द वॉयस ऑफ बिहार | जहानाबाद/मखदुमपुर
पटना में रहकर मेडिकल की तैयारी कर रही जहानाबाद की बेटी की संदिग्ध मौत का मामला अब और भी खौफनाक मोड़ ले चुका है। इंसाफ की गुहार लगा रहे पीड़ित परिवार को अब उनके इकलौते बेटे की जान लेने की धमकी दी गई है। मंगलवार को छात्रा के पैतृक घर के किचन में एक धमकी भरा पर्चा मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
किचन की खिड़की से फेंका ‘मौत का पैगाम’
परिजनों के अनुसार, मंगलवार (17 फरवरी) को जब घर के सदस्य रसोई में गए, तो वहां एक कागज का टुकड़ा मिला। इस पर बड़े अक्षरों में लिखा था— “बेटी तो गई, अब अगर नहीं माने तो 2 दिन के अंदर बेटा भी मरेगा।” * सुरक्षा पर सवाल: घर पर पुलिस का पहरा होने के बावजूद अपराधी खिड़की के जरिए अंदर पर्चा फेंकने में सफल रहे।
- दूसरी बार धमकी: इससे पहले 14 फरवरी को भी परिवार को चुप रहने की चेतावनी भरा नोट मिला था। लगातार मिल रही धमकियों ने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है।
CBI की दबिश: मखदुमपुर से बरामद हुआ मोबाइल फोन
इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की पांच सदस्यीय टीम एक बार फिर गांव पहुंची है। जांच में एक बड़ी सफलता हाथ लगी है:
- मोबाइल बरामद: छात्रा के भाई का गायब मोबाइल फोन मखदुमपुर इलाके की एक गुमटी से बरामद किया गया है।
- डिजिटल साक्ष्य: सीबीआई ने फोन को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। माना जा रहा है कि इस फोन के कॉल रिकॉर्ड्स और डेटा से केस की गुत्थी सुलझ सकती है।
फ्लैशबैक: हॉस्टल से अस्पताल और फिर CBI तक का सफर
यह मामला 6 जनवरी 2026 को शुरू हुआ था, जब पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा संदिग्ध परिस्थितियों में बेहोश मिली थी। 11 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
- यौन उत्पीड़न का आरोप: परिवार का दावा है कि उनकी बेटी के साथ दरिंदगी की गई और मामले को रफा-दफा करने की कोशिश हुई।
- फॉरेंसिक साक्ष्य: शुरुआती जांच में कपड़ों पर जैविक साक्ष्य (Biological Evidence) मिले थे, जिसके बाद हॉस्टल के एक कर्मी को गिरफ्तार किया गया था।
- CBI जांच: मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी थी।
इलाके में आक्रोश, सुरक्षा बढ़ाने की मांग
धमकी की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे अपने बेटे की सुरक्षा को लेकर काफी डरे हुए हैं। स्थानीय पुलिस ने नया केस दर्ज कर निगरानी बढ़ा दी है, लेकिन सवाल वही है— आखिर वो कौन है जो पुलिस और सीबीआई की मौजूदगी के बावजूद परिवार को खुलेआम चुनौती दे रहा है?
द वॉयस ऑफ बिहार का टेक: न्याय की इस लड़ाई में परिवार को डराने की कोशिश करना अपराधियों के बढ़ते दुस्साहस का प्रमाण है। पुलिस को चाहिए कि वह केवल जांच न करें, बल्कि परिवार को ऐसा सुरक्षा चक्र प्रदान करे कि अपराधी दोबारा सिर न उठा सकें।


