पटना, 12 जुलाई 2025:बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद राज्य में नीरा जैसे पारंपरिक और पौष्टिक पेय पदार्थों की लोकप्रियता में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। नीरा अब न केवल एक पारंपरिक पेय, बल्कि स्वास्थ्यवर्धक विकल्प के रूप में तेजी से अपनाया जा रहा है।
राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अप्रैल से 10 जुलाई तक एक करोड़ 80 लाख लीटर से अधिक नीरा का संग्रह किया गया, जिसमें 1.39 करोड़ लीटर से अधिक नीरा की बिक्री हो चुकी है।
नीरा उत्पादन में तेजी
गत सप्ताह में ही 4,87,532 लीटर नीरा का उत्पादन किया गया, यानी प्रति दिन औसतन 1 लाख लीटर से अधिक नीरा इकठ्ठा किया जा रहा है। राज्यभर में 2,309 काउंटरों के माध्यम से नीरा की बिक्री की जा रही है।
स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है नीरा
आबकारी आयुक्त सह महानिरीक्षक, पंजीकरण रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि नीरा को विशेषज्ञों ने ऊर्जा का प्राकृतिक स्रोत माना है। इसमें विटामिन-C, एंजाइम्स, आयरन, पोटैशियम, फॉस्फोरस और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। नीरा का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे यह मधुमेह रोगियों के लिए भी सुरक्षित माना गया है।
“नीरा में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं और इसका सेवन किसी प्रकार का नशा उत्पन्न नहीं करता,” उन्होंने कहा।
मुख्यमंत्री नीरा संवर्धन योजना से टैपर्स और पेड़ मालिकों को लाभ
मुख्यमंत्री नीरा संवर्धन योजना, जो कि मुख्यमंत्री सतत जीवकोपार्जन योजना का हिस्सा है, के अंतर्गत 10,646 टैपर्स (नीरा उतारने वाले) और 11,176 ताड़ पेड़ मालिकों को लाभान्वित किया गया है। योजना का संचालन जीविका समूहों के माध्यम से किया जा रहा है।
- सबसे अधिक टैपर्स वैशाली (1,632), गया (1,184), नालंदा (880) और मुजफ्फरपुर (749) से हैं।
- वहीं ताड़ पेड़ मालिकों की सर्वाधिक संख्या भी वैशाली (648), नालंदा (509), नवादा (254) और गया (207) जिलों से है।
इन सभी लाभार्थियों को डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के माध्यम से प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
नीरा का बढ़ता प्रचलन न केवल ताड़ी व्यवसाय से जुड़े लोगों को वैकल्पिक आजीविका दे रहा है, बल्कि यह स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में समाज में स्वीकार्य बनता जा रहा है।


