
भागलपुर। रेशम नगरी भागलपुर के बबरगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत अलीगंज महेशपुर इलाके में शनिवार की रात पुलिस ने एक बड़ी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करते हुए नशे के काले कारोबार की कमर तोड़ दी है। वरीय पुलिस अधीक्षक के कड़े रुख और ‘नशा मुक्त भागलपुर’ के संकल्प के बीच बबरगंज पुलिस और डीआईयू की संयुक्त टीम ने सवा तीन सौ ग्राम से अधिक कीमती ब्राउन शुगर बरामद की है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब तस्कर घनी आबादी वाले हरिजन टोला के एक घर में सुरक्षित बैठकर जहर की पुड़ियाँ तैयार कर रहे थे। पुलिस की इस दबिश ने न केवल अलीगंज इलाके में हड़कंप मचा दिया है, बल्कि उन ‘सफेदपोश’ सौदागरों की भी नींद उड़ा दी है जो पर्दे के पीछे से इस घातक नशे के जाल को फैला रहे हैं। बरामद ब्राउन शुगर की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लाखों में आंकी जा रही है। इस सफल ऑपरेशन में एक तस्कर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य सरगना अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा।
अलीगंज के हरिजन टोला में ‘सफेद जहर’ की फैक्ट्री: गुप्त सूचना पर कार्रवाई
भागलपुर जिले में मादक पदार्थों और अवैध हथियारों के विरुद्ध चलाए जा रहे सघन अभियान के तहत शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को पुलिस को एक पुख्ता खुफिया जानकारी मिली। सूचना के अनुसार, बबरगंज थानांतर्गत अलीगंज महेशपुर हरिजन टोला निवासी सन्नी कुमार (पिता-दिलीप साह) के घर में भारी मात्रा में प्रतिबंधित मादक पदार्थों का भंडारण किया गया था। वहां न केवल नशे की खरीद-बिक्री हो रही थी, बल्कि उसे छोटे-छोटे पैकेटों में पैक कर शहर के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई करने की तैयारी चल रही थी।
सूचना की गंभीरता को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक ने नगर पुलिस अधीक्षक की सीधी निगरानी में एक हाई-प्रोफाइल टीम का गठन किया। इस टीम में अनुमण्डल पुलिस पदाधिकारी (नगर-02), बबरगंज थानाध्यक्ष दिव्या कुमारी और जिला आसूचना इकाई (DIU) के तेज-तर्रार अधिकारियों को शामिल किया गया। पुलिस को पता था कि घनी आबादी वाले इस इलाके में थोड़ी सी भी भनक तस्करों को भागने का मौका दे सकती है, इसलिए पूरे मोहल्ले की घेराबंदी काफी शांतिपूर्ण तरीके से की गई।
नाटकीय घेराबंदी और ‘चोर-पुलिस’ का खेल
जब गठित टीम सन्नी कुमार के घर के करीब पहुँची, तो वहां की हलचल ने तस्करों के संदेह को यकीन में बदल दिया। पुलिस जैसे ही घर के भीतर दाखिल हुई, वहां दो युवक मेज पर रखे ब्राउन शुगर की पैकिंग करते हुए पाए गए। खाकी वर्दी को देखते ही दोनों के होश उड़ गए और उन्होंने खिड़की व पिछले दरवाजे से भागने का प्रयास किया। सशस्त्र बल के जवानों ने मुस्तैदी दिखाते हुए पीछा किया और एक आरोपित अभिषेक कुमार (पिता-दिलीप ठाकुर) को दबोच लिया।
हालांकि, घर का मालिक और इस धंधे का मुख्य आरोपी सन्नी कुमार पुलिस की पकड़ से बाहर निकल गया। पुलिस ने उसे पकड़ने के लिए काफी दूर तक पीछा किया, लेकिन संकरी गलियों और अंधेरे का लाभ उठाकर वह ओझल हो गया। अभिषेक की गिरफ्तारी के बाद जब घर की सघन तलाशी ली गई, तो पुलिस के हाथ साक्ष्यों का वह भंडार लगा जिसने इस पूरे रैकेट की पोल खोल दी।
बरामदगी की विस्तृत सूची: तौल मशीन से लेकर नकदी तक
बबरगंज पुलिस ने मौके से जो सामान बरामद किया है, वह यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि यह कोई छिटपुट नशाखोरी नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित और व्यावसायिक गिरोह था। बरामदगी का विवरण इस प्रकार है:
- ब्राउन शुगर: कुल 313.25 ग्राम। इतनी बड़ी मात्रा में ब्राउन शुगर की बरामदगी भागलपुर पुलिस की हालिया बड़ी कामयाबियों में से एक है।
- नकद: 13,300 रुपये। यह राशि संभवतः उसी शाम हुई नशे की बिक्री से अर्जित की गई थी।
- मोबाइल फोन: 03 अलग-अलग कंपनियों के फोन बरामद हुए हैं। पुलिस इन फोनों की कॉल डिटेल्स और व्हाट्सएप चैट्स खंगाल रही है ताकि ‘सप्लाई चेन’ का पता लगाया जा सके।
- वेट मशीन: 02 डिजिटल तौल मशीनें मिली हैं, जिनका उपयोग ग्राम के हिसाब से ब्राउन शुगर तौलने के लिए किया जाता था।
- चाकू: 02 धारदार चाकू भी बरामद हुए हैं, जो संभवतः पैकेट काटने या सुरक्षा के उद्देश्य से रखे गए थे।
तस्करी का पेशेवर तरीका: तौल और तकनीक का इस्तेमाल
गिरफ्तार आरोपित अभिषेक कुमार से की गई प्रारंभिक पूछताछ में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। यह गिरोह न केवल ब्राउन शुगर बेचता था, बल्कि उसे बहुत ही वैज्ञानिक तरीके से ‘माइक्रो-पैकिंग’ करता था। 02 वेट मशीनों का मिलना यह दर्शाता है कि यहाँ नशा करने वालों की जेब के अनुसार 100 मिलीग्राम से लेकर 1 ग्राम तक की पुड़ियाँ तैयार की जाती थीं।
अलीगंज का यह इलाका लंबे समय से पुलिस की रडार पर रहा है। सन्नी कुमार के घर को एक ‘सुरक्षित ठिकाना’ माना जाता था जहाँ ग्राहकों का आना-जाना बना रहता था। बरामद किए गए 03 मोबाइल फोन इस कांड की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। पुलिस को संदेह है कि नशे के इस कारोबार के तार साहिबगंज और बंगाल की सीमा से जुड़े हुए हैं, जहाँ से माल मंगवाया जाता था।
दिव्या कुमारी और डीआईयू टीम की सूझ-बूझ
इस सफल छापेमारी का श्रेय बबरगंज थानाध्यक्ष दिव्या कुमारी और डीआईयू टीम की सटीक रणनीति को जाता है। घनी आबादी वाले हरिजन टोला में इस तरह के ऑपरेशन को अंजाम देना जोखिम भरा होता है क्योंकि अक्सर स्थानीय लोग या तस्करों के गुर्गे पुलिस पर पथराव कर देते हैं। लेकिन दिव्या कुमारी के नेतृत्व में टीम ने जिस धैर्य और साहस का परिचय दिया, उसने अपराधियों को संभलने का मौका नहीं दिया।
टीम में शामिल स०अ०नि० देव कुमार और डीआईयू के जवानों ने अभिषेक कुमार को भागते हुए पकड़ा, जो इस केस का मुख्य गवाह और सह-अभियुक्त है। पुलिस अब उन ठिकानों की भी पहचान कर रही है जहाँ इस माल को डिलीवर किया जाना था। वरीय पुलिस अधीक्षक ने टीम की इस सफलता पर संतोष जताया है और शामिल अधिकारियों को पुरस्कृत करने की बात कही है।
समाज पर ‘सफेद जहर’ का कहर और पुलिस का संकल्प
ब्राउन शुगर जैसे मादक पदार्थ न केवल युवाओं की सेहत खराब कर रहे हैं, बल्कि यह अपराधों की जननी भी हैं। भागलपुर के शहरी इलाकों में बढ़ रही छिनतई और चोरी की वारदातों के पीछे अक्सर नशे की लत ही मुख्य कारण पाई गई है। 313 ग्राम से अधिक ब्राउन शुगर की बरामदगी का मतलब है कि पुलिस ने हजारों युवाओं तक पहुँचने वाले ‘जहर’ को बीच में ही रोक लिया है।
वरीय पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि अलीगंज महेशपुर जैसे ‘हॉट स्पॉट्स’ पर अब चौबीसों घंटे सादे लिबास में पुलिस की तैनाती रहेगी। पुलिस प्रशासन अब उन लोगों पर भी नजर रख रहा है जो इस तरह के अपराधियों को अपने घर किराए पर देते हैं या उन्हें संरक्षण प्रदान करते हैं। सन्नी कुमार की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की दो अलग-अलग टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।
सुशासन और सुरक्षा की दिशा में एक और कदम
बबरगंज थाना पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई सुशासन का जीवंत उदाहरण है। अभिषेक कुमार की गिरफ्तारी और इतनी भारी मात्रा में मादक पदार्थ की बरामदगी यह संदेश देती है कि भागलपुर की पुलिस अब ‘सॉफ्ट टारगेट’ नहीं, बल्कि अपराधियों के लिए काल बन चुकी है। पुलिस ने एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर अग्रतर कार्रवाई शुरू कर दी है।


