भागलपुर: फसल क्षति मुआवजा को लेकर डीएम सख्त, सत्यापन में लापरवाही पर अधिकारियों पर गिरी गाज

भागलपुर, 3 सितंबर 2025 —जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में मंगलवार को समीक्षा भवन में बाढ़ प्रभावित किसानों की फसल क्षति आकलन से संबंधित बैठक आयोजित हुई। बैठक में अब तक की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई और कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए।

बैठक में बताया गया कि जिले के आठ बाढ़ प्रभावित प्रखंडों से अब तक करीब 49,000 किसानों ने फसल क्षति मुआवजे के लिए आवेदन किया है। इनमें से मात्र 12,000 आवेदनों का सत्यापन पूरा हो सका है, जबकि अधिकांश आवेदन लंबित हैं।

डीएम चौधरी ने इस धीमी प्रगति पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि किसानों के हितों से जुड़ी इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी अनुमंडल कृषि पदाधिकारियों और प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में समीक्षा बैठक कर लंबित आवेदनों का 5 सितंबर तक हर हाल में सत्यापन पूरा करें।

डीएम ने कहा कि ऐसी शिकायतें मिली हैं कि कुछ साइबर कैफे से ही आवेदन स्वीकृत किए जा रहे हैं। इस पर उन्होंने तीनों अनुमंडल पदाधिकारियों को ऐसे संदिग्ध साइबर कैफे पर छापेमारी करने के आदेश दिए।

बैठक में यह भी पाया गया कि गोराडीह, पीरपैंती, सुल्तानगंज, कहलगांव और सबौर प्रखंडों में आवेदन सत्यापन की गति बेहद धीमी है। इस लापरवाही पर कार्रवाई करते हुए डीएम ने अनुमंडल कृषि पदाधिकारी सदर और सुल्तानगंज प्रखंड कृषि पदाधिकारी का वेतन तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया।

उन्होंने सभी कृषि समन्वयकों और किसान सलाहकारों को निर्देश दिया कि वे तुरंत प्रखंड मुख्यालय स्थित कृषि भवन में बैठकर राजस्व विभाग की साइट से डाटा का वेरिफिकेशन शुरू करें और इसे समयबद्ध ढंग से पूरा करें।

बैठक में उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह, अपर समाहर्ता (राजस्व) दिनेश राम, जिला शिक्षा पदाधिकारी राजकुमार शर्मा, अनुमंडल पदाधिकारी सदर विकास कुमार सहित कई वरीय अधिकारी मौजूद थे। वहीं, अनुमंडल पदाधिकारी नवगछिया ऋतुराज प्रताप सिंह और अनुमंडल पदाधिकारी कहलगांव अशोक कुमार मंडल समेत सभी बीडीओ और प्रखंड कृषि पदाधिकारी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।

डीएम चौधरी ने अंत में कहा कि किसानों को राहत पहुंचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी पदाधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर समयसीमा के भीतर कार्य पूरा नहीं हुआ तो और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


 

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