श्रावणी मेले से पहले बांका जिले में कांवरिया पथ की स्थिति चिंताजनक, संवेदक की लापरवाही से कार्य अधूरा

तीन दिन शेष, अब भी कई स्थानों पर नहीं बिछी बालू, डीएम के निर्देश के बावजूद नहीं हो रही कार्रवाई

बांका | श्रावणी मेले की शुरुआत में अब केवल तीन दिन का समय शेष रह गया है, लेकिन बांका जिले से गुजरने वाले कांवरिया पथ की स्थिति अब भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है। श्रद्धालुओं की आस्था और सुरक्षा को लेकर जहां प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं, वहीं कार्य की धीमी रफ्तार और संवेदक की लापरवाही चिंता का विषय बन गई है।


नंगे पांव शिवभक्तों की राह में रोड़े

हर वर्ष की भांति इस बार भी कांवर यात्रा के दौरान नंगे पांव चलने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए कांवरिया पथ पर गंगा के महीन बालू की दो इंच मोटी परत बिछाने का आदेश दिया गया था। बांका जिला प्रशासन ने पथ निर्माण विभाग को यह निर्देश डीएम नवदीप शुक्ला के माध्यम से जारी किया था।

लेकिन स्थिति यह है कि बालू बिछाने का कार्य 20 दिन पहले शुरू होने के बावजूद अब तक अधूरा है। कई ऐसे स्थान हैं जहां कार्य शुरू तक नहीं हुआ, जबकि जहां बालू डाली गई है वहां गुणवत्ता और मोटाई की घोर अनदेखी की गई है।


संवेदक की मनमानी से बढ़ रही प्रशासन की परेशानी

स्थानीय लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, संवेदक द्वारा जानबूझकर कार्य में ढिलाई बरती जा रही है। प्रशासन की सख्ती और स्पष्ट निर्देश के बावजूद कोई ठोस प्रगति नजर नहीं आ रही है। इससे साफ है कि संवेदक कार्य के प्रति गंभीर नहीं है।


मेले की प्रतिष्ठा पर असर का खतरा

श्रावणी मेला बिहार और झारखंड के लाखों श्रद्धालुओं के आस्था से जुड़ा महापर्व है। हर साल सुल्तानगंज से देवघर तक की यात्रा में बांका ज़िला एक महत्वपूर्ण मार्ग है। यदि समय रहते कार्य पूरा नहीं हुआ, तो यह न सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए कष्टकारी होगा बल्कि प्रशासन की साख और मेले की प्रतिष्ठा पर भी असर डालेगा।


आगे की कार्रवाई की संभावना

अब देखना यह है कि जिला प्रशासन संवेदक पर कब सख्त कार्रवाई करता है और श्रद्धालुओं के लिए मार्ग को समय रहते सुगम बनाता है। Voice of Bihar इस मुद्दे पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे की प्रगति से आपको अवगत कराता रहेगा।


 

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