स्कूली बच्चों की परिवहन सुरक्षा में लापरवाही पर होगी कार्रवाई

विद्यालयों को जानकारी देने का आखिरी मौका, 1 सितम्बर से शुरू होगी सख्त कार्रवाई

पटना, 28 अगस्त।पटना जिले में स्कूली बच्चों की परिवहन सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरतने वाले विद्यालयों के खिलाफ अब जिला परिवहन कार्यालय (डीटीओ) सख्त कार्रवाई करने जा रहा है। डीटीओ ने सभी विद्यालयों को परिवहन समिति गठन और वाहनों की जानकारी देने के लिए आखिरी मौका दिया है।

जुलाई माह में 2,000 से अधिक छात्रों वाले 1,140 विद्यालयों को ई-मेल भेजकर समिति गठन और वाहन विवरण साझा करने का निर्देश दिया गया था। लेकिन अब तक सिर्फ 85 स्कूलों ने जवाब भेजा है। शेष स्कूलों की अनदेखी के बाद डीटीओ ने 1 सितम्बर से कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया है।

क्या मांगी गई थी जानकारी?

डीटीओ कार्यालय ने स्कूलों से बस, मिनी बस, ओमिनी वैन, वैन आदि की संख्या, मालिक का नाम, कॉन्ट्रैक्ट की जानकारी और वाहन पंजीकरण नंबर मांगा था। साथ ही 2,000 से अधिक छात्रों वाले विद्यालयों में बाल परिवहन समिति गठित कर परिवहन प्रभारी नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था।

बाल परिवहन समिति की संरचना

  • अध्यक्ष – स्कूल के प्रधानाचार्य
  • सदस्य – दो अभिभावक, शिक्षक संघ का एक प्रतिनिधि, यातायात पुलिस निरीक्षक, मोटरयान निरीक्षक, शिक्षा विभाग का प्रतिनिधि और स्कूल बस मालिकों का प्रतिनिधि
  • सचिव – स्कूल का परिवहन प्रभारी

समिति हर तीन महीने में बैठक कर यह सुनिश्चित करेगी कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा मानकों का पालन हो।

डीटीओ की चेतावनी

पटना डीटीओ उपेन्द्र कुमार पाल ने कहा—

“जिन स्कूलों ने गलत ई-मेल आईडी दी है, वे तुरंत सुधार करें। जानकारी साझा न करने वाले विद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। बच्चों की परिवहन सुरक्षा के साथ समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

स्कूली वाहनों के लिए अनिवार्य नियम

  • वाहन का पंजीकरण स्कूल प्रबंधन या पदाधिकारी के नाम पर होना चाहिए।
  • गाड़ी सुनहरे पीले रंग की हो और उस पर स्कूल का नाम लिखा हो।
  • किराए/लीज वाले वाहन पर “On School Duty” लिखना अनिवार्य।
  • वाहन की अधिकतम गति 40 किमी प्रति घंटा।
  • वाहन में प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स, अग्निशामक यंत्र, जीपीएस, पैनिक बटन और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस अनिवार्य।
  • बस में बैग रखने की व्यवस्था और दिव्यांग बच्चों के लिए सुविधाएं।
  • दो आपातकालीन गेट और ग्रिल युक्त खिड़कियां अनिवार्य।

 

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