
मानसून के सक्रिय होने के साथ ही बिहार में मौसमी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ने लगा है। डेंगू, मलेरिया, वायरल फीवर, टायफाइड, दस्त, फूड पॉइजनिंग और त्वचा संबंधी संक्रमण जैसी बीमारियों के मामलों में संभावित वृद्धि को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। भागलपुर सहित पूरे राज्य में 102 निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा को हाई अलर्ट मोड पर संचालित किया जा रहा है ताकि किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति में मरीजों को बिना देरी के अस्पताल पहुंचाया जा सके।
राज्य सरकार के सहयोग से ज़ेनप्लस सर्विसेज द्वारा संचालित 102 एम्बुलेंस सेवा मानसून के दौरान चौबीसों घंटे सक्रिय है। जिले में एम्बुलेंस संचालन, कंट्रोल रूम और फील्ड टीमों की निगरानी बढ़ा दी गई है। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य है कि बारिश के मौसम में किसी भी मरीज को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो और गंभीर स्थिति बनने से पहले आवश्यक उपचार शुरू किया जा सके।
बरसात के मौसम में जलजमाव, दूषित पेयजल और बढ़ी हुई नमी के कारण कई प्रकार के संक्रमण तेजी से फैलते हैं। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों को संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। ऐसे लोगों को हल्के लक्षणों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय रहते डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
पटना स्थित 102 एम्बुलेंस कंट्रोल सेंटर में कार्यरत डॉक्टर हिमांशु कुमार ने बताया कि मानसून के दौरान डेंगू, मलेरिया, वायरल बुखार, टायफाइड, दस्त, फूड पॉइजनिंग और त्वचा संबंधी संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी होना सामान्य बात है। उन्होंने कहा कि लगातार बारिश के कारण जलभराव और गंदगी मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर देती है। वहीं दूषित पानी और भोजन के सेवन से पेट संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार, लगातार उल्टी, दस्त, शरीर में असहनीय दर्द, अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें तो घरेलू उपचार या स्वयं दवा लेने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। समय पर इलाज मिलने से अधिकांश मौसमी बीमारियों का प्रभावी उपचार संभव है और गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 102 एम्बुलेंस सेवा पूरी तरह निःशुल्क है और जरूरतमंद मरीजों को तत्काल स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की जाती है। यह सेवा विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, दुर्घटना पीड़ितों और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रही है। बारिश के मौसम में जब कई क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित होता है, तब एम्बुलेंस सेवा की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
आंकड़ों के अनुसार जून 2026 के दौरान केवल भागलपुर जिले में 102 एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से कुल 4,173 मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराई गई। इनमें सबसे बड़ी संख्या गर्भवती महिलाओं की रही। इस अवधि में 2,647 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया गया ताकि उनका प्रसव सुरक्षित वातावरण में कराया जा सके। इसके अलावा 104 नवजात शिशुओं और गंभीर मरीजों को भी समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।
इसी अवधि में 223 सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को भी 102 एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया, जिससे उन्हें समय रहते उपचार मिल सका। वहीं 1,199 अन्य मरीजों को भी विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के दौरान इस सेवा का लाभ मिला। ये आंकड़े बताते हैं कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में 102 एम्बुलेंस की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
ज़ेनप्लस सर्विसेज के बिहार प्रोजेक्ट हेड दीपक श्रीवास्तव ने बताया कि मानसून के दौरान स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों में वृद्धि की संभावना को देखते हुए राज्य के सभी जिलों में एम्बुलेंस संचालन व्यवस्था की नियमित समीक्षा की जा रही है। प्रत्येक एम्बुलेंस की उपलब्धता, चालक और मेडिकल स्टाफ की तैनाती तथा कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात कॉल का तुरंत जवाब दिया जा सके।
उन्होंने बताया कि कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे सक्रिय रहता है और हर कॉल पर त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित टीम लगातार काम कर रही है। किसी भी मरीज की सूचना मिलने के बाद निकटतम उपलब्ध एम्बुलेंस को तुरंत रवाना किया जाता है ताकि मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जा सके। बारिश के मौसम में विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर अतिरिक्त ध्यान दिया जा रहा है जहां जलजमाव या सड़क संपर्क प्रभावित होने की संभावना रहती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान केवल इलाज ही नहीं बल्कि बचाव भी बेहद जरूरी है। लोगों को घर और आसपास साफ-सफाई बनाए रखनी चाहिए, पानी जमा नहीं होने देना चाहिए, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने चाहिए और केवल स्वच्छ एवं उबला हुआ या सुरक्षित पेयजल का ही उपयोग करना चाहिए। भोजन हमेशा ताजा और स्वच्छ होना चाहिए ताकि फूड पॉइजनिंग और दस्त जैसी समस्याओं से बचा जा सके।
इसके अलावा बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। यदि किसी को लगातार बुखार रहे या शरीर में कमजोरी महसूस हो तो जांच कराने में देरी नहीं करनी चाहिए। समय पर जांच और उपचार से डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रमणों को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत 102 निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा का लाभ उठाएं। यह सेवा राज्य के हर जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मानसून के पूरे मौसम में एम्बुलेंस सेवाओं को पूरी क्षमता के साथ संचालित किया जाएगा ताकि किसी भी मरीज को इलाज के लिए इंतजार न करना पड़े।
बरसात के मौसम में बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच 102 एम्बुलेंस सेवा लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आ रही है। चौबीसों घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम, प्रशिक्षित मेडिकल टीम और समय पर उपलब्ध एम्बुलेंस के माध्यम से हजारों मरीजों को जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि समय पर उपचार और लोगों की जागरूकता ही मौसमी बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।


