
स्कूल संचालक की ‘सीढ़ी से गिरने’ की थ्योरी निकली झूठी, पुलिस की जांच में धारदार हथियार से वार का हुआ खुलासा; संचालक समेत चार हिरासत में
जहावाबाद। बिहार के जहानाबाद जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने न केवल शिक्षा व्यवस्था बल्कि मानवता को भी शर्मसार कर दिया है। जिले के कड़ौना क्षेत्र में कनौदी बाइपास के समीप संचालित एक निजी आवासीय विद्यालय के छात्रावास में पांच साल के एक मासूम छात्र की धारदार हथियार से नृशंस हत्या कर दी गई। यूकेजी में पढ़ने वाले इस मासूम की खता बस इतनी थी कि वह बेहतर भविष्य के सपने लिए इस तथाकथित शिक्षा के मंदिर में रहने आया था, लेकिन उसे क्या पता था कि जिस छात्रावास को वह अपना दूसरा घर समझ रहा है, वहीं उसकी मौत का खूनी खेल खेला जाएगा।
सोमवार की सुबह जब इस घटना का खुलासा हुआ, तो पूरे जिले में सनसनी फैल गई। मृतक मासूम की पहचान बुलाकी बिगहा गांव के निवासी के रूप में हुई है। वह इसी स्कूल के छात्रावास में रहकर अपनी पढ़ाई कर रहा था। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए जहानाबाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है, लेकिन मासूम के शरीर पर मिले चोट के निशान किसी गहरी साजिश और अमानवीयता की ओर इशारा कर रहे हैं।
छात्रावास के कमरे में मिला लहूलुहान मासूम, अस्पताल ले जाते समय तोड़ा दम
जानकारी के अनुसार, सोमवार की सुबह छात्रावास के अन्य छात्रों और कर्मियों ने मासूम को उसके कमरे में गंभीर रूप से घायल और लहूलुहान अवस्था में पाया। स्कूल प्रबंधन द्वारा आनन-फानन में बच्चे को स्थानीय स्तर पर प्राथमिक उपचार दिलाने की कोशिश की गई और बाद में उसे बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया गया। हालांकि, मासूम के शरीर से इतना खून बह चुका था और जख्म इतने गहरे थे कि उसने पटना पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ दिया।
मासूम की मौत की खबर जैसे ही उसके पैतृक गांव बुलाकी बिगहा पहुंची, वहां कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे यह मानने को तैयार नहीं हैं कि कल तक जिस बच्चे से उन्होंने बात की थी, वह आज इस दुनिया में नहीं रहा। परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे सुनियोजित हत्या करार दिया है।
स्कूल संचालक की ‘दुर्घटना’ वाली कहानी और पुलिस का पलटवार
इस पूरी घटना में स्कूल संचालक तरुण कुमार उर्फ गांधी की भूमिका शुरू से ही संदिग्ध नजर आ रही है। घटना के तुरंत बाद स्कूल संचालक ने परिजनों और स्थानीय लोगों को यह समझाने की कोशिश की कि बच्चा स्कूल की सीढ़ियों से गिर गया था, जिस कारण उसे ये चोटें आई हैं। परिजनों का कहना है कि उन्हें सुबह फोन पर भी यही सूचना दी गई थी कि उनका बेटा सीढ़ी से गिरकर घायल हो गया है।
हैरान करने वाली बात यह है कि परिजनों के स्कूल पहुंचने से पहले ही बच्चे को किसी निजी क्लिनिक में ले जाया जा चुका था। लेकिन जब पुलिस ने मामले की छानबीन शुरू की और ‘मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट’ (Inquest Report) तैयार की, तो स्कूल संचालक के दावों की हवा निकल गई। पुलिस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, मासूम की मौत सीढ़ी से गिरने के कारण नहीं बल्कि धारदार हथियार से किए गए प्रहारों की वजह से हुई है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यह एक नृशंस हत्या का मामला है, जिसे दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई थी।
जांच रिपोर्ट में रूह कंपा देने वाले खुलासे: मासूम के साथ हुई क्रूरता
पुलिस द्वारा तैयार की गई मृत्यु समीक्षा रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए हैं, वे विचलित करने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जब मासूम का शव मिला, तो वह नग्न अवस्था में था। उसके गले पर धारदार हथियार से वार किए जाने के गहरे निशान थे, जिससे उसका गला कटा हुआ पाया गया। इतना ही नहीं, मासूम की आंखों पर भी जख्म के गंभीर निशान मिले हैं, जो यह दर्शाते हैं कि हत्या से पहले उसके साथ किस कदर दरिंदगी की गई होगी।
रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला और वीभत्स खुलासा हुआ है। मासूम के पेट के निचले हिस्से और उसके निजी अंगों पर भी धारदार हथियार से काटने के निशान मिले हैं। यह महज एक हत्या नहीं बल्कि एक मासूम के साथ की गई चरम स्तर की क्रूरता है। इन निशानों ने इस आशंका को भी बल दिया है कि क्या हत्या के पीछे कोई और घृणित मानसिकता या कुकृत्य छिपा हुआ है? पुलिस अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हत्या से पहले मासूम के साथ किसी प्रकार का यौन उत्पीड़न तो नहीं हुआ था।
सड़क पर उतरा जनसैलाब: पटना-गया मार्ग घंटों रहा जाम
इस जघन्य हत्याकांड की खबर फैलते ही स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित ग्रामीणों और परिजनों ने बड़ी संख्या में सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने जहानाबाद में पटना-गया मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। ग्रामीण स्कूल संचालक की तत्काल गिरफ्तारी और स्कूल के लाइसेंस को रद्द करने की मांग कर रहे थे।
गुस्साई भीड़ ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग उठाई। सड़क जाम की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने काफी मशक्कत और कड़ी कार्रवाई के आश्वासन के बाद ग्रामीणों को समझा-बुझाकर जाम हटवाया। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस की कार्रवाई: स्कूल संचालक समेत चार लोग हिरासत में
मामले की गंभीरता को देखते हुए जहानाबाद के एसपी अपराजित लोहान स्वयं सक्रिय नजर आ रहे हैं। एसपी ने बताया कि मृतक छात्र के पिता द्वारा दिए गए लिखित आवेदन के आधार पर संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्कूल संचालक तरुण कुमार उर्फ गांधी समेत कुल चार संदिग्धों को हिरासत में लिया है।
हिरासत में लिए गए लोगों से पुलिस गुप्त स्थान पर पूछताछ कर रही है। एसपी अपराजित लोहान ने मीडिया को बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला पूरी तरह से हत्या का है और पुलिस हर उस पहलू की जांच कर रही है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि छात्रावास के भीतर इतनी सुरक्षा के बावजूद बाहरी व्यक्ति घुसा या स्कूल के ही किसी अंदरूनी व्यक्ति ने इस घटना को अंजाम दिया। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या के पीछे का उद्देश्य क्या था और क्या स्कूल संचालक साक्ष्यों को मिटाने या मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रहा था।
निजी आवासीय स्कूलों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
जहानाबाद की इस घटना ने बिहार के तमाम निजी आवासीय स्कूलों और उनके छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्न चिह्न लगा दिया है। अभिभावक भारी भरकम फीस देकर अपने बच्चों को इन स्कूलों के भरोसे छोड़ते हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं यह बताती हैं कि वहां मासूमों की जान कितनी असुरक्षित है। छात्रावास के भीतर एक यूकेजी के छात्र की नग्न अवस्था में गला रेतकर हत्या हो जाना और स्कूल प्रबंधन का इसे दुर्घटना बताना, एक बड़ी साजिश और लापरवाही की ओर इशारा करता है।
क्या स्कूल में सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे थे? रात के समय छात्रावास की निगरानी के लिए कौन तैनात था? और सबसे बड़ा सवाल यह कि एक पांच साल के बच्चे से किसी की क्या दुश्मनी हो सकती है जो उसे इतनी दर्दनाक मौत दी गई? इन सवालों के जवाब अब पुलिस की जांच में मिलने बाकी हैं। फिलहाल पूरे कड़ौना क्षेत्र में तनाव और शोक का माहौल बना हुआ है। बुलाकी बिगहा गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है और हर कोई बस यही पूछ रहा है कि आखिर उस मासूम का कसूर क्या था?


