
पटना। आगामी मुहर्रम पर्व 2026 को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सांप्रदायिक सौहार्द के साथ संपन्न कराने के लिए बिहार सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के उद्देश्य से सोमवार को उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारियों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को स्पष्ट एवं सख्त प्रशासनिक निर्देश जारी किए गए। सरकार ने संकेत दिया है कि मुहर्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग (मुख्य सचिव कोषांग) की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 22 जून 2026 को शाम 5:30 बजे आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में आगामी मुहर्रम पर्व की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में शांति, भाईचारा और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखना था। प्रशासन ने विशेष रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं।
बैठक की अध्यक्षता बिहार के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) ने संयुक्त रूप से की। दोनों शीर्ष अधिकारियों ने राज्य में कानून-व्यवस्था को हर हाल में मजबूत बनाए रखने का संकल्प दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विगत वर्षों के अनुभवों और खुफिया सूचनाओं को ध्यान में रखते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि मुहर्रम केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रशासनिक दृष्टि से भी संवेदनशील अवसर है। ऐसे समय में जिला प्रशासन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिया कि हर स्तर पर समन्वय और सतर्कता सुनिश्चित की जाए।
बैठक के दौरान सबसे महत्वपूर्ण निर्देश जुलूस लाइसेंसिंग को लेकर दिया गया। मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि राज्य में कोई भी मुहर्रम जुलूस बिना पूर्व अनुमति या लाइसेंस के नहीं निकाला जाएगा। उन्होंने शत-प्रतिशत लाइसेंसिंग सुनिश्चित करने का निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक जुलूस की रूट मैपिंग, आयोजकों की पहचान और सुरक्षा व्यवस्था पहले से तय होनी चाहिए।
सरकार का मानना है कि लाइसेंस आधारित व्यवस्था से जुलूसों की निगरानी अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी। इससे विवादित मार्गों, समय और भीड़ नियंत्रण पर बेहतर नजर रखी जा सकेगी। प्रशासन ने यह भी कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होगी।
शांति समितियों को सक्रिय करने पर भी विशेष जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि सभी संवेदनशील थाना और अनुमंडल क्षेत्रों में तुरंत शांति समिति की बैठकें आयोजित की जाएं। इन समितियों में स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, धार्मिक प्रतिनिधियों और जनप्रतिनिधियों को शामिल कर सामुदायिक समन्वय मजबूत किया जाए।
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर संवाद किसी भी तनावपूर्ण स्थिति को रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम है। असामाजिक तत्वों की पहचान में शांति समिति के सक्रिय सदस्यों का सहयोग लेने के निर्देश भी दिए गए। प्रशासन का मानना है कि सामुदायिक भागीदारी से संभावित विवादों को समय रहते रोका जा सकता है।
मुहर्रम जुलूसों में डीजे और भड़काऊ गानों को लेकर भी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि डीजे का उपयोग पूर्ण रूप से प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा किसी भी प्रकार की सांप्रदायिक नारेबाजी, उत्तेजक भाषण या भड़काऊ गानों की अनुमति नहीं होगी।
ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण पर भी विस्तृत चर्चा हुई। सरकार ने निर्देश दिया कि लाउडस्पीकर के उपयोग को निर्धारित नियमों के अनुसार नियंत्रित किया जाए। विभागीय परिपत्रों के तहत तय डेसिबल सीमा का सख्ती से पालन कराया जाएगा। रात्रि के प्रतिबंधित समय में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर पूरी तरह रोक रहेगी।
पुलिस महानिदेशक ने सुरक्षा प्रबंधन को लेकर कई अहम निर्देश जारी किए। उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिया कि पूर्व में चिन्हित सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष और सघन गश्ती सुनिश्चित की जाए। खासतौर पर उन स्थानों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए, जहां पहले विवाद या तनाव की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
जुलूसों के गैर-पारंपरिक या विवादास्पद मार्गों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस अधिकारियों से कहा गया है कि किसी भी नई रूट की अनुमति देने से पहले पूरी जांच और जोखिम मूल्यांकन किया जाए।
सोशल मीडिया निगरानी को इस बार सुरक्षा रणनीति का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि विभिन्न धर्मों, जातियों या समुदायों के बीच घृणा, वैमनस्य या तनाव फैलाने वाले सोशल मीडिया पोस्ट पर 24 घंटे साइबर निगरानी रखी जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि फेसबुक, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, एक्स और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैलाए जाने वाले भड़काऊ कंटेंट पर त्वरित कार्रवाई होगी। ऐसी पोस्ट करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।
संभावित उपद्रवियों पर निरोधात्मक कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। पुलिस महानिदेशक ने कहा कि शांति भंग करने की आशंका वाले व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें समय रहते हिरासत में लिया जाए। यदि कोई व्यक्ति असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में कार्रवाई की जाएगी।
जुलूसों के दौरान विवादास्पद झांकियों और प्रतिबंधित हथियारों पर भी पूर्ण रोक रहेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक झांकी, व्यंग्य चित्र या सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वाली प्रस्तुति की अनुमति नहीं होगी। इसके अतिरिक्त लाइसेंस की शर्तों से बाहर किसी भी प्रकार के धारदार, घातक या गैर-कानूनी हथियारों का प्रदर्शन प्रतिबंधित रहेगा।
धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर भी सरकार ने सख्त संदेश दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि किसी भी वर्ग के धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने, अपवित्र करने या तनाव फैलाने की कोशिश करने वाले तत्वों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक के अंत में बिहार सरकार ने राज्य के सभी नागरिकों से अपील की कि वे मुहर्रम पर्व को परंपरा, शांति और भाईचारे के साथ मनाएं। सरकार ने लोगों से अफवाहों से बचने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन को देने की अपील की।
कुल मिलाकर बिहार सरकार ने साफ संकेत दिया है कि मुहर्रम 2026 के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। सख्त लाइसेंसिंग, शांति समितियों की सक्रियता, पुलिस गश्ती, साइबर निगरानी और त्वरित कानूनी कार्रवाई के जरिए प्रशासन किसी भी संभावित चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।


