बैजानी मॉडल स्कूल में नामांकन विवाद गहराया, बच्चों का एडमिशन नहीं होने पर अभिभावकों का हंगामा

भागलपुर, 20 मई 2026। भागलपुर के इंटर स्तरीय पंचानन झा उच्च विद्यालय बैजानी में नामांकन को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। अपने बच्चों का नामांकन नहीं होने से नाराज अभिभावकों ने बुधवार को स्कूल परिसर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और स्कूल प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। अभिभावकों का आरोप है कि उनके बच्चे पहले से इसी विद्यालय में पढ़ाई कर रहे थे, इसके बावजूद इस बार नामांकन नहीं लिया जा रहा है। अचानक लागू किए गए नए नियमों के कारण कई छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है।

स्कूल परिसर में पहुंचे अभिभावकों ने कहा कि वर्षों से उनके बच्चे इसी विद्यालय में पढ़ते आ रहे हैं और अब जब उच्च कक्षा में नामांकन की बारी आई, तो उन्हें बाहर कर दिया गया। इससे परिवारों में भारी चिंता और असंतोष का माहौल है। कई अभिभावकों ने कहा कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकला, तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

जानकारी के अनुसार इंटर स्तरीय पंचानन झा उच्च विद्यालय बैजानी को इस वर्ष मॉडल स्कूल का दर्जा मिला है। इसी के बाद से नामांकन प्रक्रिया में नए नियम लागू किए गए हैं। स्कूल प्रशासन का कहना है कि अब नामांकन पूरी तरह मेधा सूची और निर्धारित सीटों के आधार पर किया जा रहा है।

अभिभावकों का कहना है कि उन्हें पहले से इस बदलाव की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई थी। अचानक सीटों की सीमा और मेधा क्रमांक आधारित चयन लागू होने के कारण कई बच्चे नामांकन से वंचित हो गए। इससे खासकर मध्यमवर्गीय और ग्रामीण परिवारों में चिंता बढ़ गई है।

स्कूल पहुंचे कई अभिभावकों ने कहा कि उनके बच्चों ने इसी विद्यालय से पूर्व की कक्षाओं में पढ़ाई की है और अब उन्हें दूसरे स्कूलों में नामांकन के लिए भटकना पड़ रहा है। कई लोगों ने कहा कि वर्तमान समय में अच्छे विद्यालयों में सीट मिलना आसान नहीं है और ऐसे में अचानक नामांकन रुकने से बच्चों का एक साल खराब होने का खतरा पैदा हो गया है।

अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन से मांग की कि सीटों की संख्या बढ़ाई जाए और सभी योग्य छात्र-छात्राओं का नामांकन सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना है कि मॉडल स्कूल बनने का लाभ छात्रों को मिलना चाहिए, न कि उन्हें पढ़ाई से वंचित किया जाना चाहिए।

स्थिति को देखते हुए स्कूल परिसर में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया। बड़ी संख्या में पहुंचे अभिभावकों ने प्रशासन से बातचीत कर समाधान निकालने की मांग की। कई लोगों ने शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप करने की अपील भी की।

इस पूरे मामले पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने कहा कि इस वर्ष विद्यालय को मॉडल स्कूल का दर्जा मिला है, जिसके बाद शिक्षा विभाग की ओर से नई व्यवस्था लागू की गई है। उन्होंने बताया कि नवमी कक्षा में केवल 180 सीटें निर्धारित की गई हैं और विभागीय निर्देशों के अनुसार केवल मेधा क्रमांक के आधार पर ही नामांकन लिया जा रहा है।

प्रधानाध्यापक ने कहा कि निर्धारित सीटों से अधिक छात्रों का नामांकन लेना संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालय किसी भी स्थिति में विभागीय नियमों के विरुद्ध जाकर कार्य नहीं कर सकता। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभिभावकों की मांग और समस्याओं को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।

विद्यालय प्रशासन का कहना है कि मॉडल स्कूल के रूप में चयन होने के बाद शिक्षा की गुणवत्ता और चयन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया गया है। इसी कारण सीमित सीटों पर मेधा आधारित नामांकन की प्रक्रिया अपनाई गई है। अधिकारियों का तर्क है कि शिक्षा विभाग के निर्देशों का पालन करना विद्यालय की बाध्यता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में मॉडल स्कूलों की संख्या बढ़ने के साथ नामांकन से जुड़े विवाद भी सामने आने लगे हैं। एक ओर सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है, वहीं दूसरी ओर सीमित सीटों के कारण बड़ी संख्या में छात्र नामांकन से वंचित हो रहे हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी विद्यालय को मॉडल स्कूल का दर्जा दिया जाता है, तो वहां छात्रों की संख्या और संसाधनों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है। लेकिन इसके साथ यह भी आवश्यक है कि पहले से पढ़ रहे छात्रों के भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति बनाई जाए।

स्थानीय लोगों का कहना है कि भागलपुर और आसपास के क्षेत्रों में अच्छे विद्यालयों में नामांकन को लेकर हर वर्ष दबाव बना रहता है। ऐसे में मॉडल स्कूलों में सीटों की सीमित संख्या अभिभावकों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

कुछ अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि मेधा सूची और चयन प्रक्रिया को लेकर पूरी पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। हालांकि स्कूल प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार की जा रही है।

मामले को लेकर शिक्षा विभाग की भूमिका भी अब महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अभिभावकों को उम्मीद है कि विभाग इस मामले में हस्तक्षेप कर कोई व्यावहारिक समाधान निकालेगा, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ-साथ छात्रों की संख्या और बुनियादी सुविधाओं को भी बढ़ाना जरूरी है। यदि सीटें सीमित रहेंगी और मांग बढ़ती जाएगी, तो इस तरह के विवाद लगातार सामने आते रहेंगे।

फिलहाल बैजानी मॉडल स्कूल में नामांकन को लेकर अभिभावकों की नाराजगी बनी हुई है। कई परिवार अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं और शिक्षा विभाग से जल्द समाधान निकालने की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन इस मामले में क्या फैसला लेता है, इस पर छात्रों और अभिभावकों की नजरें टिकी हुई हैं।

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