भागलपुर स्थापना दिवस: दूसरे दिन रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम, प्रतिभागियों ने दिखाई प्रतिभा

भागलपुर, 05 मई 2026। भागलपुर जिला स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों के दूसरे दिन शहर का सांस्कृतिक माहौल पूरी तरह रंगीन और जीवंत नजर आया। कला एवं संस्कृति विभाग तथा जिला प्रशासन भागलपुर के संयुक्त तत्वावधान में अंग संस्कृति भवन और भागलपुर संग्रहालय परिसर में विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कलाकारों, छात्रों और आम नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत देशभक्ति के जोश से ओत-प्रोत ‘वंदे मातरम्’ और बिहार गीत से हुई, जिसने पूरे माहौल को भावनात्मक और उत्साहपूर्ण बना दिया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम के पहले खंड में प्रदर्श कला प्रतियोगिता के अंतर्गत लोक गीत गायन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इसमें ऑडिशन के बाद चुने गए कुल 15 प्रतिभागियों ने मुख्य मंच पर अपनी प्रस्तुति दी। प्रतिभागियों ने पारंपरिक लोक धुनों और गीतों के माध्यम से अंग क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छह प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। इसमें संरोज अली ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि मोहित कुमार दूसरे और अमन कुमार तीसरे स्थान पर रहे। प्रतिभागियों की प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया और तालियों की गूंज से पूरा सभागार गूंज उठा।

इसी क्रम में लोक नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें विभिन्न समूहों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर अपनी कला का प्रदर्शन किया। राहुल कुमार एवं उनके समूह ने प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि किलकारी बिहार बाल भवन, बरारी की टीम दूसरे स्थान पर रही। तीसरे स्थान पर सुरभि सुमन एवं उनके समूह ने बाजी मारी। इन प्रस्तुतियों में लोक संस्कृति की झलक के साथ-साथ कलाकारों की ऊर्जा और समर्पण भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।

कार्यक्रम में दृश्य कला को भी विशेष स्थान दिया गया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन और विचारों पर आधारित एक विशेष कलाकार शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें भागलपुर के वरिष्ठ कलाकारों—मनोज पंडित, उलूपी झा, बिजय शाह, अनिल कुमार, कुमार संभव और मनोज कुमार—ने भाग लिया। इन कलाकारों ने अपने कैनवास पर गांधी जी के जीवन के विभिन्न पहलुओं को लोक कला, मूर्ति कला और समसामयिक शैली में उकेरा। यह शिविर न केवल कला प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना, बल्कि युवाओं को भी कला के प्रति प्रेरित करने में सफल रहा।

इसके साथ ही भागलपुर की कला, संस्कृति और धरोहर पर आधारित फोटोग्राफी प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को कैमरे में कैद किया। इस प्रतियोगिता में कुमार अनुराग और प्रेम केडिया ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया। उनकी तस्वीरों में भागलपुर की विरासत और सौंदर्य का अनूठा चित्रण देखने को मिला।

कार्यक्रम के दौरान एक्सटेंपोर (तत्काल भाषण) प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने कला, संस्कृति और इतिहास से जुड़े विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इस प्रतियोगिता ने युवाओं की अभिव्यक्ति क्षमता और ज्ञान को सामने लाने का एक सशक्त मंच प्रदान किया। विजेताओं को मंच से सम्मानित किया गया।

विभिन्न प्रतियोगिताओं और गतिविधियों में कुल 150 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सभी प्रतिभागियों को जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन द्वारा मंच से सहभागिता प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। कार्यक्रम में निर्णायक मंडल की भूमिका वरिष्ठ कलाकारों—अरविंद यादव, अजय अटल, शैलेन्द्र कुमार और गोपाल कृष्ण मिश्रा—ने निभाई। उनके योगदान को भी अंग वस्त्र, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर अंग प्रदेश की प्रसिद्ध लोक कला मंजूषा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले मंजूषा गुरु मनोज पंडित को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति भवन तक मंजूषा कला को पहुंचाने में उनके योगदान को सराहा गया और दर्शकों ने जोरदार तालियों के साथ उनका स्वागत किया।

कार्यक्रम का संचालन वैभव राज और अणिमा सिन्हा ने किया, जिनकी प्रस्तुति शैली ने पूरे आयोजन को आकर्षक बनाए रखा। उनके प्रभावशाली संचालन ने कार्यक्रम की गति और ऊर्जा को बनाए रखा।

जिला प्रशासन ने जानकारी दी कि स्थापना दिवस के तीसरे दिन उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को कहलगांव अनुमंडल के अंतर्गत बटेश्वर स्थान और ऐतिहासिक विक्रमशीला महाविहार के भ्रमण पर ले जाया जाएगा। इससे प्रतिभागियों को जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को करीब से जानने और समझने का अवसर मिलेगा।

कुल मिलाकर, स्थापना दिवस के दूसरे दिन आयोजित ये सांस्कृतिक कार्यक्रम न केवल मनोरंजन का माध्यम बने, बल्कि भागलपुर की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को सहेजने और आगे बढ़ाने का एक प्रभावी प्रयास भी साबित हुए। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि संस्कृति और कला के माध्यम से समाज को जोड़ा जा सकता है और युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ा जा सकता है।

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