
सबौर | 02 मार्च, 2026: मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना भागलपुर के सबौर थाना क्षेत्र अंतर्गत आमडार गांव से सामने आई है। यहाँ महज कुछ रुपयों के ‘उधार’ को लेकर हुए विवाद ने इतना तूल पकड़ लिया कि दबंगों ने एक विकलांग बच्चे के सामने ही उसके परिवार पर जानलेवा हमला कर दिया। इस मारपीट में परिवार के दो सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
विवाद की जड़: एक छोटी सी दुकान और ‘उधार’ की जिद
घटना की पृष्ठभूमि किसी का भी दिल दुखा देने वाली है। पीड़ित परिवार का एक छोटा बेटा, जो शारीरिक रूप से विकलांग है, अपनी आजीविका चलाने के लिए घर के पास ही नाश्ते की एक छोटी सी दुकान चलाता है।
- रिफ्यूजल बना वजह: शनिवार को गांव के ही कुछ लोग दुकान पर पहुँचे और उधार में सामान मांगने लगे।
- दुकानदार की मजबूरी: जब विकलांग बच्चे ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए उधार देने से मना किया, तो आरोपी आगबबूला हो गए।
- हमला: गाली-गलौज से शुरू हुआ मामला देखते ही देखते मारपीट में बदल गया। जब बच्चे के परिजन शशि पासवान और कंचन देवी बीच-बचाव करने पहुँचे, तो आरोपियों ने उन पर भी हमला बोल दिया।
पीड़ित और आरोपी: कौन-कौन हैं शामिल?
मारपीट की इस घटना में परिवार के दो लोग लहूलुहान हो गए हैं:
- शशि पासवान (पिता- सुधीर पासवान)
- कंचन देवी (पति- बलराम पासवान)
घायल पक्ष ने इन लोगों पर लगाया है आरोप:
ग्रामीणों और पीड़ित परिवार के अनुसार, हमले का नेतृत्व राजू पासवान, मनीष पासवान, रुकमणी देवी और नीतू देवी कर रहे थे। आरोप है कि इन्होंने सुनियोजित तरीके से लाठी-डंडों से परिवार को निशाना बनाया।
पुलिस की कार्रवाई: जांच में जुटी सबौर पुलिस
वारदात के बाद पीड़ित परिवार ने सबौर थाना पहुँचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
पुलिस का बयान: “आवेदन प्राप्त हुआ है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। दोनों पक्षों से पूछताछ की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
VOB का नजरिया: क्या समाज से संवेदनाएं खत्म हो गई हैं?
एक विकलांग बच्चा जो अपनी शारीरिक अक्षमता के बावजूद मेहनत कर अपना पेट पाल रहा है, उसके साथ ऐसी हैवानियत समाज के गिरते स्तर को दर्शाती है। ‘उधार’ न देना दुकानदार का हक है, लेकिन इसके बदले उसे और उसके परिवार को लहूलुहान कर देना जंगलराज की याद दिलाता है। भागलपुर पुलिस को इस मामले में त्वरित गिरफ्तारी कर मिसाल पेश करनी चाहिए।


