
नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाल लिया है। कार्यभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन पर भरोसा जताते हुए यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने बताया कि मंत्रालय संभालने के पहले ही दिन उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें कर मंत्रालय के कामकाज, लंबित मामलों और प्रमुख योजनाओं की समीक्षा की।
‘शिक्षा मंत्रालय मेरे लिए नया विषय है’
मीडिया से बातचीत में प्रह्लाद जोशी ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय उनके लिए नया विभाग है। इसलिए उनकी पहली प्राथमिकता मंत्रालय की कार्यप्रणाली, नीतियों और लंबित मामलों को विस्तार से समझना है।
उन्होंने कहा, “शनिवार तक मैं कर्नाटक में था। देर रात दिल्ली पहुंचा और रविवार सुबह मंत्रालय का कार्यभार संभाला। पूरे दिन अधिकारियों के साथ बैठकें हुईं। पहले मैं मंत्रालय को पूरी तरह समझना चाहता हूं, उसके बाद ही भविष्य की प्राथमिकताओं और योजनाओं पर विस्तार से बात करूंगा।”
कार्यभार संभालते ही अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक
शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभालने के तुरंत बाद प्रह्लाद जोशी ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में विभिन्न विभागों के कामकाज, चल रही योजनाओं, प्रशासनिक चुनौतियों और लंबित निर्णयों पर चर्चा की गई।
उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान मंत्रालय की कार्यप्रणाली का अध्ययन करने और आवश्यक विषयों की समीक्षा करने पर है, ताकि आगे प्रभावी निर्णय लिए जा सकें।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद मिली जिम्मेदारी
गौरतलब है कि पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
जोशी पहले से ही उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब उनके पास शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त दायित्व भी आ गया है।
अनुभवी मंत्री के रूप में नई जिम्मेदारी
प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। वह कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके हैं। इससे पहले वे संसदीय कार्य मंत्रालय, कोयला मंत्रालय और खान मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभागों का नेतृत्व कर चुके हैं।
अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं। आने वाले दिनों में उनकी अगुवाई में शिक्षा मंत्रालय की प्राथमिकताओं और नीतिगत फैसलों पर सभी की नजर रहेगी।


