बिहार समेत देशभर में धूमधाम से मनाई जा रही बकरीद, मस्जिदों और ईदगाहों में उमड़ी नमाजियों की भीड़

देशभर के साथ-साथ बिहार में भी ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का पर्व गुरुवार को श्रद्धा, उल्लास और भाईचारे के माहौल में मनाया जा रहा है। सुबह से ही मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज अदा करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर बकरीद की मुबारकबाद दी और देश में अमन-चैन, तरक्की और खुशहाली की दुआ मांगी।

नालंदा और गया में दिखा उत्साह

Bihar के Bihar Sharif में बड़ी दरगाह, शाही जामा मस्जिद, बोखारी मस्जिद समेत कई स्थानों पर सामूहिक नमाज अदा की गई। वहीं Gaya में करबला ईदगाह, हरिहर सुब्रमण्यम स्टेडियम और पीर मंसूर मस्जिद में सुबह से ही नमाजियों की भीड़ उमड़ पड़ी।

बकरीद को लेकर बच्चों में भी खास उत्साह देखने को मिला। रंग-बिरंगे कुर्ता-पायजामा और टोपी पहने बच्चे काफी खुश नजर आए। नमाज के बाद लोगों ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार कुर्बानी दी और जरूरतमंदों के बीच मांस का वितरण किया।

क्यों मनाई जाती है बकरीद?

मौलाना अफ्फान जामी के अनुसार, बकरीद का संबंध पैगंबर इब्राहिम और उनके पुत्र इस्माइल की कुर्बानी से जुड़ा है। इस्लाम धर्म में इसे त्याग, समर्पण और अल्लाह की आज्ञाकारिता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। चांद दिखने के बाद जिलहिज्जा महीने की 10वीं तारीख को ईद-उल-अजहा मनाई जाती है।

तीन दिनों तक चलती है कुर्बानी

धार्मिक विद्वानों के मुताबिक, कुर्बानी 10, 11 और 12 जिलहिज्जा तक की जा सकती है। हालांकि पहले दिन कुर्बानी करना विशेष महत्व रखता है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी न करें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

भाईचारे और इंसानियत का संदेश

धार्मिक गुरुओं ने लोगों से अपील की कि इस पर्व पर गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करें तथा आपसी सौहार्द और भाईचारे को मजबूत बनाएं। बकरीद का यह पर्व समाज में प्रेम, त्याग और इंसानियत का संदेश देता है।

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