बांका में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर गरजी किसान सभा, राजद नेताओं ने सरकार पर साधा निशाना

बांका जिले के बेलहर प्रखंड के रघुनाथपुर गांव में प्रस्तावित न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर किसानों का विरोध लगातार तेज होता दिखाई दे रहा है। 14 जुलाई 2026 को गांव में आयोजित एक बड़ी किसान सभा में सैकड़ों नहीं बल्कि हजारों की संख्या में किसान, ग्रामीण और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए। सभा में राष्ट्रीय जनता दल के कई नेताओं ने भाग लेते हुए राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि प्रस्तावित परियोजना से क्षेत्र के किसानों, ग्रामीणों और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यदि किसानों और ग्रामीणों की सहमति के बिना इस परियोजना को आगे बढ़ाया गया तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

किसान सभा में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए राष्ट्रीय जनता दल के बक्सर से सांसद एवं किसान प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुधाकर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि रघुनाथपुर और उसके आसपास का इलाका कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर निर्भर है। यहां रहने वाले अधिकांश परिवार खेती, पशुपालन और प्राकृतिक संसाधनों के सहारे अपना जीवन यापन करते हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में न्यूक्लियर पावर प्लांट जैसी बड़ी परियोजना स्थापित करने का निर्णय स्थानीय लोगों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।

उन्होंने कहा कि यदि यह परियोजना स्थापित होती है तो आसपास लगभग 40 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों, खेतों और कृषि गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ सकता है। उनके अनुसार किसानों की आजीविका, खेती योग्य भूमि और ग्रामीण जीवनशैली पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। उन्होंने यह भी दावा किया कि परियोजना के लिए गंगा नदी से पानी लाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग और पर्यावरणीय संतुलन को लेकर भी कई सवाल खड़े होते हैं।

सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि बांका जैसे ग्रामीण और कृषि प्रधान क्षेत्र में इस प्रकार की परियोजना लागू करना केवल औद्योगिक विकास का मामला नहीं बल्कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों का प्रश्न भी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की राय और सहमति को प्राथमिकता दिए बिना किसी भी बड़ी परियोजना को लागू करना उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि राष्ट्रीय जनता दल इस मुद्दे पर ग्रामीणों के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा और लोकतांत्रिक तरीके से उनके अधिकारों की आवाज उठाता रहेगा।

सभा को संबोधित करते हुए नाथनगर विधानसभा क्षेत्र से राजद के पूर्व प्रत्याशी एस. जेड. हसन ने भी सरकार की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि बेलहर और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में अनुसूचित जनजाति, दलित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार रहते हैं। इन समुदायों के लिए जल, जंगल और जमीन केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं बल्कि जीवन और रोजगार का आधार हैं। यदि इन संसाधनों पर किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो सबसे अधिक नुकसान इन्हीं वर्गों को उठाना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार को किसी भी विकास परियोजना को लागू करने से पहले स्थानीय लोगों की सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों का गंभीरता से अध्ययन करना चाहिए। उनका आरोप था कि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों और आदिवासी समाज की भावनाओं की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती।

एस. जेड. हसन ने कहा कि ग्रामीणों की मांग है कि परियोजना से जुड़े सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए और प्रभावित होने वाले लोगों के साथ खुली चर्चा की जाए। उन्होंने कहा कि जब तक लोगों की शंकाओं का समाधान नहीं होता और उनकी सहमति प्राप्त नहीं होती, तब तक इस प्रकार की परियोजनाओं को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।

सभा के दौरान कई अन्य नेताओं और स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि खेती इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और हजारों परिवार प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर हैं। यदि कृषि भूमि प्रभावित होती है तो इसका असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि स्थानीय व्यापार, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।

किसानों ने भी सभा में अपनी चिंताएं व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें अपनी जमीन, पर्यावरण और भविष्य को लेकर कई सवाल परेशान कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना था कि यदि किसी भी परियोजना से उनके जीवन और रोजगार पर प्रभाव पड़ने की संभावना है तो पहले उसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार स्थानीय लोगों के साथ संवाद स्थापित करे और उनकी आपत्तियों को गंभीरता से सुने।

सभा में मौजूद लोगों ने यह भी कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन विकास का मॉडल ऐसा होना चाहिए जिससे स्थानीय आबादी के हित सुरक्षित रहें। किसानों का कहना था कि कृषि भूमि और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के साथ ही विकास योजनाओं को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।

कार्यक्रम के दौरान नेताओं ने ग्रामीणों से संगठित रहने और लोकतांत्रिक ढंग से अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में इस मुद्दे पर किसी प्रकार का निर्णय लिया जाता है तो स्थानीय जनता की भागीदारी और सहमति सुनिश्चित की जानी चाहिए। किसानों ने भी एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया।

इस किसान सभा में संजय चौहान, शिशुपाल भारती, राजद नेता सौरभ यादव, अरविंद यादव, घनश्याम भगत, राजद जिला अध्यक्ष अर्जुन ठाकुर, बेलहर के पूर्व विधायक रामदेव यादव सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता और आसपास के गांवों से पहुंचे हजारों किसान एवं ग्रामीण मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रस्ताव, किसानों के अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण हितों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

फिलहाल न्यूक्लियर पावर प्लांट को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। एक ओर परियोजना को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं तो दूसरी ओर ग्रामीणों की मांग है कि सरकार पारदर्शिता के साथ सभी तथ्यों को सार्वजनिक करे और स्थानीय लोगों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आगे की प्रक्रिया तय करे। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रशासन, सरकार और स्थानीय लोगों के बीच होने वाली बातचीत पर सभी की नजर बनी रहेगी।

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