मजदूर अधिकारों की रक्षा के लिए ऐक्टू की सभा, लेबर कोड रद्द करने की मांग तेज

भागलपुर: मजदूर अधिकारों पर बढ़ते हमलों और नए लेबर कोड्स के खिलाफ भागलपुर में सोमवार को ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ऐक्टू) के बैनर तले एक बड़ी सभा आयोजित की गई। यह सभा मई दिवस के अवसर पर चल रहे माहव्यापी अभियान के चौथे दिन जगदेव चौक, आंधरी में आयोजित हुई, जिसमें जगदीशपुर, नाथनगर और शाहकुंड प्रखंड के सीमावर्ती गांवों से सैकड़ों महिला और पुरुष मजदूर शामिल हुए।

सभा में मजदूरों ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार, अनियमितता और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई। साथ ही केंद्र सरकार से लेबर कोड्स को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की गई।

मजदूरों की एकजुटता का प्रदर्शन

सभा में शामिल मजदूरों ने एक स्वर में कहा कि वर्तमान नीतियां श्रमिकों के हितों के खिलाफ हैं और इससे उनके जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने इस आंदोलन को और मजबूत बनाया।

सभा स्थल पर मजदूरों ने नारेबाजी करते हुए अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। उनका कहना था कि अगर समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

नेताओं ने सरकार की नीतियों पर साधा निशाना

ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त ने सभा को संबोधित करते हुए केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि नए लेबर कोड्स कानून से श्रमिकों के अधिकार कमजोर हुए हैं और यह कानून पूंजीपतियों के पक्ष में ज्यादा झुका हुआ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों की लड़ाई के बाद मजदूरों को जो कानूनी सुरक्षा मिली थी, उसे नए कानूनों के जरिए खत्म किया जा रहा है। इससे श्रमिकों का शोषण बढ़ेगा और उनकी स्थिति और बदतर होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि महंगाई और बेरोजगारी की मार पहले से झेल रहे मजदूरों के लिए यह कानून और अधिक परेशानी पैदा करेगा।

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में धांधली का आरोप

सभा में वक्ताओं ने श्रम विभाग पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि लेबर ऑफिस भ्रष्टाचार का केंद्र बन गया है, जहां मजदूरों को मिलने वाली सुविधाओं में लगातार धांधली हो रही है।

मजदूरों ने शिकायत की कि ऐप अपडेट और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं के नाम पर उनके सामाजिक सुरक्षा लाभों को रोका जा रहा है।

विशेष रूप से 3000 रुपये वार्षिक स्वास्थ्य भत्ता, जो मजदूरों को मिलना चाहिए था, पिछले कई वर्षों से नहीं दिया गया है। इससे मजदूरों में भारी नाराजगी देखी गई।

15 दिनों का अल्टीमेटम

सभा में यह भी तय किया गया कि यदि 15 दिनों के भीतर मजदूरों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया और लंबित आवेदनों का निपटारा नहीं हुआ, तो श्रम अधिकारियों का घेराव किया जाएगा।

मजदूर नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे अब केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे और अपने अधिकारों के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।

महिलाओं की बढ़ी भागीदारी

इस सभा की खास बात यह रही कि बड़ी संख्या में महिला मजदूरों ने इसमें हिस्सा लिया। उन्होंने भी अपने अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा को लेकर अपनी बात खुलकर रखी।

महिला मजदूरों ने कहा कि उन्हें स्वास्थ्य, पोषण और रोजगार के क्षेत्र में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, लेकिन उनकी आवाज अक्सर अनसुनी कर दी जाती है।

नेतृत्व और आयोजन

सभा की अध्यक्षता ऐक्टू के संयुक्त जिला सचिव राजेश कुमार और स्थानीय मजदूर नेत्री बिंदो भारती ने की।

इस मौके पर बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन के जिला उपाध्यक्ष दिनेश कापरी सहित कई अन्य मजदूर नेता और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

सभा में सैकड़ों मजदूरों की भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि मजदूर वर्ग अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हो रहा है और संगठित रूप से संघर्ष के लिए तैयार है।

आंदोलन की आगे की रणनीति

मजदूर संगठनों ने संकेत दिया कि यह आंदोलन केवल एक दिन की सभा तक सीमित नहीं रहेगा। मई माह के दौरान विभिन्न स्थानों पर लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक मजदूरों को इस अभियान से जोड़ा जा सके।

नेताओं ने कहा कि आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर प्रदर्शन और रैलियां आयोजित की जाएंगी।

व्यापक मुद्दों पर चर्चा

सभा में केवल लेबर कोड्स ही नहीं, बल्कि महंगाई, बेरोजगारी, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की विफलता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

मजदूरों ने कहा कि सरकार को इन सभी मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और ठोस कदम उठाने चाहिए।

भागलपुर में आयोजित इस सभा ने यह स्पष्ट कर दिया कि मजदूर वर्ग अब अपने अधिकारों के प्रति सजग है और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए तैयार है।

लेबर कोड्स के विरोध से लेकर सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में पारदर्शिता की मांग तक, मजदूरों ने अपनी समस्याओं को खुलकर सामने रखा।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या कदम उठाती है और क्या मजदूरों की समस्याओं का समाधान समय पर हो पाता है या नहीं।

फिलहाल, मजदूर संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और तेज होगा।

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