भागलपुर में न्याय की ‘कछुआ चाल’ पर भड़के DM: 3155 मामलों में से सिर्फ 30 का निष्पादन; लोक अभियोजकों को 30% मासिक लक्ष्य का अल्टीमेटम

भागलपुर | 25 फरवरी, 2026 भागलपुर जिले में लंबित कानूनी मामलों के निष्पादन की सुस्त रफ्तार पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को समीक्षा भवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने विधिक कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान लोक अभियोजकों (Public Prosecutors) के खराब प्रदर्शन को देख जिलाधिकारी ने गहरी नाराजगी व्यक्त की और इसे पूरी तरह से ‘अस्वीकार्य’ बताया।

आंकड़ों ने खोली पोल: 3155 में से मात्र 30 केस सुलझे

​बैठक में जब विधिक मामलों के निष्पादन के आंकड़े सामने आए, तो प्रशासन की चिंता बढ़ गई। समीक्षा के दौरान पाया गया कि:

  • लोक अभियोजक (PP) का प्रदर्शन: लोक अभियोजक के पास कुल 3155 मामले लंबित थे, जिनमें से उन्होंने केवल 30 मामलों का ही निष्पादन कराया। यह आंकड़ा कुल लंबित मामलों का 1% भी नहीं है।
  • विशेष मामलों की उपेक्षा: उत्पाद (Excise), एनडीपीएस (NDPS), पीएस (PS) और एससी/एसटी (SC/ST) जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण मामलों के निपटारे की स्थिति अत्यंत दयनीय पाई गई।

​इसके विपरीत, जिला अभियोजन पदाधिकारी (DPO) की रिपोर्ट कुछ बेहतर रही। उन्होंने बताया कि उनके स्तर से 672 मामलों का निष्पादन किया गया है, जिनमें से 47 मामलों में दोषियों को सजा दिलाई गई है।

एपीपी (APP) का तर्क: ‘पीओ’ की वजह से हो रही देरी

​समीक्षा के दौरान कई सहायक लोक अभियोजकों (APP) ने अपनी सफाई पेश की। उनका तर्क था कि संबंधित पीठासीन अधिकारियों (Presiding Officers – PO) द्वारा मामलों की सुनवाई बहुत धीमी गति से की जा रही है, जिस कारण न्याय मिलने में देरी हो रही है। हालांकि, जिलाधिकारी ने इन तर्कों को अपर्याप्त माना और कार्यक्षमता में सुधार की सख्त हिदायत दी।

DM का अल्टीमेटम: “काम नहीं करने वालों के खिलाफ होगी रिपोर्ट”

​जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी ने निष्पादन की इस स्थिति पर खेद प्रकट करते हुए नए लक्ष्य निर्धारित किए हैं:

  1. 30% का लक्ष्य: अब सभी पीपी (PP), डीपीओ (DPO) और एपीपी (APP) को प्रतिमाह कम से कम 30% लंबित मामलों का निष्पादन सुनिश्चित करना होगा।
  2. जवाबदेही तय: डीएम ने स्पष्ट कहा कि यदि कोई एपीपी अपने कार्यों में कोताही बरतता है या लक्ष्य पूरा नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल विभागीय प्रतिवेदन भेजा जाए।
  3. न्याय में देरी, न्याय से वंचित: डीएम ने जोर देकर कहा कि विधिक मामलों में देरी से आम जनता का सिस्टम पर से भरोसा कम होता है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैठक में मौजूद रहे आला अधिकारी

​कानून-व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया को गति देने के लिए बुलाई गई इस बैठक में नगर पुलिस अधीक्षक (City SP) श्री शैलेंद्र सिंह, अपर समाहर्ता विधि-व्यवस्था श्री राकेश रंजन, जिला विधि शाखा की प्रभारी पदाधिकारी श्रीमती मीनाक्षी सहित जिले के सभी संबंधित वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे।

VOB का नजरिया: कागजी खानापूर्ति से बाहर निकलना होगा

​भागलपुर के न्यायालयों में हजारों लोग वर्षों से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। लोक अभियोजक का 3155 में से केवल 30 केस निपटाना यह दर्शाता है कि सरकारी तंत्र किस कदर सुस्ती का शिकार है। डीएम की ओर से 30% का मासिक लक्ष्य एक साहसिक कदम है, लेकिन इसे धरातल पर उतारने के लिए न्यायिक और प्रशासनिक तालमेल को और बेहतर बनाना होगा।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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