
पटना: राजधानी पटना के गांधी मैदान इलाके में 25 जुलाई को हुए हिंसक विरोध-प्रदर्शन, पत्थरबाजी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व विधायक तेज प्रताप यादव को अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इस बीच, बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने गिरफ्तारी का समर्थन करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक थी।
‘शांत हो रहा आंदोलन फिर भड़काया गया’ : मनन मिश्रा
मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि छात्रों का आंदोलन समाप्त होने की स्थिति में था और प्रशासन के साथ बातचीत के जरिए हालात सामान्य हो रहे थे। उनका आरोप है कि इसी दौरान तेज प्रताप यादव ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर माहौल को फिर से तनावपूर्ण बना दिया।
उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील समय में छात्रों और युवाओं को उकसाने से स्थिति बिगड़ी, इसलिए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की कार्रवाई जरूरी हो गई।
गांधी मैदान थाने में दर्ज हुई FIR
इस मामले में गांधी मैदान थाना में मजिस्ट्रेट विजय कुमार तिवारी की लिखित शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायत में कहा गया है कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के चलते क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता लागू थी। इसके बावजूद CJP और AISA के बैनर तले करीब 1000 प्रदर्शनकारी बिना प्रशासनिक अनुमति के एकत्र होकर प्रदर्शन करने लगे।
पुलिस पर हमले और सरकारी संपत्ति को नुकसान का आरोप
एफआईआर के अनुसार, पुलिस प्रशासन लगातार लाउडस्पीकर के माध्यम से प्रदर्शनकारियों से स्थल खाली करने और आचार संहिता का पालन करने की अपील कर रहा था। आरोप है कि इसके बावजूद भीड़ ने पुलिस पर ईंट-पत्थर फेंकना शुरू कर दिया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि इसी दौरान तेज प्रताप यादव अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन में शामिल हुए, जिसके बाद भीड़ और उग्र हो गई। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने लाठी-डंडों और पत्थरों से पुलिस टीम पर हमला किया, जिसमें गांधी मैदान थाना प्रभारी (SHO) सहित लगभग आधा दर्जन पुलिसकर्मी घायल हो गए। साथ ही कई सरकारी वाहनों में भी तोड़फोड़ की गई।
भीड़ का फायदा उठाकर निकले, बाद में हुई गिरफ्तारी
पुलिस के अनुसार, घटना के दौरान तेज प्रताप यादव को मौके पर पकड़ने का प्रयास किया गया था, लेकिन वह भीड़ का फायदा उठाकर वहां से निकल गए। बाद में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।


