
पटना: मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में लगी भीषण आग में पांच लोगों की मौत के बाद बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। इसी बीच बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के दिल्ली दौरे को लेकर विपक्ष ने सरकार को निशाने पर लिया है।
एयरपोर्ट पर सवालों से बचते दिखे स्वास्थ्य मंत्री
मुजफ्फरपुर अग्निकांड को लेकर जब पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों ने स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार से सवाल पूछने की कोशिश की तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। हाथ जोड़कर “नमस्ते” कहते हुए वह आगे बढ़ गए। उनके साथ मौजूद जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने भी मीडिया के सवालों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
सोशल मीडिया पर जताया दुख
हालांकि दिल्ली रवाना होने से पहले स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घटना को लेकर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल में आग लगने से हुई मौतें बेहद दुखद और हृदयविदारक हैं। साथ ही उन्होंने मामले की जांच कराने और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की बात कही।
मृतकों के परिजनों को मुआवजा
बिहार सरकार ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए हैं।
वहीं उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि आग लगने के कारणों की गहन जांच कराई जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
जेडीयू ने भी उठाए कुप्रबंधन के सवाल
जेडीयू नेता नीरज कुमार ने कहा कि आईसीयू जैसे संवेदनशील स्थान पर आग लगना गंभीर कुप्रबंधन की ओर इशारा करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अस्पताल को लाइसेंस देने और उसकी निगरानी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। यदि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हुआ है तो कठोर कार्रवाई आवश्यक है।
उपेंद्र कुशवाहा ने मानकों के पालन पर दिया जोर
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने घटना को दुखद बताते हुए कहा कि अक्सर सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण ऐसे हादसे होते हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और सरकार से अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था की विशेष समीक्षा कराने की मांग की।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
आरजेडी प्रवक्ता अरुण कुमार यादव ने इस हादसे के लिए बिहार सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उनका आरोप है कि राज्य में बिना पर्याप्त निगरानी और सुरक्षा मानकों के कई निजी अस्पताल संचालित हो रहे हैं, जिससे आम लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है।
वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अखिलेश प्रसाद सिंह ने भी स्वास्थ्य मंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी गंभीर घटनाओं पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
जांच और जवाबदेही पर टिकी निगाहें
मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड के बाद अब लोगों की नजर सरकार की जांच प्रक्रिया पर टिकी हुई है। आग लगने के वास्तविक कारण, अस्पताल में सुरक्षा मानकों की स्थिति और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ होने वाली कार्रवाई को लेकर आम जनता जवाब चाह रही है। इस बीच हादसे में प्रभावित परिवारों के बीच शोक और आक्रोश दोनों का माहौल बना हुआ है।


