बेगूसराय में शराब माफिया के साम्राज्य पर पुलिस का प्रचंड प्रहार: 22 करोड़ की विदेशी खेप जब्त; पंजाब से मुजफ्फरपुर तक फैला था नेटवर्क, पशु आहार की आड़ में रची गई थी बड़ी साजिश

बेगूसराय। बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून को चुनौती देने वाले सिंडिकेट के खिलाफ बेगूसराय पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया है। जिले के दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में की गई छापेमारी के दौरान पुलिस ने करीब 22 करोड़ रुपये मूल्य की विदेशी शराब और तस्करी में प्रयुक्त अन्य सामग्रियां बरामद की हैं। यह कार्रवाई न केवल बरामदगी के लिहाज से विशाल है, बल्कि इसने अंतरराज्यीय तस्करी के उस गहरे नेटवर्क को भी उजागर किया है जो पंजाब से लेकर बिहार के मुजफ्फरपुर तक फैला हुआ था। सोमवार, 27 अप्रैल 2026 की रात और मंगलवार की सुबह तक चली इस मैराथन छापेमारी ने शराब तस्करों के बीच हड़कंप मचा दिया है। पुलिस ने भारी मात्रा में शराब के साथ-साथ तस्करी के लिए ‘कवर’ के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे पशु कैल्शियम और लिक्विड को भी जब्त किया है। इस पूरी कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तस्कर अब शराब छिपाने के लिए केवल रसायनों का ही नहीं, बल्कि कृषि और पशुपालन से जुड़े उत्पादों का भी सहारा ले रहे हैं।

एनएच-31 पर आधी रात का ‘ऑपरेशन क्लीन’: 12 करोड़ की शराब ट्रक से बरामद

​कार्रवाई की पहली कड़ी लाखो थाना क्षेत्र में शुरू हुई। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि पंजाब से शराब की एक बड़ी खेप एक ट्रक के जरिए मुजफ्फरपुर की ओर जा रही है और वह बेगूसराय के रास्ते एनएच-31 से होकर गुजरेगी। सूचना की गंभीरता को देखते हुए सदर एसडीपीओ आनंद कुमार पाण्डेय के निर्देशन में लाखो थानाध्यक्ष शुभम कुमार पाण्डेय ने एक विशेष टीम का गठन किया।

​बहदरपुर ढाला के समीप एनएच-31 पर पुलिस ने सघन वाहन जांच अभियान शुरू किया। इसी दौरान एक संदिग्ध ट्रक को रुकने का इशारा किया गया। पुलिस को देखते ही ट्रक चालक ने भागने का प्रयास किया, लेकिन मुस्तैद जवानों ने उसे चारों ओर से घेरकर दबोच लिया। जब ट्रक की तलाशी ली गई, तो पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए। ट्रक के अंदर बड़ी ही चतुराई से बनाए गए गुप्त तहखानों और बोरियों के पीछे विदेशी शराब के 1100 कार्टन छिपाकर रखे गए थे।

  • बरामदगी: लगभग 10 हजार लीटर विदेशी शराब।
  • अनुमानित कीमत: बाजार में इसकी कीमत करीब 12 करोड़ रुपये आंकी गई है।
  • गिरफ्तारी: ट्रक चालक को मौके पर ही गिरफ्तार किया गया, जो मुजफ्फरपुर जिले का रहने वाला बताया जा रहा है।

​पूछताछ में चालक ने स्वीकार किया कि यह खेप पंजाब से लोड की गई थी और इसे मुजफ्फरपुर में किसी बड़े सिंडिकेट को डिलीवर किया जाना था। पुलिस अब उस ‘रिसीवर’ की तलाश में है जिसके इशारे पर यह करोड़ों का खेल चल रहा था।

सहजानंद नगर में ‘कैल्शियम’ की आड़ में काला कारोबार: 10 करोड़ की दूसरी बड़ी चोट

​अभी पहली कार्रवाई की गूँज शांत भी नहीं हुई थी कि मुफस्सिल थाना पुलिस ने तस्करी के एक दूसरे और अधिक शातिर तरीके का पर्दाफाश कर दिया। थानाध्यक्ष अजय कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मुफस्सिल थाना क्षेत्र के सहजानंद नगर मोहल्ले में एक गुप्त ठिकाने पर छापेमारी की। यहाँ तस्करों ने शराब को छिपाने के लिए ‘मवेशी कैल्शियम’ का सहारा लिया था।

​पुलिस ने जब गोदाम और वहां खड़े वाहनों की तलाशी ली, तो वहां से 830 लीटर विदेशी शराब बरामद हुई। लेकिन चौंकाने वाली बात यह थी कि शराब के साथ-साथ भारी मात्रा में पशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाला कैल्शियम पाउडर और लिक्विड बरामद किया गया।

मुफस्सिल थाना क्षेत्र से बरामदगी का विवरण:

  • विदेशी शराब: 830 लीटर।
  • मवेशी कैल्शियम (पाउडर): 660 किलोग्राम।
  • कैल्शियम लिक्विड: 350 बोतल/कंटेनर।
  • कुल कीमत: इस खेप की अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में कीमत 10 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

​तस्करों ने पशु आहार और दवाओं की आड़ इसलिए ली थी ताकि गंध और चेकिंग के दौरान पुलिस को चकमा दिया जा सके। आमतौर पर पुलिस पशु चिकित्सा से जुड़ी सामग्रियों की गहन जांच नहीं करती, जिसका फायदा उठाकर माफिया करोड़ों के वारे-न्यारे कर रहे थे।

पंजाब टू मुजफ्फरपुर: अंतरराज्यीय सिंडिकेट का पर्दाफाश

​बेगूसराय पुलिस की इस दोहरी कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि बिहार में शराब की आपूर्ति का मुख्य स्रोत अब भी पंजाब और हरियाणा जैसे राज्य बने हुए हैं। गिरफ्तार चालक से मिली जानकारियों के अनुसार, शराब माफिया ने एक बहुत ही व्यवस्थित ‘सप्लाई चेन’ विकसित कर ली है। इसमें ट्रक मालिकों से लेकर स्थानीय डिस्ट्रीब्यूटर्स तक शामिल हैं।

​लाखो में पकड़ा गया ट्रक जिस तरह से पंजाब से चलकर कई राज्यों की सीमाओं को पार करते हुए बिहार के बेगूसराय तक पहुँच गया, वह सुरक्षा व्यवस्था और चेकपोस्टों की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। हालांकि, बेगूसराय पुलिस की मुस्तैदी ने मुजफ्फरपुर पहुँचने से पहले ही इस खेप को नष्ट कर दिया, जिससे राज्य के अन्य हिस्सों में होने वाली बड़ी सप्लाई रुक गई है।

पुलिस का सख्त रुख: सिंडिकेट की रीढ़ तोड़ने की तैयारी

​सदर एसडीपीओ आनंद कुमार पाण्डेय ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि बेगूसराय पुलिस शराब तस्करों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि बरामद शराब की कुल बाजार कीमत 22 करोड़ रुपये के आसपास है, जो हाल के वर्षों में जिले की सबसे बड़ी बरामदगी है।

पुलिस की आगामी रणनीति:

  1. बैंक खातों की जांच: गिरफ्तार चालक और संदिग्धों के बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की जांच की जाएगी ताकि मनी लॉन्ड्रिंग के कोण को समझा जा सके।
  2. नेटवर्क मैपिंग: पंजाब के उन शराब गोदामों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है जहाँ से यह खेप लोड हुई थी। इसके लिए पंजाब पुलिस से भी संपर्क साधा जा सकता है।
  3. संपत्ति की जब्ती: तस्करी में शामिल माफियाओं की पहचान कर उनकी संपत्ति कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
  4. तकनीकी सर्विलांस: तस्करों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले मोबाइल नंबरों और व्हाट्सएप कॉल रिकॉर्ड्स को खंगाला जा रहा है।

सुशासन के दावों और माफिया की चुनौती के बीच युद्ध

​बिहार में शराबबंदी को लागू हुए एक दशक होने को है, लेकिन बेगूसराय जैसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि माफिया अब भी बड़े निवेश के साथ इस काले कारोबार में सक्रिय हैं। 22 करोड़ की शराब का पकड़ा जाना यह बताता है कि मुनाफे का लालच इतना अधिक है कि तस्कर पकड़े जाने के जोखिम के बावजूद पंजाब से बिहार तक का सफर तय कर रहे हैं।

​वॉयस ऑफ बिहार (VOB) न्यूज़ डेस्क का मानना है कि पुलिस की यह सफलता सराहनीय है, लेकिन यह केवल ‘हिमशैल का सिरा’ (Tip of the Iceberg) भी हो सकती है। जब तक पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय कर सप्लाई पॉइंट्स पर प्रहार नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसी खेप आती रहेंगी। बेगूसराय पुलिस ने फिलहाल माफिया की कमर जरूर तोड़ दी है, लेकिन इस युद्ध का अंत अभी दूर नजर आता है।

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