
नई दिल्ली/कोलकाता। भारत के राजनैतिक भविष्य की दिशा तय करने वाले पांच महत्वपूर्ण राज्यों के विधानसभा चुनावों का आज ‘फैसला’ होने वाला है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में जनता ने अपना फैसला ईवीएम में दर्ज कर दिया था, जिसके परिणाम आज, सोमवार यानी 04 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे। सुबह 8 बजे से सभी राज्यों के मतगणना केंद्रों पर वोटों की गिनती शुरू हो जाएगी। यह दिन भारतीय राजनीति के लिए केवल एक चुनावी नतीजा नहीं, बल्कि शक्ति के संतुलन की एक नई परीक्षा है। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं, जहाँ मुकाबला किसी युद्ध से कम नहीं रहा है। क्या ममता बनर्जी अपनी सत्ता बचाने में सफल होंगी या भाजपा पहली बार कोलकाता के सिंहासन पर कमल खिलाकर इतिहास रचेगी, इसका फैसला आज दोपहर तक स्पष्ट हो जाएगा। चुनाव आयोग ने मतगणना के लिए सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए हैं और सभी केंद्रों पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है।
पश्चिम बंगाल: अस्मिता और सत्ता का महामुकाबला
पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों के लिए हुए मतदान ने इस बार कई पुराने समीकरणों को ध्वस्त कर दिया है। बहुमत के लिए यहाँ 148 सीटों की दरकार है। राज्य के इतिहास में यह संभवतः सबसे लंबा और आक्रामक चुनाव रहा है। ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) जहाँ अपनी ‘बंगाल की बेटी’ वाली छवि और कल्याणकारी योजनाओं के भरोसे तीसरी बार ताजपोशी की उम्मीद कर रही है, वहीं भाजपा ने ‘सोनार बांग्ला’ और ‘परिवर्तन’ के नारे के साथ अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
एग्जिट पोल के नतीजे यहाँ किसी एक पक्ष में झुकते हुए नहीं दिख रहे हैं, जिसने राजनैतिक सस्पेंस को और बढ़ा दिया है। भाजपा के रणनीतिकारों का दावा है कि वे 200 से अधिक सीटें जीतकर राज्य में नया इतिहास लिखेंगे, जबकि तृणमूल का मानना है कि भाजपा का यह दावा केवल मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश है। मतगणना के शुरुआती रुझान सुबह 9 बजे से आने शुरू होंगे, जिससे यह स्पष्ट होगा कि बंगाल की जनता ने ‘दीदी’ पर भरोसा कायम रखा है या किसी नए चेहरे को मौका दिया है। वामपंथी और कांग्रेस का गठबंधन भी यहाँ अपनी खोई हुई जमीन तलाशने की कोशिश कर रहा है।
तमिलनाडु: द्रविड़ राजनीति में अभिनेता विजय का ‘ट्रम्प कार्ड’
दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण राज्य तमिलनाडु की 234 सीटों पर भी आज फैसला होना है। यहाँ बहुमत का आंकड़ा 118 है। इस बार तमिलनाडु का चुनाव परंपरागत डीएमके बनाम एआईएडीएमके के मुकाबले से निकलकर एक नए मोड़ पर खड़ा है। वर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके ने वापसी के लिए अपनी पूरी ऊर्जा लगाई है, लेकिन इस बार मैदान में अभिनेता विजय की पार्टी ‘तमिझगा वेत्री कड़गम’ (TVK) एक बड़े खिलाड़ी के रूप में उभरती दिख रही है।
एग्जिट पोल के अनुसार, डीएमके की पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन विजय की पार्टी युवाओं के बीच जो पैठ बना चुकी है, उसने कई सुरक्षित सीटों के समीकरण बिगाड़ दिए हैं। विजय की एंट्री ने तमिलनाडु की राजनीति में उस सिनेमाई जादू को फिर से जीवंत कर दिया है, जो कभी एमजीआर या जयललिता के समय में हुआ करता था। भाजपा भी यहाँ अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए संघर्ष कर रही है। तमिलनाडु के नतीजे यह तय करेंगे कि द्रविड़ राजनीति का अगला उत्तराधिकारी कौन होगा।
असम और पुडुचेरी: एनडीए की साख का सवाल
पूर्वोत्तर के सबसे बड़े राज्य असम की 126 सीटों के नतीजे भी आज ही आने हैं। बहुमत के लिए यहाँ 64 सीटों की आवश्यकता है। असम में भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए एक बार फिर सत्ता में वापसी की पुरजोर उम्मीद कर रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान विकास, बुनियादी ढांचा और सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया था। एग्जिट पोल के संकेत बताते हैं कि असम की जनता ने वर्तमान सरकार के कामकाज पर अपनी मुहर लगा दी है। हालांकि, कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों का गठबंधन भी यहाँ कड़ा मुकाबला दे रहा है।
वहीं, छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पुडुचेरी की 30 सीटों पर भी गिनती आज होगी। यहाँ बहुमत का आंकड़ा 16 है। पुडुचेरी में एनडीए और यूपीए के बीच सीधा मुकाबला है। छोटे राज्यों के नतीजे अक्सर बड़े राजनैतिक बदलावों के संकेत देते हैं, इसलिए पुडुचेरी की हर सीट पर दिल्ली के सत्ता केंद्रों की नजर है। यहाँ भाजपा अपनी उपस्थिति बढ़ाकर दक्षिण भारत में अपने विस्तार के मिशन को गति देना चाहती है।
केरल: यूडीएफ बनाम एलडीएफ की पुरानी रवायत
केरल की 140 विधानसभा सीटों पर भी मतगणना सुबह 8 बजे से शुरू होगी, जहाँ बहुमत के लिए 71 सीटों की जरूरत है। केरल की राजनीति पारंपरिक रूप से एलडीएफ (LDF) और यूडीएफ (UDF) के बीच घूमती रही है। इस बार एग्जिट पोल के रुझान कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ की ओर झुके हुए नजर आ रहे हैं। केरल की जनता हर पांच साल में सत्ता बदलने के लिए जानी जाती है, और यदि यह रवायत कायम रहती है, तो कांग्रेस के लिए यह राष्ट्रीय स्तर पर एक संजीवनी की तरह होगा।
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों को ढाल बनाया है। भाजपा भी यहाँ ‘मेट्रो मैन’ ई. श्रीधरन और अन्य प्रमुख चेहरों के माध्यम से केरल की द्विदलीय राजनीति में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। सबरीमाला और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों ने यहाँ के मतदाताओं को प्रभावित किया है, जिसका स्पष्ट चित्र आज मतगणना केंद्रों से निकलने वाले रुझानों में दिखेगा।
मतगणना की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की तैयारी
चुनाव आयोग ने पांचों राज्यों में मतगणना के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं। मतगणना केंद्रों के भीतर त्रि-स्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया गया है। हर विधानसभा क्षेत्र के लिए अलग-अलग टेबल लगाए गए हैं और हर राउंड की गिनती के बाद नतीजे आधिकारिक तौर पर चुनाव आयोग की वेबसाइट और मीडिया को उपलब्ध कराए जाएंगे। सुबह 8 बजे सबसे पहले डाक मतपत्रों (Postel Ballots) की गिनती की जाएगी, जिसके बाद ईवीएम के वोटों की गिनती शुरू होगी।
देशभर के राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन पांच राज्यों के नतीजे 2029 के आम चुनाव की पिच भी तैयार करेंगे। यदि भाजपा बंगाल में जीतने में सफल रहती है, तो यह पार्टी के लिए अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। वहीं, कांग्रेस के लिए केरल और तमिलनाडु (गठबंधन के माध्यम से) में जीत उनकी प्रासंगिकता को बचाए रखने के लिए अनिवार्य है। मतगणना केंद्रों के बाहर समर्थकों की भीड़ जुटने लगी है और पुलिस ने विजय जुलूसों के लिए भी सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं ताकि किसी भी प्रकार की हिंसा या अव्यवस्था न हो।


