​भागलपुर में गैस सिलेंडरों की किल्लत पर प्रशासन सख्त: सर्वाधिक शिकायतों वाली एजेंसियों का होगा भौतिक सत्यापन

भागलपुर। सिल्क सिटी भागलपुर में एक बार फिर रसोई गैस की आपूर्ति व्यवस्था चरमराने लगी है, जिससे आम उपभोक्ताओं की रसोई का बजट और समय दोनों प्रभावित हो रहे हैं। जिले में पिछले कुछ दिनों से गैस सिलेंडरों की रिफिलिंग और डिलीवरी को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। उपभोक्ता लगातार शिकायत कर रहे हैं कि बुकिंग के बावजूद उन्हें समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। जिला प्रशासन ने निर्णय लिया है कि जिन गैस एजेंसियों के खिलाफ उपभोक्ताओं की सबसे ज्यादा शिकायतें मिल रही हैं, उनका गहन भौतिक सत्यापन और निरीक्षण किया जाएगा। जिला आपूर्ति पदाधिकारी सुधीर कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी तरह की कोताही या धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कार्रवाई उन एजेंसियों पर केंद्रित होगी जिन्होंने डीएसी (डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड) सिस्टम और होम डिलीवरी के नियमों को ताक पर रख दिया है। 13 अप्रैल 2026 को जारी इस प्रशासनिक आदेश के बाद जिले की गैस वितरण इकाइयों में हड़कंप मच गया है।

डीएसी कोड का पेंच: बुकिंग के बाद भी उपभोक्ता परेशान

​गैस संकट की वर्तमान समस्या के पीछे सबसे बड़ी वजह ‘डीएसी कोड’ (DAC Code) का समय पर न मिलना बताया जा रहा है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, जब कोई उपभोक्ता गैस सिलेंडर बुक करता है, तो उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक विशेष कोड भेजा जाता है। सिलेंडर की डिलीवरी के समय यह कोड वेंडर को देना अनिवार्य होता है, तभी ट्रांजैक्शन पूरा माना जाता है। लेकिन भागलपुर के उपभोक्ताओं का आरोप है कि करीब एक माह पहले सिलेंडर प्राप्त करने वाले लोग जब दूसरी बार बुकिंग करा रहे हैं, तो उन्हें डीएसी कोड मिलने में अत्यधिक विलंब हो रहा है।

​कोड न होने की स्थिति में गैस वेंडर उपभोक्ताओं के दरवाजे तक पहुँचने के बावजूद सिलेंडर देने से इनकार कर रहे हैं। वेंडरों का तर्क है कि बिना कोड के वे कंपनी के पोर्टल पर डिलीवरी अपडेट नहीं कर सकते। इस तकनीकी और प्रबंधकीय खामी के कारण उपभोक्ता गैस एजेंसी और वेंडरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। कई मामलों में यह भी देखा गया है कि कोड आने के बाद भी वेंडर कई दिनों तक डिलीवरी के लिए नहीं पहुँचते, जिससे उपभोक्ताओं के सामने भोजन पकाने का संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि यह कोड की समस्या तकनीकी है या जानबूझकर कृत्रिम किल्लत पैदा करने की कोई साजिश।

प्रशासनिक रडार पर एजेंसियां: नियंत्रण कक्ष की शिकायतों पर होगा एक्शन

​जिला प्रशासन ने उपभोक्ताओं की समस्याओं के त्वरित निवारण के लिए जिला नियंत्रण कक्ष के दूरभाष संख्या 0641-2402871 को सक्रिय किया है। जिला आपूर्ति पदाधिकारी सुधीर कुमार ने बताया कि इस हेल्पलाइन नंबर पर प्राप्त होने वाली शिकायतों का प्रतिदिन विश्लेषण किया जा रहा है। प्रशासन ने एक ‘शिकायत सूची’ तैयार की है, जिसमें उन एजेंसियों को चिन्हित किया गया है जिनके विरुद्ध शिकायतों का ग्राफ सबसे ऊंचा है।

​इन चिन्हित एजेंसियों के गैस गोदामों और कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान अधिकारी यह जांचेंगे कि गोदामों में स्टॉक की क्या स्थिति है और बुकिंग के मुकाबले कितनी डिलीवरी प्रतिदिन की जा रही है। यदि किसी एजेंसी के पास पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद डिलीवरी में देरी पाई गई, तो उसका लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है। सुधीर कुमार के अनुसार, भौतिक सत्यापन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एजेंसियां कागजों पर जो डेटा दिखा रही हैं, वह धरातल पर उपभोक्ताओं को मिल रही सुविधा से मेल खाता है या नहीं।

गोदामों से डिलीवरी पर पूर्ण प्रतिबंध: होम डिलीवरी ही एकमात्र विकल्प

​गैस वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और कालाबाजारी रोकने के लिए जिला आपूर्ति पदाधिकारी ने एक महत्वपूर्ण नियम को फिर से दोहराया है। जिले में एलपीजी गैस की आपूर्ति केवल और केवल ‘होम डिलीवरी’ के माध्यम से ही की जाएगी। गैस गोदामों से सीधे उपभोक्ताओं को सिलेंडर देने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। अक्सर देखा जाता है कि जब किल्लत होती है, तो लोग अपने वाहनों से गोदाम पहुँच जाते हैं, जिससे वहां भीड़ और असुरक्षा की स्थिति पैदा होती है।

​प्रशासन का मानना है कि गोदाम से डिलीवरी होने पर वेंडर अक्सर उन लोगों को प्राथमिकता देते हैं जो अतिरिक्त पैसे देते हैं या उनकी पहचान के होते हैं। इससे आम और कतार में खड़े उपभोक्ताओं का हक मारा जाता है। सुधीर कुमार ने सख्त निर्देश दिया है कि कोई भी गैस एजेंसी संचालक अपने गोदाम से सिलेंडर का वितरण नहीं करेगा। यदि कोई एजेंसी इस नियम का उल्लंघन करते हुए पाई गई, तो इसे गंभीर अनियमितता माना जाएगा। सभी एजेंसियों को पाबंद किया गया है कि वे अपने वेंडरों की संख्या बढ़ाएं और यह सुनिश्चित करें कि हर सिलेंडर उपभोक्ता के घर तक सुरक्षित पहुँचे।

कालाबाजारी की आशंका और निगरानी तंत्र

​भागलपुर के शहरी और ग्रामीण इलाकों में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी की खबरें भी अक्सर आती रही हैं। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि घरेलू सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग (होटलों और ढाबों में) बढ़ने के कारण भी घरेलू उपभोक्ताओं को समय पर आपूर्ति नहीं मिल पाती। भौतिक सत्यापन के दौरान अधिकारियों की एक टीम यह भी देखेगी कि क्या एजेंसियां अपने निर्धारित कोटे का दुरुपयोग तो नहीं कर रही हैं।

​निरीक्षण टीम में आपूर्ति निरीक्षकों और प्रखंड विकास पदाधिकारियों को भी शामिल किया जा सकता है। यह टीम रैंडम आधार पर उन उपभोक्ताओं से भी बात करेगी जिन्होंने हाल ही में सिलेंडर प्राप्त किया है या जिनकी बुकिंग लंबित है। इससे यह पता चल सकेगा कि वेंडर द्वारा निर्धारित मूल्य से अधिक राशि की मांग तो नहीं की जा रही है। भागलपुर में पिछले कुछ समय में कॉमर्शियल गैस के दामों में उतार-चढ़ाव के कारण घरेलू गैस की मांग और डायवर्जन की संभावना बढ़ी है, जिसे रोकने के लिए यह सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है।

उपभोक्ताओं के लिए विशेष अपील और निर्देश

​जिला आपूर्ति पदाधिकारी ने जिले के तमाम गैस उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपनी बुकिंग के बाद डीएसी कोड का इंतजार करें और यदि अनावश्यक विलंब हो, तो तुरंत जिला नियंत्रण कक्ष को सूचित करें। उन्होंने यह भी कहा कि उपभोक्ता वेंडरों को तब तक पैसे न दें जब तक वे रसीद और वजन के साथ सिलेंडर मुहैया न कराएं।

​प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि गैस रिफिलिंग की प्रक्रिया को डिजिटल ट्रैक किया जा रहा है। सुधीर कुमार ने बताया कि तेल कंपनियों के अधिकारियों से भी संपर्क साधा गया है ताकि सॉफ्टवेयर से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों को दूर किया जा सके। भागलपुर के उपभोक्ताओं के लिए यह राहत की बात है कि प्रशासन अब केवल आदेश जारी नहीं कर रहा, बल्कि सीधे फील्ड में उतरकर एजेंसियों की जवाबदेही तय करने जा रहा है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य आगामी त्योहारों और सीजन के दौरान गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

​एजेंसियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे अपने यहाँ प्राप्त होने वाली शिकायतों का एक रजिस्टर संधारित करें और साप्ताहिक रूप से उसकी रिपोर्ट जिला आपूर्ति कार्यालय को भेजें। जिन क्षेत्रों में गैस वेंडरों की कमी है, वहां नए वेंडर नियुक्त करने की सलाह दी गई है। प्रशासन की इस सक्रियता के बाद उम्मीद की जा रही है कि आने वाले एक सप्ताह के भीतर भागलपुर में गैस वितरण की स्थिति सामान्य हो जाएगी। सुधीर कुमार ने दोहराया है कि जनता की सुविधा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और रसोई गैस जैसी अनिवार्य वस्तु की आपूर्ति में कोई भी लापरवाही अक्षम्य है।

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