इंग्लैंड में चमके आकाशदीप, गांव लौटते ही हुआ भव्य स्वागत — ढोल-नगाड़ों और फूलों की बारिश में नहाए ‘रोहतास के लाल’

सासाराम, 12 अगस्त — क्रिकेट के मैदान पर अपनी धारदार गेंदबाज़ी से विरोधियों के छक्के छुड़ाने वाले भारतीय तेज गेंदबाज़ आकाशदीप जब लंबे इंग्लैंड दौरे के बाद अपने पैतृक गांव बड्डी लौटे, तो पूरा गांव खुशी से झूम उठा। जैसे ही उनका काफ़िला रोहतास की सीमा में दाखिल हुआ, सड़कों पर “रोहतास का बेटा ज़िंदाबाद” और “भारत माता की जय” के नारे गूंजने लगे।


वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच किया प्रवेश

गांव की मिट्टी से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचने वाले आकाशदीप ने जब वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच अपने गांव में कदम रखा, तो बुजुर्गों की आंखें नम हो गईं और युवाओं की आंखों में नए सपने चमकने लगे। इंग्लैंड सीरीज में 10 विकेट झटककर भारत को जीत दिलाने वाले इस सितारे ने न केवल क्रिकेट मैदान पर, बल्कि गांववासियों के दिलों में भी गहरी छाप छोड़ी है।


ढोल-नगाड़ों और पगड़ी से हुआ सम्मान

गांव में आयोजित स्वागत कार्यक्रम में आकाशदीप को पारंपरिक पगड़ी पहनाई गई, अंगवस्त्र ओढ़ाया गया और फूलों की वर्षा की गई। युवाओं ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते हुए अपने हीरो का स्वागत किया।

“मैं यहां का बेटा हूं। इस मिट्टी ने मुझे हौसला और संघर्ष सिखाया। आज जब लोग इतने स्नेह से स्वागत कर रहे हैं तो लगता है कि सच में कुछ हासिल किया है। यह पल मेरे लिए किसी ट्रॉफी से कम नहीं।”आकाशदीप


गांव के बच्चों की नई प्रेरणा

बचपन में बड्डी की गलियों में टेनिस बॉल से खेलने वाला यह लड़का अब जब भारतीय टीम का हिस्सा बन चुका है, तो गांव के बच्चे भी उसके नक्शे-कदम पर चलने का सपना देखने लगे हैं। स्कूल के मैदानों से लेकर मोहल्लों तक अब सिर्फ आकाशदीप की चर्चा है।


संघर्ष से सफलता तक का सफर

बिहार से निकलकर क्रिकेट में पहचान बनाने के लिए आकाशदीप को पश्चिम बंगाल का रुख करना पड़ा, जहां से उन्होंने रणजी ट्रॉफी में खेलना शुरू किया। शानदार प्रदर्शन ने उन्हें आईपीएल तक पहुंचाया और वहीं से टेस्ट व वनडे टीम में जगह मिली।

“क्रिकेट मेरे लिए सिर्फ खेल नहीं, मेरी पहचान है। लेकिन मेरी असली पहचान यह गांव और इसके लोग हैं, जिनकी दुआओं से मैं यहां तक पहुंचा हूं।”आकाशदीप


 

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