भागलपुर में खतरनाक पेड़ों पर चलेगा प्रशासन का अभियान: तीन दिनों में हटाए जाएंगे सूखे और जर्जर वृक्ष, डीएम ने दिए सख्त निर्देश

भागलपुर। पिछले कई दिनों से लगातार हो रही तेज आंधी और बारिश के बीच भागलपुर जिला प्रशासन ने शहर की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मौसम की मार से शहर के विभिन्न इलाकों में कई पुराने और विशाल पेड़ गिरने की घटनाओं के बाद अब प्रशासन ने सूखे, जर्जर और खतरनाक पेड़ों को हटाने के लिए विशेष अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने वन विभाग को निर्देश दिया है कि ऐसे सभी पेड़ों की पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर उन्हें हटाया जाए ताकि भविष्य में किसी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।

हाल के दिनों में भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में मौसम का मिजाज लगातार बदला हुआ है। तेज आंधी, भारी बारिश और गरज-चमक के कारण कई स्थानों पर पुराने पेड़ धराशायी हो गए हैं। इससे न केवल यातायात प्रभावित हुआ बल्कि कई क्षेत्रों में लोगों को घंटों तक परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ जगहों पर सड़कें पूरी तरह अवरुद्ध हो गईं, जबकि कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी बाधित हुई।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार बीते चार दिनों के दौरान शहर में कई स्थानों से पेड़ गिरने की शिकायतें मिली हैं। विशेष रूप से पुराने और अंदर से खोखले हो चुके वृक्ष तेज हवाओं का दबाव नहीं झेल सके और सड़कों, पार्कों तथा सार्वजनिक स्थलों पर गिर गए। हालांकि अधिकांश मामलों में बड़ी जनहानि नहीं हुई, लेकिन प्रशासन इसे गंभीर चेतावनी के रूप में देख रहा है।

इसी स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने संबंधित विभागों के साथ समीक्षा बैठक की और वन प्रमंडल पदाधिकारी को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शहर में मौजूद ऐसे सभी वृक्षों की पहचान की जाए जो सूख चुके हैं, कमजोर हो चुके हैं या लोगों के लिए खतरा बन सकते हैं। ऐसे पेड़ों को प्राथमिकता के आधार पर हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाए।

जिलाधिकारी ने विशेष रूप से सैंडिस कंपाउंड और उसके आसपास के क्षेत्रों का उल्लेख किया। सैंडिस कंपाउंड भागलपुर का प्रमुख सार्वजनिक स्थल है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग सुबह और शाम की सैर के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा यहां खेल गतिविधियां, सामाजिक कार्यक्रम और अन्य आयोजन भी होते रहते हैं। ऐसे में वहां मौजूद पुराने और जर्जर पेड़ों को लेकर प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि सैंडिस कंपाउंड सहित शहर के अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर वन विभाग की टीम सर्वेक्षण करेगी। इस दौरान उन पेड़ों को चिह्नित किया जाएगा जो सूख चुके हैं, अंदर से कमजोर हो गए हैं या तेज हवा चलने पर गिरने का खतरा पैदा कर सकते हैं। विशेषज्ञों की राय के आधार पर ऐसे वृक्षों को हटाया जाएगा।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल पेड़ काटने की प्रक्रिया नहीं होगी, बल्कि सुरक्षा और पर्यावरण दोनों को ध्यान में रखते हुए की जाएगी। जो पेड़ पूरी तरह स्वस्थ हैं और किसी प्रकार का खतरा नहीं पैदा कर रहे हैं, उन्हें संरक्षित रखा जाएगा। केवल उन्हीं वृक्षों को हटाया जाएगा जो लोगों की सुरक्षा के लिए जोखिम बन चुके हैं।

प्रशासन का दावा है कि अगले तीन दिनों के भीतर शहर में चिन्हित सभी खतरनाक और सूखे पेड़ों को हटाने का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए वन विभाग, नगर निगम और अन्य संबंधित एजेंसियों को समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया गया है। जहां आवश्यकता होगी, वहां विशेष मशीनों और तकनीकी उपकरणों का भी उपयोग किया जाएगा।

स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन के इस निर्णय का स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में कई बार ऐसी स्थिति बनी जब अचानक पेड़ गिरने से दुर्घटना होने का खतरा पैदा हो गया। कई लोगों ने यह भी कहा कि शहर के विभिन्न हिस्सों में वर्षों पुराने पेड़ हैं जिनकी नियमित जांच नहीं हो पाती। ऐसे में समय-समय पर उनकी स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों के कारण पुराने वृक्षों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यदि कोई पेड़ अंदर से खोखला हो जाए या उसकी जड़ें कमजोर हो जाएं तो तेज हवाओं और बारिश के दौरान उसके गिरने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए शहरी क्षेत्रों में वृक्षों की नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद आवश्यक है।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पेड़ों की पहचान के दौरान उनकी उम्र, संरचनात्मक स्थिति, शाखाओं की मजबूती और जड़ों की स्थिति का भी मूल्यांकन किया जाएगा। जिन पेड़ों को तत्काल खतरे की श्रेणी में रखा जाएगा, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हटाया जाएगा। वहीं जहां संभव होगा, वहां पेड़ों की छंटाई और संरक्षण के उपाय भी किए जाएंगे।

शहर के कई हिस्सों में हाल के दिनों में पेड़ गिरने के कारण यातायात प्रभावित हुआ था। कुछ सड़कों पर घंटों तक आवागमन बाधित रहा। बिजली के तारों पर पेड़ गिरने के कारण कई इलाकों में विद्युत आपूर्ति भी ठप हो गई थी। इन घटनाओं ने प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था को लेकर और अधिक गंभीर बना दिया है।

पर्यावरणविदों का कहना है कि खतरनाक पेड़ों को हटाने के साथ-साथ नए पौधारोपण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। यदि किसी पुराने वृक्ष को सुरक्षा कारणों से हटाया जाता है तो उसकी भरपाई के लिए नए पौधे लगाए जाने चाहिए। इससे शहर का हरित क्षेत्र भी सुरक्षित रहेगा और पर्यावरण संतुलन भी बना रहेगा।

जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि प्रशासन की पहली प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा है। उन्होंने बताया कि मौसम विभाग द्वारा अगले कुछ दिनों तक आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे में किसी भी प्रकार की दुर्घटना को रोकने के लिए यह अभियान शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

प्रशासन ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है। यदि किसी क्षेत्र में कोई पेड़ अत्यधिक झुका हुआ दिखाई दे रहा हो या उसकी स्थिति खतरनाक लग रही हो तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित विभाग को दी जाए। ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

भागलपुर में शुरू होने जा रहा यह विशेष अभियान शहर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लगातार बदलते मौसम और बढ़ती प्राकृतिक चुनौतियों के बीच प्रशासन का यह प्रयास भविष्य में संभावित दुर्घटनाओं को रोकने में मददगार साबित हो सकता है। आने वाले दिनों में जब चिन्हित पेड़ों को हटाने की प्रक्रिया पूरी होगी, तब शहर के प्रमुख क्षेत्रों में लोगों को अधिक सुरक्षित वातावरण मिलने की उम्मीद है।

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