भागलपुर का विक्रमशिला सेतु जल्द होगा ठीक : बीआरओ बनाएगा आधुनिक बेली ब्रिज, एक महीने के भीतर शुरू होगा हल्के वाहनों का परिचालन

भागलपुर। सिल्क सिटी भागलपुर की धड़कनों को रफ्तार देने और पुराने पुलों पर बढ़ते बोझ को कम करने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय लिया है। भागलपुर में यातायात की बदहाल स्थिति और सेतुओं पर मंडराते खतरे को देखते हुए अब शहर में जल्द ही ‘बेली ब्रिज’ (Bailey Bridge) का निर्माण शुरू होने जा रहा है। जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की पुष्टि करते हुए बताया कि सीमा सड़क संगठन (BRO) ने इसके निर्माण को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। बीआरओ की मुख्यालय स्तर की तकनीकी टीम ने पिछले दिनों भागलपुर का सघन दौरा किया और विभिन्न भौगोलिक व तकनीकी पहलुओं का बारीकी से निरीक्षण किया। टीम ने अपनी रिपोर्ट में इस निष्कर्ष पर पहुँची है कि भागलपुर की वर्तमान भौगोलिक परिस्थिति और यातायात के दबाव को देखते हुए बेली ब्रिज का निर्माण ही सबसे उपयुक्त और तात्कालिक समाधान है। यह पुल न केवल जाम की समस्या को खत्म करेगा, बल्कि शहर के भीतर एक वैकल्पिक और सुरक्षित मार्ग भी प्रदान करेगा। प्रशासन का यह कदम उस समय आया है जब भागलपुर की जनता लंबे समय से सड़कों पर लगने वाले भीषण जाम और जर्जर होते पुलों के कारण मानसिक और आर्थिक परेशानी झेल रही है

बीआरओ की तकनीकी टीम का मुआयना और स्वीकृति

भागलपुर में बेली ब्रिज का निर्माण कोई साधारण निर्माण कार्य नहीं है, बल्कि यह एक जटिल इंजीनियरिंग प्रक्रिया है जिसे सीमा सड़क संगठन (BRO) जैसी विशेषज्ञ संस्था की देखरेख में पूरा किया जाएगा। बीआरओ की टीम ने क्षेत्र का भ्रमण कर मिट्टी की क्षमता, जलस्तर और पुल के जुड़ाव बिंदुओं (Connectivity Points) का विस्तृत अध्ययन किया है। तकनीकी रूप से बेली ब्रिज को इसलिए चुना गया है क्योंकि इसे बहुत कम समय में तैयार किया जा सकता है और इसकी भार वहन क्षमता हल्के वाहनों के लिए अत्यंत सुरक्षित होती है।

जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने जानकारी दी कि बीआरओ की पूरी टीम आज यानी रविवार या कल सोमवार तक भागलपुर पहुँच जाएगी। टीम के पहुँचते ही निर्माण स्थल पर सामग्री का भंडारण और प्रारंभिक ढांचा खड़ा करने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया जाएगा। बीआरओ के पास ऐसे पुलों के निर्माण का वैश्विक अनुभव है, जिसका सीधा लाभ भागलपुर की बुनियादी संरचना को मिलेगा। यह पुल उन इलाकों को जोड़ेगा जहाँ वर्तमान में दबाव सबसे अधिक है और जहाँ भारी वाहनों के कारण पैदल यात्रियों व छोटे वाहनों को निकलने में भारी कठिनाई होती है।

पुल की बनावट और उपयोगिता: हल्के वाहनों को मिलेगी प्राथमिकता

प्रस्तावित बेली ब्रिज की बनावट को शहर की आंतरिक सड़कों और संकरी गलियों के दबाव को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इस पुल की कुल चौड़ाई **3.5 मीटर** होगी। हालांकि यह चौड़ाई भारी ट्रकों या बसों के लिए पर्याप्त नहीं है, लेकिन शहर की मुख्य समस्या ‘हल्के वाहनों’ के सुचारू परिचालन से जुड़ी है। इस पुल के बन Inst से:

ई-रिक्शा और ऑटो: भागलपुर की सड़कों पर ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या जाम का एक बड़ा कारण है। बेली ब्रिज के माध्यम से इन्हें एक समर्पित मार्ग मिल सकेगा।

दोपहिया वाहन और साइकिल:हजारों छात्र और कामकाजी लोग जो प्रतिदिन शहर के एक छोर से दूसरे छोर तक जाते हैं, उन्हें अब मुख्य पुलों पर भारी वाहनों के बीच जान जोखिम में डालकर नहीं चलना होगा।

पैदल यात्री: पुल पर पैदल चलने वालों के लिए भी पर्याप्त सुरक्षा और स्थान सुनिश्चित किया जाएगा।

3.5 मीटर की यह चौड़ाई यह सुनिश्चित करेगी कि पुल पर केवल वही वाहन चढ़ें जिनके लिए इसे डिजाइन किया गया है, जिससे पुल की उम्र और मजबूती बनी रहे। इसके लिए पुल के दोनों ओर विशेष प्रकार के ‘हाइट गेज’ और बैरियर भी लगाए जा सकते हैं ताकि अनजाने में भी कोई भारी वाहन इस पर प्रवेश न कर सके।

समयबद्ध निर्माण: एक महीने की ‘डेडलाइन’ तय

प्रशासन ने इस परियोजना के लिए समय की महत्ता को समझते हुए अत्यंत आक्रामक समय-सीमा (Timeline) तय की है। जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन का लक्ष्य इस बेली ब्रिज को **एक महीने के भीतर** या संभव हो तो उससे भी कम समय में तैयार कर जनता को समर्पित करना है। आमतौर पर स्थायी कंक्रीट पुलों के निर्माण में वर्षों का समय लगता है, लेकिन बेली ब्रिज की विशेषता ही यही है कि इसके प्री-फैब्रिकेटेड हिस्सों को जोड़कर बहुत तेजी से आवागमन बहाल किया जा सकता है।

बीआरओ की टीम के भागलपुर पहुँचते ही निर्माण कार्य में जो तेजी आएगी, वह शहरवासियों के लिए एक नई उम्मीद की किरण लेकर आएगी। निर्माण कार्य के दौरान यातायात का मार्ग परिवर्तन (Divertion) भी किया जाएगा ताकि काम बिना किसी बाधा के चलता रहे। जिला प्रशासन ने स्थानीय पुलिस और परिवहन विभाग को भी इस संबंध में निर्देशित किया है कि वे बीआरओ की टीम को हर संभव सुरक्षा और सहयोग प्रदान करें। निर्माण सामग्री की आपूर्ति में कोई कमी न हो, इसके लिए विशेष कॉरिडोर बनाया जाएगा।

पुराने पुलों पर दबाव कम करना मुख्य उद्देश्य

भागलपुर में वर्तमान में मौजूद पुल, विशेष रूप से विक्रमशिला सेतु और शहर के आंतरिक पुराने पुल, अपनी क्षमता से कहीं अधिक बोझ सह रहे हैं। विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने और भारी वाहनों के लगातार दबाव के कारण भागलपुर में ‘जाम’ एक स्थायी समस्या बन चुकी है। ऐसे में बेली ब्रिज एक ‘रिलीफ वाल्व’ की तरह काम करेगा।

जब ई-रिक्शा, बाइक और हल्के वाहन इस नए पुल की ओर मुड़ जाएंगे, तो मुख्य पुलों पर केवल वही गाड़ियां बचेंगी जिनका वहां से गुजरना अनिवार्य है। इससे मुख्य पुलों के रखरखाव (Maintenance) के लिए भी समय मिल सकेगा और उनकी आयु में भी वृद्धि होगी। जिलाधिकारी ने बताया कि भागलपुर के लोग प्रतिदिन घंटों जाम में फंसकर अपना कीमती समय और ईंधन बर्बाद कर रहे हैं। बेली ब्रिज के निर्माण से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि प्रदूषण के स्तर में भी कमी आएगी क्योंकि गाड़ियां अब घंटों तक एक ही जगह पर स्टार्ट खड़ी नहीं रहेंगी।

सुरक्षा मानकों और गुणवत्ता पर विशेष 

बीआरओ की निगरानी में होने वाले इस निर्माण में गुणवत्ता को लेकर प्रशासन ने अपनी मंशा साफ कर दी है। जिलाधिकारी ने जोर देकर कहा है कि निर्माण कार्य के दौरान सभी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा क्योंकि यह पुल हजारों लोगों के जीवन और सुरक्षा से जुड़ा है। बेली ब्रिज अपनी मजबूती के लिए जाने जाते हैं और बीआरओ द्वारा निर्मित होने के कारण इसकी विश्वसनीयता और अधिक बढ़ जाती है।

पुल के निर्माण में उपयोग होने वाले स्टील और अन्य धातुओं का परीक्षण बीआरओ के विशेषज्ञों द्वारा किया जाएगा। पुल के पिलरों (यदि आवश्यक हो) और एबटमेंट के निर्माण में आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों का प्रयोग होगा। प्रशासन का मानना है कि यह बेली ब्रिज न केवल वर्तमान संकट का समाधान है, बल्कि भविष्य में आपातकालीन स्थितियों के लिए भी एक स्थायी परिसंपत्ति (Asset) के रूप में काम करेगा।

भागलपुर की जनता, जो अब तक केवल पुलों के जर्जर होने और जाम की खबरें सुन रही थी, अब एक नई संरचना के निर्माण की साक्षी बनेगी। बीआरओ की टीम के भागलपुर आगमन के साथ ही शहर के परिवहन इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, जिसकी परिणति एक महीने के भीतर एक सुव्यवस्थित और जाम-मुक्त भागलपुर के रूप में होने की उम्मीद है।

समाचार डेस्क, भागलपुर।

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