
आनंद मोहन एक बार फिर अपने तीखे और बेबाक बयानों को लेकर चर्चा में हैं। नई दिल्ली के बुराड़ी में आयोजित राजपूत शौर्य सम्मान समारोह में उन्होंने जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन पर जमकर निशाना साधा।
अपने संबोधन में आनंद मोहन ने यूजीसी विवाद का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि अगर ये सभी सवर्ण समाज से आते हैं तो फिर यूजीसी के नए नियमों पर खुलकर अपनी राय क्यों नहीं रखते। उन्होंने कहा कि हर बार सवाल सिर्फ आनंद मोहन से ही क्यों पूछा जाता है।
आनंद मोहन ने कहा, “कोई क्यों नहीं कहता है कि ललन सिंह यूजीसी पर क्यों नहीं बोलते? सवाल यह होता है कि आनंद मोहन क्यों बोलते हैं, लेकिन कोई यह क्यों नहीं पूछता कि संजय झा क्यों नहीं बोलते?”
अपने भाषण में उन्होंने बीजेपी नेता नितिन नबीन का नाम लेते हुए कहा कि यूजीसी के नियम उन पर भी लागू होंगे, फिर उनकी चुप्पी पर सवाल क्यों नहीं उठते। आनंद मोहन के इस बयान के बाद बिहार की सियासत में नई चर्चा शुरू हो गई है।
दरअसल, यूजीसी विवाद जनवरी में जारी किए गए नए ‘इक्विटी नियमों’ को लेकर है। इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को रोकना बताया गया था। हालांकि सामान्य वर्ग के कई छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि इन नियमों में उनके अधिकारों की अनदेखी की गई है। बढ़ते विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर रोक लगा दी थी।
बता दें कि आनंद मोहन बिहार के चर्चित बाहुबली नेताओं में गिने जाते हैं। 1994 के चर्चित गोपालगंज डीएम कृष्णय्या हत्याकांड में उन्हें दोषी ठहराया गया था और बाद में 2023 में उनकी रिहाई हुई। वर्तमान में उनकी पत्नी लवली आनंद सांसद हैं, जबकि बेटे चेतन आनंद विधायक हैं।


