
भागलपुर। बिहार के भागलपुर जिले में दहेज की लालसा ने एक और हंसते-खेलते संसार को उजाड़ दिया है। जिले के बाथ थाना क्षेत्र अंतर्गत कस्टीकरी गांव में एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। मृतिका की पहचान पूजा कुमारी के रूप में हुई है, जिसकी शादी करीब 11 साल पहले बड़े ही अरमानों के साथ मुनेश्वर कुमार से हुई थी। लेकिन किसे पता था कि एक दशक से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी ससुराल वालों की भूख शांत नहीं होगी और इसका अंत एक अर्थी के रूप में होगा। घटना के बाद मृतिका के मायके वालों ने ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना और हत्या के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस वारदात के बाद से कस्टीकरी गांव में तनाव व्याप्त है और मृतिका के मायके पक्ष के लोग न्याय की गुहार लगा रहे हैं। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है और मामले की तहकीकात के लिए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
मुंगेर से भागलपुर तक का दुखद सफर: 11 साल का संघर्ष और मौत
पूजा कुमारी मूल रूप से मुंगेर जिले के खड़गपुर तेगड़ा (थाना खरगापुर) की रहने वाली थी। वर्ष 2013 में उसकी शादी भागलपुर के बाथ थाना क्षेत्र के कस्टीकरी निवासी मुनेश्वर कुमार के साथ बड़े ही धूमधाम से संपन्न हुई थी। मायके वालों ने अपनी क्षमता के अनुसार दान-दहेज देकर बेटी को विदा किया था, इस उम्मीद के साथ कि वह अपने ससुराल में सुखी रहेगी। लेकिन शादी के कुछ ही समय बाद से पूजा की खुशियों पर दहेज के दानव की नजर लग गई।
परिजनों का आरोप है कि पिछले 11 वर्षों से पूजा को दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। उसे न केवल मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था, बल्कि शारीरिक हिंसा का भी सामना करना पड़ता था। 11 साल का यह लंबा अरसा पूजा ने अपने बच्चों के भविष्य और समाज के डर से सहन किया, लेकिन अंततः उसकी जीवनलीला संदिग्ध परिस्थितियों में समाप्त हो गई। पूजा अपने पीछे एक बेटा और दो बेटियों का भरा-पूरा संसार छोड़ गई है, जिनके सिर से अब मां का साया हमेशा के लिए उठ चुका है। इन मासूम बच्चों के रोने-बिलखने से पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया है।
सात दिन पहले हुई थी पंचायत, फिर भी नहीं पिघला ससुराल वालों का दिल
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पूजा की मौत से ठीक एक सप्ताह पहले दोनों पक्षों के बीच विवाद काफी बढ़ गया था। मामला इतना गंभीर था कि गांव के प्रबुद्ध लोगों की मौजूदगी में एक औपचारिक पंचायत बुलाई गई थी। परिजनों के अनुसार, पंचायत में विवाद को सुलझाने की कोशिश की गई थी और वहां दोनों पक्षों के बीच एक समझौता पत्र यानी ‘बॉन्ड’ भी तैयार किया गया था।
हैरानी की बात यह है कि इस समझौते के तहत एक बाउंड्री (सीमा दीवार) बनाने की बात तय हुई थी, जिसे लेकर अक्सर झगड़ा होता था। मृतिका के भाई विपिन कुमार के पास उस बॉन्ड की कॉपी अब भी मौजूद है, जो इस बात का गवाह है कि पूजा का ससुराल में रहना कितना संघर्षपूर्ण था। मायके पक्ष का कहना है कि पंचायत में हुए समझौते के बाद उन्हें उम्मीद थी कि अब पूजा का जीवन शांतिपूर्ण होगा, लेकिन ठीक एक हफ्ते बाद ही उसकी मौत की खबर ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। वे इसे आत्महत्या नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश और हत्या मान रहे हैं।
मायके वालों की चीख-पुकार और न्याय की मांग
जैसे ही पूजा की मौत की खबर मुंगेर स्थित उसके मायके पहुँची, घर में कोहराम मच गया। भाई विपिन कुमार और अन्य परिजन तुरंत कस्टीकरी गांव पहुँचे। वहां का मंजर देखकर उनकी रूह कांप गई। विपिन कुमार ने सीधे तौर पर अपने बहनोई मुनेश्वर कुमार और उसके परिवार के अन्य सदस्यों पर दहेज के लिए गला घोंटने या प्रताड़ित कर मार डालने का आरोप लगाया है।
विपिन कुमार का कहना है कि उनकी बहन ने हमेशा परिवार को जोड़कर रखने की कोशिश की, लेकिन ससुराल वालों ने उसे कभी अपना नहीं समझा। उनकी मांग है कि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच करे और उन सभी लोगों को सलाखों के पीछे भेजे जिन्होंने पूजा की मौत की पटकथा लिखी है। मायके वालों का आक्रोश इस बात को लेकर भी है कि पंचायत में हुए लिखित समझौते का भी ससुराल वालों पर कोई असर नहीं पड़ा और उन्होंने मानवता को शर्मसार करते हुए एक मां को उसके तीन बच्चों से अलग कर दिया।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया
घटना की जानकारी मिलते ही बाथ थाना पुलिस की टीम दल-बल के साथ कस्टीकरी गांव पहुँची। पुलिस ने सबसे पहले घटनास्थल का मुआयना किया और शव को अपने कब्जे में लिया। पुलिस ने कमरे की तलाशी ली है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पूजा की मौत दम घुटने से हुई है, जहर खाने से या किसी अन्य हिंसक हमले से। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला दहेज प्रताड़ना से जुड़ा प्रतीत हो रहा है, क्योंकि मायके पक्ष की ओर से लिखित शिकायत और पुराने विवादों के प्रमाण दिए गए हैं।
शव को पोस्टमार्टम के लिए भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों का खुलासा हो सकेगा। बाथ थानाध्यक्ष ने बताया कि पुलिस हर पहलू पर गौर कर रही है। पंचायत में हुए समझौते और उस बॉन्ड पेपर को भी जांच के दायरे में लिया गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस संभावित ठिकानों पर छापेमारी की तैयारी कर रही है।
तीन बच्चों के भविष्य पर सवालिया निशान
पूजा की मौत ने न केवल एक महिला की जान ली है, बल्कि तीन मासूमों का भविष्य भी अंधकारमय कर दिया है। उसका बेटा और दो बेटियां, जो अब तक अपनी मां के आँचल में सुरक्षित महसूस करते थे, वे अब इस कानूनी लड़ाई और पारिवारिक झगड़े के बीच अकेले पड़ गए हैं। गांव के लोगों का कहना है कि 11 साल तक पूजा ने जिस तरह से गृहस्थी संभाली, वह काबिले तारीफ थी, लेकिन उसे जो अंत मिला वह हृदयविदारक है।
दहेज जैसी कुरीति के कारण बिहार के ग्रामीण इलाकों में आज भी महिलाओं का शोषण जारी है। पूजा कुमारी का मामला यह दर्शाता है कि कानून और सामाजिक पंचायतों के हस्तक्षेप के बावजूद अपराधियों के मन में डर पैदा नहीं हो पा रहा है। मायके पक्ष के लोग अब मुख्यमंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं ताकि उनकी बहन को इंसाफ मिल सके। कस्टीकरी गांव में फिलहाल सन्नाटा पसरा है और पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है ताकि कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। परिजनों का कहना है कि जब तक दोषियों को सजा नहीं मिल जाती, वे चैन से नहीं बैठेंगे।


