पटना। बिहार की राजनीति में खरमास खत्म होने के बाद बड़े फैसलों की परंपरा रही है। इसी कड़ी में अब भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक फैसलों को लेकर हलचल तेज हो गई है। पार्टी कार्यकर्ता लंबे समय से खरमास समाप्त होने का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि खरमास के बाद बिहार बीजेपी की नई प्रदेश कमेटी का ऐलान किया जा सकता है।
पार्टी ने हाल ही में दरभंगा विधायक संजय सरावगी को बिहार बीजेपी का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है, लेकिन अभी तक उनकी पूरी टीम की घोषणा नहीं हुई है। अब संकेत मिल रहे हैं कि 15 जनवरी के बाद प्रदेश कमेटी के गठन की प्रक्रिया पूरी हो सकती है।
महामंत्री से लेकर प्रदेश मंत्री तक होगी नियुक्ति
नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के सामने संगठन को संतुलित और मजबूत टीम देने की बड़ी जिम्मेदारी है। प्रस्तावित ढांचे के अनुसार बीजेपी की नई प्रदेश टीम में—
- 5 प्रदेश महामंत्री
- दर्जन भर उपाध्यक्ष
- 12 प्रदेश मंत्री
- 7 मोर्चा अध्यक्ष
- दर्जन भर प्रकोष्ठों का गठन
कुल मिलाकर 50 से अधिक नेताओं को अलग-अलग पदों पर जिम्मेदारी दी जानी है।
पुराने चेहरों के साथ नए नेतृत्व को मौका
मिली जानकारी के मुताबिक, संजय सरावगी ने प्रदेश कमेटी के गठन को लेकर संगठनात्मक मंथन शुरू कर दिया है। संभावना जताई जा रही है कि—
- अधिकांश प्रदेश महामंत्री और उपाध्यक्षों को दोबारा मौका मिल सकता है
- वहीं प्रदेश मंत्री और अन्य पदों पर बदलाव देखने को मिल सकता है
- संगठन को मजबूत करने के लिए युवा और नए चेहरों को प्राथमिकता दी जा सकती है
पार्टी प्रवक्ता का बयान
बीजेपी प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने कहा—
“प्रदेश कमेटी के गठन का इंतजार पार्टी कार्यकर्ताओं को रहता है। खरमास खत्म होने के बाद यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हालांकि, यह प्रदेश अध्यक्ष का विवेक है कि वह इसे कब और कैसे अंतिम रूप देते हैं।”
दिलीप जायसवाल की जगह संजय सरावगी बने अध्यक्ष
बीजेपी ने दिलीप जायसवाल की जगह संजय सरावगी को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है। दिलीप जायसवाल को बिहार सरकार में मंत्री बनाए जाने के बाद ‘एक व्यक्ति–एक पद’ के सिद्धांत के तहत उन्हें प्रदेश अध्यक्ष का पद छोड़ना पड़ा।
कार्यकाल पूरा नहीं कर सके दो प्रदेश अध्यक्ष
गौरतलब है कि इससे पहले—
- सम्राट चौधरी प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री बने और पद छोड़ना पड़ा
- उनके बाद बने दिलीप जायसवाल भी कार्यकाल पूरा नहीं कर सके
अब ऐसे में संजय सरावगी के सामने न सिर्फ संगठन को स्थिर नेतृत्व देना, बल्कि आगामी चुनावी रणनीति के लिहाज से मजबूत टीम खड़ी करने की चुनौती भी है।


