पटना | 25 फरवरी, 2026: भारत के गांवों की तस्वीर अब बदलने वाली है और इस बदलाव का इंजन है ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI)। केंद्र सरकार की #AIforAll रणनीति के तहत अब ग्रामीण भारत को डिजिटल सुपरपावर बनाने की तैयारी है। हाल ही में दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ में बिहार ने कई महत्वपूर्ण समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं, जो राज्य के दूरदराज इलाकों में खेती, पढ़ाई और इलाज का चेहरा बदल देंगे।
पंचायत 2.0: अब ‘सभासार’ लिखेगा बैठकों का हिसाब
पंचायती राज अब फाइलों और मैन्युअल रजिस्टरों के बोझ से आजाद हो रहा है।
- सभासार टूल: अगस्त 2025 में लॉन्च हुए इस एआई टूल ने कमाल कर दिया है। अब ग्राम सभा की बैठकों का ऑडियो-वीडियो सीधे लिखित ‘मिनट्स’ में बदल जाता है।
- 14 भाषाओं का साथ: भाषिनी के साथ जुड़ने के कारण यह 14 भारतीय भाषाओं में काम करता है, जिससे गांव के प्रधान को कागजी कार्रवाई के बजाय विकास लक्ष्यों पर ध्यान देने का मौका मिल रहा है।
- ई-ग्रामस्वराज: अब 2.5 लाख से अधिक पंचायतों का बजट और भुगतान पूरी तरह डिजिटल हो चुका है, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो गई है।
‘भूप्रहरी’ की नजर: मनरेगा में अब नहीं चलेगा फर्जीवाड़ा
एआई और जीआईएस तकनीक के संगम से बना ‘भूप्रहरी’ टूल अब मनरेगा के तहत बनी संपत्तियों की रीयल-टाइम निगरानी कर रहा है। अब कोई भी सड़क या तालाब केवल कागजों पर नहीं बन सकेगा, क्योंकि उपग्रह की नजरें सीधे उसकी ट्रैकिंग कर रही हैं। यह पारदर्शिता ‘विकसित भारत-गारंटी’ का सबसे बड़ा हथियार बन रही है।
खेती में एआई का ‘जादू’: किसान का नया साथी ‘ई-मित्र’
कृषि मंत्रालय ने किसानों को मौसम और कीटों की मार से बचाने के लिए एआई की फौज उतार दी है।
- किसान ई-मित्र: यह एक वर्चुअल असिस्टेंट है जो किसानों को सरकारी योजनाओं और आय सहायता की जानकारी उनकी अपनी भाषा में देता है।
- कीट निगरानी: सैटेलाइट इमेज के जरिए रीयल-टाइम सलाह दी जा रही है कि कब सिंचाई करनी है और कब कीटनाशक छिड़कना है। इससे फसल उत्पादन में भारी इजाफा होने की उम्मीद है।
भाषा की दीवार टूटी: ‘भारतजेन एआई’ और ‘आदि वाणी’
ग्रामीण इलाकों में कम पढ़े-लिखे लोगों के लिए डिजिटल सेवाएं अब बोझ नहीं होंगी।
- भाषिनी: 36 से अधिक भाषाओं में अनुवाद और वॉयस इंटरफेस की सुविधा दे रहा है।
- भारतजेन एआई: जून 2025 में लॉन्च हुआ यह भारत का अपना ‘मल्टीमॉडल लार्ज लैंग्वेज मॉडल’ (LLM) है, जो 22 भाषाओं में टेक्स्ट, स्पीच और इमेज को संभाल सकता है।
- आदि वाणी: अगस्त 2025 में इसे विशेष रूप से जनजातीय भाषाओं के लिए लॉन्च किया गया है, ताकि आदिवासी समाज भी मुख्यधारा से जुड़ सके।
पलायन पर लगेगी लगाम और डॉक्टरों की कमी होगी पूरी
एआई के इस्तेमाल से बिहार जैसे राज्यों में दो बड़े बदलाव आने वाले हैं:
- स्थानीय रोजगार: एआई टूल्स के जरिए ग्रामीण युवाओं को ट्रेनिंग देकर स्थानीय स्तर पर ही रोजगार से जोड़ा जाएगा, जिससे शहरों की ओर होने वाला पलायन रुकेगा।
- स्मार्ट हेल्थकेयर: दूरदराज के गांवों में जहां डॉक्टरों की कमी है, वहां एआई टूल्स के जरिए प्राथमिक निदान (Diagnosis) और विशेषज्ञ सलाह पहुंचाई जा सकेगी।
VOB का नजरिया: क्या रोबोटिक दिमाग बदल पाएगा गांव का दिल?
एआई का यह दखल निश्चित रूप से ग्रामीण ई-गवर्नेंस में पारदर्शिता लाएगा। ‘पंचम’ जैसे चैटबॉट से सीधे संवाद की सुविधा मिलना एक क्रांतिकारी कदम है। हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती गांव के अंतिम व्यक्ति तक इस तकनीक की पहुंच और उसे चलाने की ट्रेनिंग देना होगी। यदि एआई सही ढंग से लागू हुआ, तो बिहार का ‘स्मार्ट विलेज’ अब केवल सपना नहीं हकीकत होगा।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।


