बीएयू बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: राज्यपाल सैयद अता हसनैन का ऐलान, दीक्षांत समारोह में 443 छात्रों को डिग्री

भागलपुर। बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर को देश के अग्रणी कृषि संस्थानों की श्रेणी में लाने की दिशा में एक बड़ा संकेत मिला है। बिहार के राज्यपाल सह कुलाधिपति ने घोषणा की कि विश्वविद्यालय को “सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य शोध, नवाचार और कृषि तकनीक के क्षेत्र में बीएयू को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है।

राज्यपाल ने यह बातें शुक्रवार को आयोजित बीएयू के नौवें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहीं। समारोह में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, शोधार्थियों और गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही। यह अवसर न केवल छात्रों के लिए उपलब्धियों का प्रतीक बना, बल्कि विश्वविद्यालय के भविष्य के विजन को भी स्पष्ट करता नजर आया।

“सेंटर ऑफ एक्सीलेंस” बनने की दिशा में कदम

राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने अपने संबोधन में कहा कि बीएयू में मौजूद संसाधन, अनुशासन और शैक्षणिक गुणवत्ता इसे एक उत्कृष्ट संस्थान बनने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि सही दिशा में प्रयास किए जाएं, तो यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बना सकता है।

उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि बीएयू को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा दिलाया जाए, ताकि यहां होने वाले शोध और तकनीकी नवाचार का लाभ सीधे किसानों और कृषि क्षेत्र को मिल सके।” यह बयान इस बात का संकेत देता है कि राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन कृषि शिक्षा और अनुसंधान को लेकर गंभीर हैं।

अनुशासन और गुणवत्ता की सराहना

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के कार्यक्रम की गुणवत्ता, अनुशासन और प्रस्तुति की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां का आयोजन उन्हें भारतीय सेना की कार्यशैली की याद दिलाता है, जहां अनुशासन और उत्कृष्टता सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि विश्वविद्यालय परिसर प्लास्टिक मुक्त है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास संस्थान की सामाजिक जिम्मेदारी को भी दर्शाते हैं।

खाद्य सुरक्षा पर जोर

अपने संबोधन में राज्यपाल ने खाद्य सुरक्षा के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी देश के विकास की कल्पना खाद्य सुरक्षा के बिना नहीं की जा सकती। इस संदर्भ में उन्होंने किसानों और कृषि वैज्ञानिकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा, “देश की खाद्य सुरक्षा पूरी तरह से किसानों और कृषि वैज्ञानिकों पर निर्भर करती है। यदि हम इन दोनों को मजबूत करेंगे, तभी हम एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।” यह विचार कृषि क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

मखाना उत्कृष्टता केंद्र की जरूरत

राज्यपाल ने बिहार के पारंपरिक और महत्वपूर्ण उत्पाद मखाना के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मखाना उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना समय की मांग है और यह एक बेहद जरूरी कदम है।

उन्होंने आश्वासन दिया कि इस केंद्र की स्थापना और इसके सुदृढ़ीकरण के लिए हर संभव सहयोग दिया जाएगा। यह पहल न केवल मखाना उत्पादन को बढ़ावा देगी, बल्कि इससे जुड़े किसानों की आय में भी वृद्धि हो सकती है।

443 छात्रों को मिली डिग्री

दीक्षांत समारोह के दौरान कुल 443 छात्रों को विभिन्न पाठ्यक्रमों में डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी के विद्यार्थी शामिल थे। इस अवसर पर 13 छात्रों को पीएचडी की उपाधि दी गई, जो उनके शोध कार्य की उपलब्धि का प्रतीक है।

इसके अलावा, छह मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और मेहनत का परिणाम है। समारोह में छात्रों के चेहरे पर खुशी और गर्व साफ नजर आ रहा था।

शिक्षा और शोध का संगम

बीएयू का यह दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह शिक्षा और शोध के संगम का प्रतीक भी बना। यहां से निकलने वाले छात्र न केवल अपने करियर की शुरुआत करेंगे, बल्कि कृषि क्षेत्र में नई सोच और तकनीक लेकर आएंगे।

राज्यपाल ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज और देश के विकास के लिए करना चाहिए। उन्होंने उन्हें नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं

बीएयू को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने की योजना से यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक और शोध के माध्यम से मजबूत करना चाहती है। इससे न केवल उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि किसानों की आय और जीवन स्तर में भी सुधार होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना को सही तरीके से लागू किया गया, तो बिहार कृषि क्षेत्र में एक नई पहचान बना सकता है।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने की दिशा में राज्यपाल का यह ऐलान एक सकारात्मक और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है। यह न केवल विश्वविद्यालय के लिए, बल्कि पूरे राज्य के कृषि क्षेत्र के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है।

दीक्षांत समारोह में छात्रों को डिग्री प्रदान करने के साथ-साथ भविष्य की योजनाओं का खाका भी पेश किया गया। अब देखना यह होगा कि इस विजन को जमीन पर कैसे उतारा जाता है और बीएयू किस तरह से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाता है।

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