैस एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले की शुरुआत जमीन मालिक शिवम कुमार भारती की शिकायत से हुई। शिवम भारती का आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2012 में अपनी जमीन अजय इंडेन गैस एजेंसी की संचालक सोनी कुमारी को लीज पर दी थी। यह जमीन खाता संख्या 64, खेसरा संख्या 39, मौजा महमदपुर में स्थित है, जिसका कुल रकबा लगभग 9000 वर्गफीट बताया गया है। शिवम के अनुसार इसी जमीन के आधार पर गैस गोदाम निर्माण की स्वीकृति ली गई और गैस कंपनी से आवश्यक पेसो लाइसेंस भी प्राप्त किया गया।

शिवम भारती का कहना है कि लाइसेंस और अनुमति उनकी जमीन के नाम पर ली गई, लेकिन एजेंसी संचालक ने उस स्थान पर गोदाम बनाने के बजाय किसी अन्य स्थान पर गोदाम तैयार कर लिया। आरोप है कि सोनी कुमारी ने धर्मेंद्र कुमार सिंह से लीज पर ली गई जमीन, जो खाता संख्या 66, खेसरा संख्या 9, मौजा बहबलपुर में स्थित है, वहां गैस गोदाम का संचालन शुरू कर दिया। इससे यह सवाल उठने लगा कि जब स्वीकृति एक जमीन के लिए मिली थी, तो संचालन दूसरी जगह कैसे किया जा रहा था।

शिकायतकर्ता शिवम भारती ने बताया कि उनकी जमीन पर आज भी बाग-बगीचा मौजूद है और वहां किसी प्रकार का गैस गोदाम नहीं बनाया गया। उनके मुताबिक, यदि प्रशासनिक रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति का मिलान किया जाए तो अंतर साफ दिखाई देगा। इसी आधार पर उन्होंने इंडेन कंपनी को लिखित शिकायत दी और मामले की जांच की मांग की।

शिकायत मिलने के बाद गैस कंपनी के आग्रह पर नाथनगर अंचल कार्यालय की ओर से जमीन की मापी कराई गई। हालांकि, शिकायतकर्ता का आरोप है कि मापी प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ी हुई। उनका कहना है कि अंचल अमीन ने गलत रिपोर्ट तैयार कर अंचल अधिकारी को सौंप दी। बाद में इसी रिपोर्ट के आधार पर अंचल अधिकारी ने गैस कंपनी के अधिकारियों को यह जानकारी दी कि जिस जमीन पर गोदाम स्वीकृत हुआ था, उसी पर एजेंसी संचालक का कब्जा है और वहीं गोदाम निर्मित है।

जब शिवम भारती को इस रिपोर्ट की जानकारी मिली तो उन्होंने इसे तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की। उन्होंने जिलाधिकारी, अपर समाहर्ता और अनुमंडल पदाधिकारी के समक्ष पूरे मामले को रखा। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए अनुमंडल कार्यालय की ओर से स्वतंत्र जांच के लिए एक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति की गई।

मजिस्ट्रेट द्वारा की गई जांच में चौंकाने वाली बातें सामने आईं। जांच रिपोर्ट के अनुसार जिस जमीन पर गैस गोदाम निर्माण की अनुमति और पेसो लाइसेंस जारी किया गया था, वहां वास्तविक रूप से बगीचा मौजूद है। वहां किसी स्थायी गैस गोदाम के निर्माण के प्रमाण नहीं मिले। इस रिपोर्ट ने पहले की मापी और प्रशासनिक रिपोर्ट पर सवाल खड़े कर दिए।

इसके बाद नाथनगर अंचल अधिकारी की ओर से पूर्व मापी की दोबारा समीक्षा कराने का निर्णय लिया गया। 3 जुलाई को पुनः मापी कराने के लिए जगदीशपुर और गोराडीह के अमीनों को नियुक्त किया गया। इस नई मापी से पूरे विवाद की स्थिति स्पष्ट होने की संभावना थी। लेकिन इसी बीच घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ ले लिया।

आरोप है कि दोबारा मापी की सूचना मिलते ही अजय इंडेन गैस एजेंसी के संचालक और उनके सहयोगियों ने तेजी से कार्रवाई शुरू कर दी। शिकायतकर्ता के अनुसार बीते गुरुवार की रात विवादित स्थल पर बने गोदाम को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। इतना ही नहीं, वहां रखे सभी गैस सिलेंडरों को हटाकर हाल ही में स्वीकृत नए गोदाम, जो भतौड़िया में स्थित बताया जा रहा है, वहां भेज दिया गया।

रातोंरात गोदाम टूटने की घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने का प्रशासनिक निर्देश था, तो फिर गोदाम कैसे तोड़ा गया। शिकायतकर्ता शिवम भारती का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में मधुसूदनपुर थाना को पहले ही सूचना दे दी थी। इसके बावजूद गोदाम तोड़ दिया गया।

शिवम भारती ने अंचल अधिकारी और संबंधित अमीन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि गलत रिपोर्ट तैयार कर वास्तविक स्थिति को छिपाने का प्रयास किया गया। उन्होंने इस संबंध में जिलाधिकारी को भी शिकायत सौंपी है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

नाथनगर अंचल अधिकारी रजनीश कुमार ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संबंधित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने के लिए थाना प्रभारी को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। उन्होंने कहा कि गोदाम किस परिस्थिति में ध्वस्त हुआ, इसकी जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है। मामले की जानकारी जुटाई जा रही है।

वहीं मधुसूदनपुर थाना प्रभारी संजय कुमार मंडल ने बताया कि पुलिस ने अंचल अधिकारी को स्थिति से अवगत करा दिया था। उन्होंने कहा कि पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी और निर्माण या तोड़फोड़ से संबंधित गतिविधियों को रोकने का प्रयास भी किया गया। थाना प्रभारी के अनुसार पुलिस के हटने के बाद संबंधित लोगों ने गोदाम को ध्वस्त किया होगा।

यह मामला अब केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें प्रशासनिक लापरवाही, दस्तावेजी अनियमितता और संभावित नियम उल्लंघन जैसे गंभीर पहलू सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष हुई तो कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।

भागलपुर में सामने आया यह विवाद प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अब सबकी नजर 3 जुलाई की प्रस्तावित मापी और आगे होने वाली जांच पर टिकी है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में किन अधिकारियों और संबंधित पक्षों की भूमिका सामने आती है तथा क्या इस पूरे मामले में जवाबदेही तय की जाएगी। फिलहाल अवैध गैस गोदाम को लेकर उठे सवालों ने पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बना दिया है।

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