बेगूसराय में इंसानियत शर्मसार: चार वर्ष की मासूम के साथ 15 साल के किशोर ने की दरिंदगी; मकई के खेत में उजाड़ा बचपन, हालत नाजुक

बेगूसराय/बछवाड़ा। बिहार के बेगूसराय जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि समाज के भीतर पनप रही विकृत मानसिकता को भी नंगा कर दिया है। बछवाड़ा थाना क्षेत्र के एक गांव में शनिवार, 02 मई 2026 को एक चार साल की अबोध बच्ची के साथ उसी के पड़ोस में रहने वाले एक 15 वर्षीय किशोर ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं। जिस उम्र में बच्चों को सही और गलत का बोध तक नहीं होता, उस उम्र में एक नन्ही जान को अपनी अस्मत और जिंदगी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इस घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है और गांव में तनाव के साथ-साथ भारी आक्रोश व्याप्त है। फिलहाल, पीड़ित बच्ची की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है और वह अस्पताल के बिस्तर पर मौत और जिंदगी के बीच झूल रही है।

खेल के मैदान से शुरू हुआ ‘खौफनाक’ खेल

​शनिवार की दोपहर बेगूसराय के बछवाड़ा थाना इलाके के इस गांव में अन्य दिनों की तरह ही सामान्य हलचल थी। वह नन्ही बच्ची, जिसकी उम्र महज चार वर्ष है, अपने घर के पास ही स्थित एक सरकारी स्कूल के प्रांगण में अपनी सहेलियों के साथ खेल रही थी। स्कूल का वह परिसर, जहाँ बचपन की किलकारियां गूंजनी चाहिए थीं, वहीं से इस खौफनाक वारदात की पटकथा लिखी गई। खेलते-खेलते कब वह मासूम दरिंदे की नजरों में चढ़ गई, इसका आभास वहां मौजूद किसी भी अन्य बच्चे या ग्रामीण को नहीं हुआ।

​पड़ोस के ही वार्ड का रहने वाला 15 साल का एक किशोर वहां पहुँचा। उम्र के लिहाज से उसे अभी ‘किशोर’ कहा जा रहा है, लेकिन उसके कृत्य ने किसी खूंखार अपराधी की याद दिला दी। उसने बड़ी चालाकी से उस बच्ची को अपनी बातों में उलझाया या बहलाया और उसे स्कूल परिसर से दूर ले जाने में कामयाब रहा। उस मासूम को इस बात का जरा भी अंदेशा नहीं था कि जिस पड़ोसी को वह जानती है, वही उसके बचपन को कुचलने की साजिश रच रहा है।

मकई के खेत में हैवानियत की इंतहा

​किशोर उस चार साल की बच्ची को लेकर पास ही स्थित एक मकई के खेत में चला गया। बिहार के ग्रामीण इलाकों में इस समय मकई की फसल काफी ऊंची हो चुकी है, जो किसी भी बाहरी व्यक्ति की नजरों से छिपने के लिए अपराधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन जाती है। इसी ऊँची फसल और सन्नाटे का फायदा उठाते हुए उस किशोर ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। बच्ची की चीखें उन खेतों की खामोशी में कहीं दब कर रह गईं।

​जब वारदात को अंजाम देकर किशोर वहां से भागा, तब बच्ची की हालत काफी बिगड़ चुकी थी। बच्ची के शरीर से अत्यधिक रक्तस्राव और उसकी बेसुध हालत को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस पर कितना शारीरिक प्रहार हुआ होगा। ग्रामीण और परिजन जब बच्ची की तलाश में वहां पहुँचे, तो मकई के खेत के भीतर का दृश्य देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मासूम बच्ची लहूलुहान अवस्था में पड़ी थी और उसकी सांसें काफी तेज चल रही थीं।

नाजुक हालत: अस्पताल में जीवन की जंग

​परिजनों ने आनन-फानन में बच्ची को उठाकर पास के स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाया, जहाँ से उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों के अनुसार, बच्ची की हालत अब भी अत्यंत नाजुक बनी हुई है। इतनी कम उम्र में इस तरह के शारीरिक शोषण और चोटों के कारण उसके आंतरिक अंगों को भी गंभीर क्षति पहुँचने की आशंका जताई जा रही है।

​चिकित्सकों की एक विशेष टीम बच्ची की निगरानी कर रही है, लेकिन उसकी कोमल उम्र के कारण उपचार में कई तरह की जटिलताएं आ रही हैं। अस्पताल के बाहर खड़े परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। माता-पिता इस बात पर विश्वास ही नहीं कर पा रहे हैं कि उनके घर के पास ही उनका बच्चा इतना असुरक्षित था। गांव के लोगों में इस बात को लेकर भी भारी नाराजगी है कि एक 15 साल के लड़के के मन में इतनी क्रूरता और वहशीपन कहाँ से आया।

ग्रामीणों का आक्रोश और सुरक्षा पर सवाल

​बछवाड़ा की इस घटना ने एक बार फिर बिहार में बच्चों की सुरक्षा और बढ़ते किशोर अपराध (Juvenile Crimes) पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। गांव के लोगों का कहना है कि अगर अपराधी इसी तरह बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम देते रहे, तो कोई भी अभिभावक अपने बच्चे को घर से बाहर खेलने भेजने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा। शनिवार को हुई इस घटना के बाद से गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है, लेकिन भीतर ही भीतर लोगों में जबरदस्त उबाल है।

​ग्रामीणों ने मांग की है कि इस मामले में किसी भी प्रकार की नरमी न बरती जाए। भले ही आरोपी की उम्र 15 साल बताई जा रही है, लेकिन उसके द्वारा किया गया कृत्य किसी पेशेवर अपराधी से कम नहीं है। लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में स्पीडी ट्रायल चलाकर जल्द से जल्द कड़ी सजा दिलवाई जानी चाहिए ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए। स्थानीय पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया है और साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

किशोर अपराध की बढ़ती चुनौतियां

​बेगूसराय की यह वारदात समाज के लिए एक चेतावनी की तरह है। 15 साल के लड़के द्वारा 4 साल की बच्ची के साथ ऐसा कृत्य करना यह दर्शाता है कि इंटरनेट और समाज में फैली अश्लीलता का असर अब बच्चों के मानस पटल पर घातक रूप से पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कानून के जरिए ऐसी वारदातों को रोकना संभव नहीं है, इसके लिए सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर भी निगरानी और संस्कारों की जरूरत है।

​फिलहाल, बछवाड़ा पुलिस इस मामले में कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने में जुटी है। घटनास्थल यानी मकई के खेत और स्कूल प्रांगण का मुआयना किया गया है। पुलिस यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि पीड़ित परिवार को किसी भी प्रकार के दबाव या डर का सामना न करना पड़े। बेगूसराय की यह नन्ही बेटी अब पूरे बिहार की दुआओं पर टिकी है, जो अस्पताल के सफेद चादरों के बीच अपनी मासूमियत और जिंदगी के लिए लड़ रही है। आने वाले कुछ घंटे उसके स्वास्थ्य के लिए काफी महत्वपूर्ण बताए जा रहे हैं।

  • ये भी पढ़े..

    भरत तिवारी प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच एवं दोषियों पर कार्रवाई हो : अश्विनी चौबे

    Share Add as a preferred…

    भागलपुर में धूमधाम से मनाया गया राहुल गांधी का 57वां जन्मदिन, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काटा केक

    Share Add as a preferred…