अनुशासन की रडार पर भागलपुर डीसीएलआर: बिना सूचना बैठक से गायब रहने पर विभाग ने थमाया शोकॉज, प्रधान सचिव का कड़ा रुख

भागलपुर। बिहार के प्रशासनिक गलियारे में अनुशासन और जवाबदेही को लेकर सरकार की सख्ती अब जमीनी स्तर पर दिखने लगी है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने कर्तव्य के प्रति लापरवाही और आधिकारिक प्रोटोकॉल के उल्लंघन को लेकर भागलपुर की भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाया है। राज्य मुख्यालय में आयोजित एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक से बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहने के कारण विभाग ने उन्हें ‘शोकॉज’ (कारण बताओ नोटिस) जारी करने का निर्णय लिया है। गुरुवार को जारी हुई बैठक की आधिकारिक कार्यवाही (प्रोसिडिंग) ने न केवल भागलपुर जिला प्रशासन में हलचल मचा दी है, बल्कि राज्य के अन्य अधिकारियों के लिए भी यह एक चेतावनी साबित हो रही है कि अब बैठकों में उपस्थिति केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक अनिवार्य उत्तरदायित्व है।

​21 फरवरी की वह बैठक और विभाग की नाराजगी

​घटनाक्रम की शुरुआत 21 फरवरी 2026 को हुई, जब राजधानी पटना में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में एक राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक का मुख्य एजेंडा बिहार में चल रहे भूमि सुधार कार्यक्रमों, दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) की स्थिति, भूमि विवादों के निपटारे और राजस्व संग्रहण की प्रगति की समीक्षा करना था। राज्य के सभी जिलों के भूमि सुधार उप समाहर्ताओं को इस बैठक में सदेह उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे।

​बैठक की कार्यवाही के दौरान जब जिलों की समीक्षा शुरू हुई, तो भागलपुर की डीसीएलआर की अनुपस्थिति ने विभाग के शीर्ष अधिकारियों का ध्यान खींचा। नियमतः, यदि कोई अधिकारी किसी अपरिहार्य कारण से ऐसी महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं हो पाता है, तो उसे सक्षम प्राधिकारी या विभाग के प्रमुख को पूर्व में सूचित करना अनिवार्य होता है। लेकिन भागलपुर की डीसीएलआर की ओर से ऐसी कोई सूचना नहीं दी गई थी। विभाग ने इसे ‘अनुशासनहीनता’ और ‘सरकारी आदेश की अवहेलना’ के रूप में दर्ज किया है।

​प्रोसिडिंग में स्पष्ट उल्लेख: लापरवाही की पुष्टि

​गुरुवार को जब इस बैठक की विस्तृत प्रोसिडिंग जारी की गई, तो उसमें भागलपुर डीसीएलआर की अनुपस्थिति को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। विभाग की रिपोर्ट में साफ तौर पर दर्ज है कि भागलपुर की भूमि सुधार उप समाहर्ता बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के गायब पाई गईं। प्रधान सचिव ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए तुरंत स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया है।

​अधिकारी को अब यह बताना होगा कि आखिर किन परिस्थितियों में उन्होंने मुख्यालय के आदेश की अनदेखी की और विभाग को सूचना देना भी उचित नहीं समझा। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू की जा सकती है, जिसका असर उनकी सेवा पुस्तिका और भविष्य की पदोन्नति पर भी पड़ सकता है।

​डीसीएलआर का पद और भागलपुर की भूमि समस्याएं

​भागलपुर जैसे संवेदनशील जिले में डीसीएलआर का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यहाँ जमीन से जुड़े विवादों की संख्या काफी अधिक है और अदालती मामलों का बोझ भी कम नहीं है।

  • भूमि विवादों का निपटारा: डीसीएलआर कोर्ट में बड़ी संख्या में जमीन संबंधी अपीलें लंबित हैं।
  • राजस्व की निगरानी: प्रखंडों में अंचलाधिकारियों (CO) के कामकाज की निगरानी और राजस्व लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करना डीसीएलआर की प्रमुख जिम्मेदारी है।
  • भूमि सुधार योजनाएं: सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं जैसे कि जल-जीवन-हरियाली के तहत अतिक्रमण हटाना या भूमिहीनों को पर्चा देना, इन्हीं अधिकारियों की देखरेख में होता है।

​जब राज्य स्तर पर इन मुद्दों पर नीतिगत चर्चा होती है और समीक्षा की जाती है, तो स्थानीय अधिकारी की अनुपस्थिति से जिले का पक्ष अधूरा रह जाता है। विभाग का मानना है कि भागलपुर जैसे बड़े जिले की डीसीएलआर का बैठक से नदारद रहना यह दर्शाता है कि वे राज्य की प्राथमिकताओं को लेकर गंभीर नहीं हैं।

​प्रशासनिक सख्ती का व्यापक संदेश

​राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में इस समय अनुशासन को लेकर एक नया माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। हाल ही में उपमुख्यमंत्री और विभागीय मंत्रियों ने भी स्पष्ट किया है कि काम में कोताही और बैठकों से नदारद रहने वाले अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा। भागलपुर डीसीएलआर के खिलाफ शोकॉज की यह कार्रवाई उसी कड़ी का हिस्सा है।

​यह कार्रवाई अन्य अधिकारियों के लिए भी एक संदेश है कि मुख्यालय अब केवल कागजी रिपोर्टों पर निर्भर नहीं है, बल्कि वह अधिकारियों की सक्रियता और भागीदारी को भी बारीकी से देख रहा है। खासकर ऐसे समय में जब अंचल कार्यालयों में भ्रष्टाचार और दाखिल-खारिज में देरी को लेकर जनता के बीच असंतोष है, मध्यम स्तर के अधिकारियों की यह लापरवाही विभाग की छवि को नुकसान पहुँचाती है।

​क्या हो सकती है अगली कार्रवाई?

​शोकॉज जारी होने के बाद भागलपुर डीसीएलआर को एक निश्चित समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रखना होगा। विभाग यह जांचेगा कि क्या उनकी अनुपस्थिति किसी वास्तविक आपातकालीन स्थिति के कारण थी या यह केवल प्रशासनिक शिथिलता का परिणाम था।

  1. चेतावनी (Censure): यदि कारण बहुत गंभीर नहीं हुआ, तो उन्हें कड़ी चेतावनी देकर छोड़ा जा सकता है।
  2. प्रतिकूल टिप्पणी (Adverse Entry): उनकी वार्षिक कार्य निष्पादन रिपोर्ट (ACR) में इस लापरवाही को दर्ज किया जा सकता है।
  3. विभागीय जांच: बार-बार ऐसी त्रुटि पाए जाने पर सस्पेंशन या ट्रांसफर जैसी बड़ी कार्रवाई भी मुमकिन है।

​वर्तमान में भागलपुर जिला प्रशासन में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। जिला पदाधिकारी भी इस मामले में विभाग के रुख को देखते हुए स्थानीय स्तर पर रिपोर्ट तलब कर सकते हैं।

​निष्कर्ष: जवाबदेही की पटरी पर लौटता प्रशासन

​भागलपुर डीसीएलआर को मिला यह शोकॉज यह याद दिलाता है कि सरकारी तंत्र में ‘पद’ के साथ ‘उत्तरदायित्व’ भी आता है। प्रधान सचिव की अध्यक्षता वाली बैठक राज्य की नीति निर्धारण का केंद्र होती है, और वहां से गायब रहना सीधे तौर पर शासन की प्रक्रिया को बाधित करना है।

​बिहार सरकार अब ‘सुशासन’ के दावों को धरातल पर उतारने के लिए ‘परफॉर्मेंस-बेस्ड’ ब्यूरोक्रेसी की ओर बढ़ रही है। जमीन के विवादों से जूझती भागलपुर की जनता के लिए यह जरूरी है कि उनका नेतृत्व करने वाले अधिकारी सक्रिय रहें और राज्य की योजनाओं को लागू करने में मुख्यालय के साथ कदम से कदम मिलाकर चलें। इस शोकॉज ने यह तय कर दिया है कि आने वाले दिनों में भागलपुर सहित पूरे प्रदेश के राजस्व अधिकारियों को अपनी कार्यशैली में सुधार करना होगा, अन्यथा विभाग का हंटर चलने में देर नहीं लगेगी। अब सबकी नजरें डीसीएलआर के जवाब और विभाग की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

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