
अररिया/पलासी, 21 मई 2026। बिहार के अररिया जिले के पलासी प्रक्षेत्र से तकनीकी सनक, अवांछित लालच और मानवीय संवेदनाओं को मलबे में तब्दील करने वाली एक बेहद विस्मयकारी और दिल दहला देने वाली वारदात प्रकाश में आई है। पलासी थाना क्षेत्र के कनखुदिया चौक के समीप से सोमवार को रहस्यमयी परिस्थितियों में अपहृत किए गए दसवीं कक्षा के 17 वर्षीय छात्र विशाल कुमार महतो की उसके ही दो नाबालिग दोस्तों ने बेरहमी से हत्या कर दी। इस जघन्य हत्याकांड के विन्यास पटल पर आते ही संपूर्ण प्रक्षेत्र के भीतर भारी सनसनी और सांगठनिक हड़कंप मच गया है।
पुलिस के खोजी दस्तों ने त्वरित विधिक कार्रवाई मुकम्मल करते हुए बुधवार की सुबह चंडीपुर चरारनी स्थित एक सघन बांस की झाड़ी से मृतक छात्र का क्षत-विक्षत शव भौतिक रूप से बरामद किया है। इस पूरे वारदात की अंतर्निहित पटकथा किसी बाहरी पेशेवर सिंडिकेट से नहीं, बल्कि मोबाइल स्क्रीन पर खेले जाने वाले ऑनलाइन गेम के डिजिटल वॉलेट में परिलक्षित हो रही भारी-भरकम राशि के खूनी विवाद से जुड़ी संधारित पाई गई है।
कनखुदिया चौक से हुआ था अपहरण, परिजनों की शिकायत पर सक्रिय हुई एसआईटी टीम
इस वीभत्स घटनाक्रम की कड़ियों और अनुसंधान के विलेखों के अनुसार, मृतक छात्र विशाल कुमार महतो पलासी थाना क्षेत्र के कनखुदिया गांव के निवासी श्रीलाल महतो का पुत्र था, जो स्थानीय विद्यालय में दसवीं कक्षा का नियमित छात्र संधारित था। सोमवार को वह अपने घरेलू परिसर से बाहर कनखुदिया चौक की दिशा में प्रस्थान किया था, जहां से अचानक वह लापता हो गया। जब काफी समय बीत जाने के उपरांत भी वह वापस अपनी दहलीज पर नहीं लौटा, तो परिजनों के बीच भारी चिंता और गहरे अवसाद का माहौल लाइव हो गया। रिश्तेदारों और स्थानीय अंचलों में सघन खोजबीन के बाद भी जब विशाल का कोई सुराग हस्तगत नहीं हो सका, तो परिजनों को उसके अपहरण का कड़ा संदेह हुआ।
मंगलवार को पीड़ित परिजनों द्वारा पलासी थाने के प्रशासनिक पटल पर पहुंचकर किशोर के लापता होने और उसके अपहरण से संबंधित एक लिखित विलेख संचिका (आवेदन) सौंपी गई। मामले की संवेदनशीलता और किशोर की सुरक्षा के गंभीर मानकों को देखते हुए पलासी थाना पुलिस ने तुरंत विधिक प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर ली। इस हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग मामले की भनक मिलते ही अररिया के पुलिस कप्तान जितेंद्र कुमार ने त्वरित कप्तानी कमान संभाली। उन्होंने बिना किसी लिपिकीय टालमटोल के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) अररिया के कुशल और कड़े नेतृत्व में एक विशेष जासूसी दल यानी एसआईटी (Special Investigation Team) का गठन लाइव मोड पर मुकम्मल कर दिया, ताकि अपहृत किशोर को ससमय सुरक्षित रिकवर किया जा सके।
ऑनलाइन गेम के वॉलेट में दिख रहे थे चार करोड़ रुपये, लालच के चक्रव्यूह में मरे रिश्ते
विशेष रूप से गठित एसआईटी की टीमों ने ग्राउंड जीरो पर प्रविष्ट होकर तकनीकी अनुसंधान, मोबाइल टावर डंप एनालिसिस और मानवीय स्रोतों (गुप्तचरों) के माध्यम से जांच की कड़ियों को आपस में जोड़ना शुरू किया। जासूसी विंग को अनुसंधान के संक्षिप्त अंतराल के भीतर ही यह प्रामाणिक सुराग हस्तगत हुआ कि सोमवार की शाम विशाल कुमार महतो को उसके ही दो परम कनिष्ठ दोस्तों के साथ आखिरी बार देखा गया था। इसी खुफिया इनपुट के आधार पर पुलिस बल ने त्वरित दबिश देकर विशाल के उन दोनों नाबालिग दोस्तों को अपनी विधिक अभिरक्षा (हिरासत) में ले लिया।
पूछताछ कक्ष के भीतर जब कनिष्ठ जासूसों और पुलिस कप्तानों ने कड़े विन्यासों के साथ मनोवैज्ञानिक ढंग से पूछताछ शुरू की, तो दोनों नाबालिग आरोपी अपनी ही बुनी खूनी स्क्रिप्ट के आगे पूरी तरह टूट गए। उन्होंने विशाल कुमार महतो की हत्या करने की बात विधिक रूप से स्वीकार करते हुए जो खुलासे किए, उसने आधुनिक डिजिटल गेमिंग के जानलेवा दुष्प्रभावों को पूरी तरह उजागर कर दिया है। आरोपियों ने बताया कि इस खूनी रंजिश की बुनियादी वजह मोबाइल स्क्रीन पर खेला जाने वाला एक आधुनिक ऑनलाइन गेम था।
विशाल उस ऑनलाइन गेम को खेलने में अत्यधिक पारंगत हो चुका था और उसने अपनी प्रखर रणनीतिक क्षमता के बल पर अपने दोनों दोस्तों को गेमिंग स्कोर में काफी पीछे छोड़ दिया था। हालिया दिनों में विशाल के मोबाइल ऑनलाइन गेम के डिजिटल वॉलेट के भीतर संचयी रूप से चार करोड़ रुपये की काल्पनिक या वास्तविक राशि परिलक्षित (दिख) हो रही थी। इस भारी-भरकम राशि के डिजिटल विन्यास को देखकर दोनों दोस्तों के दिमाग में भयानक लालच का चक्रव्यूह सक्रिय हो गया। वे अनवरत विशाल से उन रुपयों को अपने खातों में डाइवर्ट करने और हिस्सा देने की मांग करने लगे। जब विशाल ने अपनी मेहनत की इस राशि को उनके साथ साझा करने से पूरी कड़ाई से इनकार कर दिया, तो दोनों ने मिलकर उसकी जीवन लीला को हमेशा के लिए ब्लॉक करने का एक अमानवीय प्लान तैयार कर लिया।
मजलिसपुर के कुजरी बेलवाड़ी में की हत्या, साक्ष्य मिटाने को बांस की झाड़ी में फेंका शव
स्वीकारोक्ति बयान के अनुसार, सोमवार की शाम दोनों आरोपी दोस्त कूटनीतिक झांसा देकर विशाल को पलासी के कनखुदिया चौक से अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर मजलिसपुर पंचायत के अंतर्गत आने वाले कुजरी बेलवाड़ी गांव की दिशा में लेकर चले गए। वहां एक सुनसान और एकांत प्रक्षेप पर ले जाकर दोनों ने विशाल पर दोबारा पैसों के हस्तांतरण का कड़ा दबाव बनाया। जब विशाल अपने विधिक निर्णय पर अड़ा रहा, तो आरोपियों ने पूर्व नियोजित साजिश के तहत एक धारदार हथियार (दबिया) निकाला और विशाल के शरीर पर प्रखर वार करते हुए उसे ऑन-स्पॉट मौत के घाट उतार दिया।
इस नृशंस हत्याकांड को अंजाम देने के बाद कानूनी शिकंजे और फॉरेंसिक साक्ष्यों को पूरी तरह से नष्ट (ब्लॉक) करने के उद्देश्य से हत्यारों ने विशाल के शव को छुपाने की रणनीति बनाई। उन्होंने शव को घसीटते हुए चंडीपुर चरारनी स्थित एक बेहद घनी और सघन बांस की झाड़ी के मलबे के भीतर फेंक दिया और वहां से पूरी चालाकी के साथ फरार हो गए। बुधवार की सुबह हिरासत में लिए गए दोनों आरोपियों की सीधी निशानदेही और भौतिक सत्यापन के आधार पर पुलिस कप्तानों ने चंडीपुर चरारनी की उस बांस की झाड़ी की विधिक घेराबंदी की, जहां से दसवीं के छात्र विशाल का शव क्षत-विक्षत अवस्थिति में रिकवर किया गया।
10 घंटे के भीतर मामले का उद्भेदन, पुलिस कप्तान ने प्रेस वार्ता में साझा की विरणी
बुधवार की दोपहर अररिया के एसपी जितेंद्र कुमार ने अपने कार्यालय कक्ष के मुख्य संभाग में एक विशेष प्रेस वार्ता का आयोजन कर इस पूरे सनसनीखेज मामले की विधिक और तकनीकी विरणी मीडिया कप्तानों के समक्ष प्रस्तुत की। पुलिस कप्तान ने बताया कि पलासी पुलिस और एसआईटी के जांबाज जासूसों ने अभूतपूर्व मुस्तैदी का परिचय देते हुए एफआईआर दर्ज होने के महज 10 घंटे के भीतर तीन दिन से गायब छात्र के इस पेचीदा ब्लाइंड मर्डर केस का पूरी तरह से पर्दाफाश कर दिया है।
प्रशासनिक प्रमुख ने बरामद किए गए भौतिक और डिजिटल साक्ष्यों की सूची सार्वजनिक करते हुए बताया कि घटना स्थल और आरोपियों के ठिकानों से निम्नलिखित सामग्रियां जब्त की जा चुकी हैं:
- हत्या का मुख्य हथियार: वारदात में प्रयुक्त किया गया खून से सना धारदार हथियार (दबिया)।
- परिवहन माध्यम: अपहरण और शव को डंप करने में प्रयुक्त की गई सिंडिकेट की मोटरसाइकिल (बाइक)।
- डिजिटल साक्ष्य: मृतक छात्र विशाल कुमार महतो का एंड्रॉइड मोबाइल फोन तथा पकड़े गए दोनों किशोरों के मोबाइल हैंडसेट्स, जिनमें ऑनलाइन गेमिंग वॉलेट और खूनी संवादों के डिजिटल विन्यास संधारित हैं।
पुलिस कप्तान ने स्पष्ट किया कि मृतक छात्र के शव का विधिक पंचनामा मुकम्मल करने के उपरांत उसे पोस्टमार्टम प्रक्रम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया है। हिरासत में लिए गए दोनों नाबालिग आरोपियों को विधिक प्रक्रियाओं के तहत किशोर न्याय परिषद (जुवेनाइल बोर्ड) के समक्ष प्रस्तुत कर बाल सुधार गृह भेजने की कार्रवाई ससमय मुकम्मल की जा रही है। पुलिस इस डिजिटल वॉलेट के चार करोड़ रुपये के एंगल की भी तकनीकी विंग से सघन स्क्रूटनी करा रही है ताकि मामले की केस डायरी को पूरी तरह अभेद्य बनाकर अदालत में स्पीडी ट्रायल के माध्यम से आरोपियों को कड़े दंडात्मक विन्यास से एकीकृत कराया जा सके।


