​बिहार में हीट वेव का अलर्ट: भागलपुर में पारा 42 डिग्री पार जाने की आशंका

भागलपुर। बिहार के अंग क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में गर्मी ने अपना प्रचंड रूप दिखाना शुरू कर दिया है। बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को भागलपुर समेत राज्य के कई जिले भीषण ‘हीट वेव’ (उष्ण लहर) की चपेट में रहे, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। मौसम विभाग की ताजा चेतावनी के अनुसार, आने वाले दो दिन यानी गुरुवार और शुक्रवार को गर्मी का यह सितम और अधिक बढ़ने वाला है। लगातार बढ़ते पारे और गर्म हवाओं के थपेड़ों ने सड़कों पर सन्नाटा पसरा दिया है। मौसम वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल 25 अप्रैल तक इस झुलसाने वाली गर्मी से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

भीषण गर्मी से सड़कों पर पसरा सन्नाटा

​बुधवार को भागलपुर का अधिकतम तापमान 40.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 23.6 डिग्री सेल्सियस रहा। हालांकि, यह केवल आंकड़ा है; वास्तविक रूप में महसूस होने वाली गर्मी (फील लाइक टेम्परेचर) इससे कहीं अधिक दर्ज की गई। सुबह 11 बजे के बाद से ही शहर के प्रमुख चौक-बाजार जैसे खलीफाबाग, वैरायटी चौक और स्टेशन रोड पर सन्नाटा दिखाई देने लगा। सड़कों पर केवल इक्का-दुक्का वाहन ही चलते नजर आए, जो यह बताने के लिए पर्याप्त था कि लोग घरों से बाहर निकलने का जोखिम नहीं लेना चाहते।

​हीट वेव का असर केवल भागलपुर तक सीमित नहीं रहा। बिहार के मोतिहारी, पूर्वी चंपारण और शेखपुरा जिलों में भी लू के थपेड़ों ने लोगों को बेहाल कर दिया। यह लगातार दूसरा दिन था जब भागलपुर जिला उष्ण लहर की चपेट में रहा। गर्म पछुआ हवाओं के कारण वातावरण में नमी कम हो रही है, जिससे ‘ड्राई हीट’ का असर बढ़ गया है।

अस्पतालों की स्थिति: उमस और गर्मी के आगे पंखे हुए फेल

​प्रचंड गर्मी का सबसे बुरा असर सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर देखने को मिल रहा है। भागलपुर के मायागंज अस्पताल (JLNMCH) के ओपीडी में मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी और उमस के कारण वार्डों में लगे पंखे केवल गर्म हवा फेंक रहे हैं, जो राहत देने में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं।

​अस्पताल पहुँचने वाले मरीजों में ज्यादातर हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और तेज बुखार की शिकायत वाले लोग शामिल हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान वातावरणीय स्थिति में शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है, जिससे ‘सनस्ट्रोक’ का खतरा बढ़ जाता है। मरीजों की बढ़ती संख्या और बुनियादी सुविधाओं की कमी ने स्वास्थ्य प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

मौसम वैज्ञानिक का पूर्वानुमान: 42 डिग्री तक जाएगा पारा

​बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. बीरेंद्र कुमार ने आगामी दिनों के लिए डराने वाले आंकड़े साझा किए हैं। उनके अनुसार, गुरुवार से लेकर 25 अप्रैल तक गर्मी का कहर और अधिक बढ़ेगा।

आगामी तापमान का अनुमान:

  • गुरुवार (23 अप्रैल): अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने की संभावना है।
  • शुक्रवार एवं शनिवार (24-25 अप्रैल): पारा 41 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना रहेगा।
  • 26 अप्रैल: इस दिन गरज के साथ हल्की बौछारें पड़ने का अनुमान है, जिससे आंशिक राहत मिल सकती है। हालांकि, उस दिन भी तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब ही रहेगा।

​डॉ. बीरेंद्र कुमार ने बताया कि इस दौरान चलने वाली पछुआ हवाओं की गति तेज रहेगी, जिससे हवा में धूल के कण और गर्मी बढ़ेगी। कृषि क्षेत्र के लिए भी यह समय चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि अधिक तापमान खड़ी फसलों की नमी सोख लेता है।

IMD का रेड अलर्ट: 11 से 4 बजे तक बाहर न निकलें

​भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बिहार के लिए येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों से अपील की है कि वे अपनी जीवनशैली में बदलाव लाएं। विभाग ने विशेष रूप से सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। यह वह समय होता है जब अल्ट्रा-वायलेट किरणों और लू का प्रभाव सबसे अधिक होता है।

सावधानी के प्रमुख उपाय:

  • हाइड्रेशन: प्यास न लगने पर भी लगातार पानी पीते रहें। ओआरएस (ORS), नींबू पानी, लस्सी और छाछ का सेवन बढ़ाएं।
  • सुरक्षा: यदि बाहर निकलना बहुत जरूरी हो, तो सिर को सफेद सूती कपड़े या टोपी से ढंककर रखें।
  • पोशाक: हल्के रंग के और ढीले सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर का तापमान सामान्य बना रहे।
  • खान-पान: बाहर के खुले और कटे हुए फलों या बासी भोजन से बचें। खीरा, तरबूज और खरबूजा जैसे फल अधिक खाएं।

शहरी बुनियादी ढांचे पर दबाव

​बढ़ती गर्मी ने भागलपुर नगर निगम के दावों की भी पोल खोल दी है। शहर के कई वार्डों में पानी की किल्लत शुरू हो गई है। भू-जल स्तर गिरने के कारण चापाकल सूख रहे हैं और बिजली की बढ़ती मांग के कारण ट्रांसफार्मरों पर लोड बढ़ गया है, जिससे अघोषित कटौती की समस्या उत्पन्न हो रही है। प्रशासन के लिए चुनौती केवल तापमान नहीं, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला को बनाए रखना भी है।

​अंग जनपद के अन्य जिलों जैसे बांका और मुंगेर में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में काम करने वाले मजदूरों के लिए यह समय सबसे अधिक कष्टदायी है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी फसलों में शाम के समय हल्की सिंचाई करें ताकि मिट्टी की नमी बरकरार रहे।

25 अप्रैल तक कोई राहत नहीं

​संक्षेप में, बिहार के लिए अगला एक सप्ताह अग्निपरीक्षा जैसा होने वाला है। 26 अप्रैल को होने वाली संभावित बारिश ही एकमात्र उम्मीद की किरण है, लेकिन तब तक लोगों को प्रकृति के इस प्रकोप से खुद को बचाना होगा। प्रशासन को चाहिए कि वह सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल (प्याऊ) की व्यवस्था करे और अस्पतालों में हीट-स्ट्रोक वार्डों को पूरी तरह सक्रिय रखे। वॉयस ऑफ बिहार (VOB) अपने सभी पाठकों से अनुरोध करता है कि वे धूप से बचें और सुरक्षित रहें।

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