
मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से करोड़ों रुपये की मंदिर भूमि से जुड़ा बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि मुशहरी अंचल के भीखनपुर पंचायत में भगवान श्रीराम जानकी समेत अन्य देवी-देवताओं के नाम दर्ज करीब 17 एकड़ जमीन को भू-माफियाओं और कुछ सरकारी कर्मियों की कथित मिलीभगत से बेच दिया गया। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने पूरे प्रकरण की नए सिरे से जांच कराने का फैसला लिया है।
NH-77 और NH-57 के पास है करोड़ों की जमीन
बताया जा रहा है कि विवादित जमीन राष्ट्रीय राजमार्ग NH-77 और NH-57 के पास स्थित है, जिसकी बाजार कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। आरोप है कि वर्ष 2007-08 से ही इस जमीन की खरीद-बिक्री का खेल चलता रहा। स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायत भी की, लेकिन लंबे समय तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
सरकारी रिकॉर्ड में आज भी देवताओं के नाम दर्ज है जमीन
सरकारी अभिलेखों के अनुसार, संबंधित भूमि की रसीद आज भी श्रीराम जानकी और अन्य देवी-देवताओं के नाम से कट रही है। ऐसे में नियमों के अनुसार किसी अन्य व्यक्ति के नाम दाखिल-खारिज होना संभव नहीं था। यही वजह रही कि कई वर्षों तक ऐसे आवेदन अंचल कार्यालय द्वारा खारिज किए जाते रहे।
2019 में रिश्तेदारों के नाम हुई रजिस्ट्री का आरोप
आरोप है कि वर्ष 2019 में मुशहरी अंचल में तैनात एक तत्कालीन राजस्व कर्मचारी ने अपने रिश्तेदारों के नाम इस जमीन की रजिस्ट्री करा दी। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार 1 जुलाई 2019 को एक रिश्तेदार के नाम 3.60 डिसमिल और 19 नवंबर 2019 को दूसरे रिश्तेदार के नाम 2 डिसमिल जमीन दर्ज की गई। इसके बाद इन जमीनों का दाखिल-खारिज भी स्वीकृत कर दिया गया।
पहले खारिज हुई फाइलें बाद में कैसे हो गईं पास?
मामले में यह भी आरोप है कि जिन फाइलों को पहले नियमों के विरुद्ध बताकर लगातार खारिज किया जा रहा था, वही फाइलें बाद में तेजी से स्वीकृत कर दी गईं। इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन अंचलाधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि उन्होंने बिना किसी आपत्ति के संबंधित फाइलों को मंजूरी दे दी।
फिर होगी निष्पक्ष जांच
इस मामले की शिकायत पहले भी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग तक पहुंची थी और जांच के आदेश भी दिए गए थे, लेकिन जांच रिपोर्ट आगे नहीं बढ़ सकी। अब मुजफ्फरपुर के अपर समाहर्ता (ADM) प्रशांत कुमार ने कहा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और नए सिरे से जांच कराई जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में यदि कोई अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब इस हाई-प्रोफाइल भूमि विवाद की जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला बिहार के चर्चित भूमि घोटालों में शामिल हो सकता है।


