
भागलपुर | 15 अप्रैल 2026: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) में छात्रहित और महिला सम्मान से जुड़े मुद्दों को लेकर बुधवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में जुटे कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को मुखर तरीके से रखा। इस दौरान कुछ समय के लिए विश्वविद्यालय का माहौल पूरी तरह आंदोलित नजर आया।
प्रदर्शन का मुख्य केंद्र कुलपति पर लगे गंभीर आरोपों और छात्राओं से जुड़े मुद्दे रहे। ABVP कार्यकर्ताओं ने कुलसचिव (रजिस्ट्रार) के समक्ष विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि महिला सम्मान से जुड़े मामलों में विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी बेहद चिंताजनक है। कार्यकर्ताओं ने “महिला विरोधी कुलपति” जैसे नारे लगाकर प्रशासन पर दबाव बनाने की कोशिश की।
परिषद के नेताओं का कहना था कि बी.एन. मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में एक महिला संविदा कर्मी द्वारा कुलपति पर शोषण का आरोप लगाया गया है, जो अत्यंत गंभीर मामला है। बावजूद इसके, अब तक इस मुद्दे पर संबंधित पक्ष की ओर से कोई स्पष्ट और सार्वजनिक जवाब नहीं आया है। ABVP ने इसे न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण बल्कि विश्वविद्यालयों में महिला सुरक्षा के लिए खतरे का संकेत बताया।
कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के एक शिक्षक और सिंडीकेट सदस्य द्वारा बिना किसी ठोस जांच या आधार के कुलपति को निर्दोष बताया जा रहा है। परिषद ने मांग की कि यदि आरोप गलत हैं, तो प्रशासन सार्वजनिक रूप से प्रमाण प्रस्तुत करे, अन्यथा इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
NEP के नाम पर त्रुटिपूर्ण अंकन का आरोप
प्रदर्शन के दौरान छात्रों और खासकर छात्राओं से जुड़े एक और महत्वपूर्ण मुद्दे को जोर-शोर से उठाया गया। ABVP ने आरोप लगाया कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के नाम पर कई विषयों में गलत तरीके से अंकन किया जा रहा है, जिससे छात्राएं परेशान हो रही हैं।
कार्यकर्ताओं का कहना था कि परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी और मूल्यांकन की त्रुटियों के कारण छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसी मुद्दे के विरोध में परिषद ने विश्वविद्यालय को आंशिक रूप से बंद भी कराया, जिससे प्रशासन पर तत्काल कार्रवाई का दबाव बनाया जा सके।
प्रशासन से वार्ता, 7 दिन में समाधान का आश्वासन
आंदोलन के बाद ABVP के प्रतिनिधिमंडल ने कुलसचिव, कुलानुशासक और परीक्षा नियंत्रक से मुलाकात कर अपनी मांगों को विस्तार से रखा। इस दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए सात दिनों का समय मांगा और आश्वासन दिया कि जल्द ही सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
प्रशासन के इस आश्वासन के बाद परिषद ने फिलहाल आंदोलन को स्थगित कर दिया, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि तय समयसीमा में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
नेताओं के तीखे बयान
इस मौके पर प्रदेश सह मंत्री कुणाल पांडेय और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हैप्पी आनंद ने कहा कि विद्यार्थी परिषद हमेशा छात्रों और छात्राओं के अधिकारों की लड़ाई लड़ती रही है और आगे भी किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करती रहेगी।
विशेष आमंत्रित सदस्य आशुतोष तोमर और जिला संयोजक सूर्या प्रताप ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पारदर्शिता अपनाने की मांग करते हुए कहा कि छात्र और महिला संबंधित मामलों में त्वरित एवं निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी है, ताकि संस्थान की साख बनी रहे।
प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मुक्ता सिंह और निधि ने स्पष्ट कहा कि यदि कुलपति पर लगे आरोप सत्य साबित होते हैं, तो उन्हें तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला सम्मान और विश्वविद्यालय की गरिमा से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बड़ी संख्या में मौजूद रहे कार्यकर्ता
प्रदर्शन में प्रतियोगी परीक्षा सह संयोजक अमन रॉय, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य किशन सोनी, ऋषि महतो, राजा यादव, नगर मंत्री पीयूष भारती, सुमित सिंह, सोहम, अवनीश, लक्ष्मण, प्रिया, साक्षी, श्वेता, राधा, अंकिता, शिव सागर और आशीष सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
क्या आगे बढ़ेगा आंदोलन?
ABVP ने साफ कर दिया है कि यह सिर्फ शुरुआत है। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन तय समय में ठोस कार्रवाई नहीं करता, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल सभी की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि मामला शांत होगा या और गरमाएगा।


