पटना। बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य में राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों को न्याय के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली (RCMS) को और अधिक पारदर्शी, समान और विधि-सम्मत बनाया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि समान प्रकृति के मामलों में अलग-अलग स्तरों पर भिन्न निर्णय देना न्याय की मूल भावना के विरुद्ध है और इसे अब स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसी उद्देश्य से निर्णयों में एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। यह निर्णय उनके नेतृत्व में पटना, लखीसराय, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, सहरसा और भागलपुर में आयोजित भूमि सुधार जन कल्याण संवाद के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर लिया गया है।
समरूप मामलों में अलग-अलग आदेश पर चिंता
संवाद के दौरान यह तथ्य सामने आया कि प्रमंडलीय आयुक्त, समाहर्ता, अपर समाहर्ता, भूमि सुधार उप समाहर्ता और अंचल अधिकारी स्तर पर समान प्रकृति के मामलों में अलग-अलग आदेश पारित किए जा रहे हैं। इससे आम जनता में भ्रम, असुरक्षा और न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास की स्थिति बन रही है।
सभी समाहर्ताओं को जारी हुए निर्देश
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने 13 जनवरी 2026 को सभी समाहर्ताओं को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार, अब अर्ध-न्यायिक निर्णय लेते समय महाधिवक्ता के विधिक परामर्श को मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में अपनाया जाएगा। यद्यपि यह परामर्श बाध्यकारी नहीं है, लेकिन इसे विधि-सम्मत, न्यायिक रूप से मान्य और निर्णयों में अनावश्यक भिन्नता को समाप्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।
प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र पर स्पष्टता
निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिस प्रक्रिया से कोई निर्णय लिया गया हो, उसी प्रक्रिया से उसमें संशोधन या समाप्ति की जानी चाहिए। विधि विभाग द्वारा गठित अधिवक्ताओं के पैनल को किसी अन्य प्राधिकरण द्वारा एकतरफा भंग करना अधिकार क्षेत्र से बाहर और मनमाना माना जाएगा। ऐसे आदेशों को अवैध और अस्थिर समझा जाएगा।
प्राकृतिक न्याय और अनुच्छेद 14 का पालन अनिवार्य
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सभी अर्ध-न्यायिक आदेश प्राकृतिक न्याय और संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के अनुरूप होने चाहिए। किसी भी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध आदेश पारित करने से पहले उन्हें सुनवाई का पूरा अवसर देना अनिवार्य होगा। बिना ठोस आधार, अस्पष्ट या तथ्यहीन आदेश न केवल अवैध माने जाएंगे, बल्कि संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
जनता को मिलेगा समान और निष्पक्ष न्याय
इस पहल से बिहार में राजस्व से जुड़े विवादों के निपटारे में पारदर्शिता, गति और एकरूपता आने की उम्मीद है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सुधार प्रक्रिया का उद्देश्य केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना नहीं, बल्कि भूमि और संपत्ति विवादों में नागरिकों को समान, निष्पक्ष और भरोसेमंद न्याय प्रदान करना है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल जनता के प्रति सरकार की उत्तरदायित्वपूर्ण सोच को दर्शाती है और भविष्य में इसे और सुदृढ़ किया जाएगा।


