भागलपुर के बसंतपुर स्कूल में चला पर्यावरण जागरूकता अभियान, “एक पेड़ मां के नाम” से छात्रों ने दिया हरियाली का संदेश

भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड स्थित बसंतपुर ग्राम के उच्च माध्यमिक विद्यालय में पर्यावरण संरक्षण को लेकर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्राकृतिक कल्याण परिषद् की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों, शिक्षकों और ग्रामीणों को पर्यावरण बचाने तथा वृक्षारोपण के महत्व के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से चलाए जा रहे “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में प्राकृतिक कल्याण परिषद् के राज्य निदेशक अमित सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि समाजसेवी मनोज सिंह विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संदेशों और पौधारोपण के संकल्प के साथ हुई। मंच से वक्ताओं ने वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और लगातार कम होते हरित क्षेत्र पर चिंता जताई।

मुख्य अतिथि अमित सिंह ने कहा कि आज पूरी दुनिया पर्यावरण संकट का सामना कर रही है। लगातार पेड़ों की कटाई, औद्योगिक प्रदूषण और बढ़ते शहरीकरण के कारण प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण देना है तो हर व्यक्ति को पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी समझनी होगी।

उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि एक छोटा पौधा भी भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकता है। यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पेड़ लगाकर उसकी देखभाल करे, तो पर्यावरण को बचाने की दिशा में बड़ा योगदान दिया जा सकता है। उन्होंने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान की चर्चा करते हुए कहा कि यह केवल पौधारोपण कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति और परिवार के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक भावनात्मक संदेश भी है।

समाजसेवी मनोज सिंह ने कहा कि पेड़ केवल ऑक्सीजन देने का काम नहीं करते, बल्कि जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता और जलवायु संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और विकास की दौड़ में लोग प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं, जिसका असर मौसम और पर्यावरण पर साफ दिखाई दे रहा है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे केवल औपचारिकता के तौर पर पौधे न लगाएं, बल्कि उनकी नियमित देखभाल भी करें। उन्होंने कहा कि पौधारोपण तभी सफल माना जाएगा जब लगाए गए पौधे बड़े होकर वृक्ष बनें और समाज को लाभ पहुंचाएं।

कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता रैली भी निकाली। बच्चों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर गांव की गलियों में लोगों को जागरूक किया। रैली के दौरान “पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ” और “एक पेड़ मां के नाम, प्रकृति को दें नया मुकाम” जैसे नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा।

छात्रों का उत्साह कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बना रहा। बच्चों ने ग्रामीणों को बताया कि पेड़ों की कमी के कारण गर्मी लगातार बढ़ रही है और जल संकट जैसी समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने की अपील की।

विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम के अंत में वृक्षारोपण किया गया। अतिथियों, शिक्षकों और छात्रों ने मिलकर स्कूल परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पौधे लगाए। पौधारोपण के दौरान बच्चों को विभिन्न प्रकार के पौधों और उनके महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। कई छात्रों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने घरों और गांवों में भी पौधे लगाएंगे और उनकी देखभाल करेंगे।

विद्यालय के प्रधानाध्यापक सौरभ कुमार ने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि छात्रों को सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करते हैं और समाज को सकारात्मक संदेश देते हैं।

उन्होंने बताया कि विद्यालय स्तर पर आगे भी पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि छात्र व्यवहारिक रूप से प्रकृति संरक्षण के महत्व को समझ सकें। स्कूल के शिक्षकों ने भी बच्चों को नियमित रूप से पौधों की देखभाल करने और प्लास्टिक उपयोग कम करने का संदेश दिया।

ग्रामीणों ने भी इस कार्यक्रम की सराहना की। स्थानीय लोगों का कहना था कि गांवों में इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम समय की जरूरत हैं। कई ग्रामीणों ने कहा कि पहले गांवों में हरियाली अधिक थी, लेकिन धीरे-धीरे पेड़ों की संख्या कम होती जा रही है। ऐसे में युवाओं और बच्चों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश फैलाना बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण जैसी समस्याओं से निपटने के लिए बड़े सरकारी प्रयासों के साथ-साथ सामाजिक भागीदारी भी जरूरी है। स्कूल और कॉलेजों में आयोजित होने वाले ऐसे कार्यक्रम समाज में जागरूकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

भागलपुर के बसंतपुर विद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश देने वाला प्रयास बनकर सामने आया। “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के जरिए बच्चों और ग्रामीणों को प्रकृति से जुड़ने और हरियाली बढ़ाने की प्रेरणा मिली।

आने वाले समय में यदि इसी तरह समाज के विभिन्न वर्ग पर्यावरण संरक्षण को लेकर सक्रिय भागीदारी निभाते हैं, तो बढ़ते प्रदूषण और जलवायु संकट जैसी चुनौतियों का प्रभाव कम करने में निश्चित रूप से मदद मिल सकती है।

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