
बख्तियारपुर: बिहार के बख्तियारपुर रेलवे स्टेशन पर सोमवार को एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। प्लेटफॉर्म नंबर 1 के पास रेलवे ट्रैक पार करते समय नई दिल्ली-मालदा एक्सप्रेस की चपेट में आने से एक मौसी और उसकी भांजी की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद स्टेशन पर अफरातफरी मच गई और यात्रियों के बीच दहशत का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, यह हादसा उस समय हुआ जब गया जिले के मानपुर निवासी नंदलाल सिंह की पत्नी इंतर देवी (62 वर्ष) अपनी बहन की बेटी संगीता देवी (45 वर्ष) को स्टेशन छोड़ने आई थीं। संगीता देवी अथमलगोला के रामनगर दियारा क्षेत्र की रहने वाली थीं और ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन पहुंची थीं। इसी दौरान दोनों ने जल्दबाजी में प्लेटफॉर्म बदलने के लिए रेलवे ट्रैक पार करने का निर्णय लिया, जो उनकी जिंदगी का सबसे खतरनाक फैसला साबित हुआ।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जिस समय दोनों महिलाएं ट्रैक पार कर रही थीं, उसी दौरान नई दिल्ली-मालदा एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 14004) तेज रफ्तार से स्टेशन से गुजर रही थी। बताया जा रहा है कि ट्रेन को ‘थ्रू सिग्नल’ मिला हुआ था, यानी उसे स्टेशन पर रुकना नहीं था और वह पूरी गति से गुजर रही थी। इसी वजह से दोनों महिलाएं ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच फंस गईं और उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला।
मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश जरूर की, लेकिन ट्रेन की तेज रफ्तार और अचानक हुई घटना के कारण कोई भी मदद नहीं कर सका। कुछ ही पलों में यह हादसा हो गया और दोनों की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस पूरी घटना का दृश्य स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गया, जिसे देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया।
हादसे के बाद स्टेशन परिसर में चीख-पुकार मच गई। यात्रियों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ घटनास्थल पर जुट गई। सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और परिजनों को सूचना दी गई।
आरपीएफ के अधिकारियों के अनुसार, प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि दोनों महिलाएं ओवरब्रिज की बजाय सीधे ट्रैक पार कर रही थीं। स्टेशन के उस हिस्से में यात्रियों की आवाजाही अधिक रहती है और कई लोग जल्दबाजी में नियमों की अनदेखी कर ट्रैक पार करते हैं, जिससे इस तरह के हादसे होते हैं।
इस घटना के बाद एक बार फिर रेलवे सुरक्षा व्यवस्था और यात्रियों की लापरवाही पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बख्तियारपुर स्टेशन के पूर्वी छोर पर पर्याप्त सुविधाओं का अभाव है। वहां मुख्य प्रवेश और निकास द्वार के पास भीड़ रहती है, लेकिन ओवरब्रिज की सुविधा नहीं होने के कारण लोग मजबूरी में ट्रैक पार करते हैं।
स्थानीय नागरिकों और यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से मांग की है कि स्टेशन के पूर्वी हिस्से में जल्द से जल्द एक फुट ओवरब्रिज (FOB) का निर्माण कराया जाए, ताकि लोग सुरक्षित तरीके से प्लेटफॉर्म बदल सकें। उनका कहना है कि यदि पहले से उचित व्यवस्था होती, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे ट्रैक पार करना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि बेहद खतरनाक भी है। हर साल देशभर में इस तरह के सैकड़ों हादसे सामने आते हैं, जिनमें लोग अपनी जान गंवा देते हैं। इसके बावजूद लोग जल्दबाजी या सुविधा के कारण नियमों की अनदेखी करते हैं, जिसका खामियाजा उन्हें अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है।
रेलवे प्रशासन लगातार यात्रियों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाता रहता है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर सीमित ही दिखाई देता है। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि केवल नियम बनाना काफी नहीं है, बल्कि उन्हें सख्ती से लागू करना और लोगों को जागरूक करना भी उतना ही जरूरी है।
इस दर्दनाक हादसे ने दो परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया। एक मौसी अपनी भांजी को सुरक्षित ट्रेन तक पहुंचाने आई थी, लेकिन दोनों ही मौत के मुंह में समा गईं। यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि समाज के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है कि रेलवे नियमों का पालन करना कितना जरूरी है।
फिलहाल पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है और रेलवे प्रशासन भी इस घटना के कारणों की समीक्षा में जुटा है। उम्मीद की जा रही है कि इस हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा और यात्रियों को सुरक्षित आवागमन के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।


