
भागलपुर। ने एसएम कॉलेज में इंटर्नशिप प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन के प्रतिनिधियों ने महाविद्यालय की प्राचार्य से मुलाकात कर इंटर्नशिप के नाम पर कथित अनियमितता, भ्रष्टाचार और छात्रों से शुल्क वसूली के मुद्दे पर विरोध दर्ज कराया। एबीवीपी का आरोप है कि विश्वविद्यालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कई कॉलेजों में इंटर्नशिप प्रक्रिया को पारदर्शी और निःशुल्क रखने के बजाय इसे कमाई का माध्यम बना दिया गया है।
छात्र संगठन ने दावा किया कि हाल ही में विश्वविद्यालय की ओर से कॉलेजों में इंटर्नशिप कार्यक्रम संचालित करने का आदेश जारी किया गया था। इसका उद्देश्य छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान और रोजगारोन्मुख अनुभव उपलब्ध कराना था। लेकिन एसएम कॉलेज में इस प्रक्रिया को जल्दबाज़ी में पूरा किया गया और नियमों की अनदेखी की गई। संगठन का आरोप है कि कुछ शिक्षकों ने प्रचार और मीडिया कवरेज पाने के उद्देश्य से बिना उचित तैयारी और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के इंटर्नशिप प्रक्रिया लागू कर दी।
एबीवीपी नेताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों में साफ तौर पर कहा गया है कि इंटर्नशिप में शामिल होने वाले प्रत्येक छात्र और छात्रा का पूरा विवरण संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाना अनिवार्य होगा। इसमें छात्रों की सूची, इंटर्नशिप संस्था का नाम, प्रशिक्षण की अवधि और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
हालांकि छात्र संगठन का आरोप है कि एसएम कॉलेज सहित कई अन्य महाविद्यालय इस नियम का पालन नहीं कर रहे हैं। संगठन के मुताबिक कॉलेज प्रशासन ने न तो छात्रों की सूची सार्वजनिक की और न ही यह स्पष्ट किया कि किन संस्थानों में इंटर्नशिप कराई जा रही है। इससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एबीवीपी का आरोप है कि विश्वविद्यालय की गाइडलाइन में इंटर्नशिप को पूरी तरह निःशुल्क रखने का निर्देश दिया गया था, लेकिन कई कॉलेजों में छात्रों से शुल्क वसूला जा रहा है। संगठन ने इसे विश्वविद्यालय और कॉलेज प्रशासन की मिलीभगत करार दिया है। उनका कहना है कि शिक्षा के नाम पर पहले से ही छात्र आर्थिक बोझ झेल रहे हैं और अब इंटर्नशिप के नाम पर अतिरिक्त पैसा लिया जाना पूरी तरह गलत है।
संगठन के प्रदेश सह मंत्री और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य ने कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से जारी नोटिस में स्पष्ट रूप से “निःशुल्क इंटर्नशिप” का उल्लेख किया गया है। इसके बावजूद छात्रों से पैसा लिया जाना गंभीर मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कॉलेज प्रशासन ने किसी संस्था से बिना शुल्क इंटर्नशिप कराने को लेकर बातचीत की थी या शुरुआत से ही छात्रों पर आर्थिक बोझ डालने का निर्णय ले लिया गया।
छात्र नेताओं ने कहा कि कई कॉलेजों में इंटर्नशिप के नाम पर मनमाना शुल्क वसूला जा रहा है। कुछ जगहों पर छात्रों से रजिस्ट्रेशन फीस, प्रशिक्षण शुल्क और अन्य मदों में पैसा लिया जा रहा है। एबीवीपी का आरोप है कि यह पूरी तरह अवैध है और इससे छात्रों तथा उनके अभिभावकों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
संगठन का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए। यदि किसी कॉलेज द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया है, तो संबंधित अधिकारियों और संस्थानों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। एबीवीपी ने मांग की कि विश्वविद्यालय एक केंद्रीकृत और पारदर्शी व्यवस्था लागू करे, ताकि छात्रों को स्पष्ट जानकारी मिल सके और किसी प्रकार की आर्थिक अनियमितता की संभावना समाप्त हो।
एबीवीपी नेताओं ने कहा कि इंटर्नशिप का उद्देश्य छात्रों को व्यावहारिक अनुभव देना है, न कि उन्हें आर्थिक रूप से परेशान करना। उनका कहना है कि वर्तमान समय में बड़ी संख्या में छात्र पहले से ही फीस, हॉस्टल, किताबों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भारी खर्च उठा रहे हैं। ऐसे में इंटर्नशिप को शुल्क आधारित बनाना शिक्षा के मूल उद्देश्य के खिलाफ है।
छात्र संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि कॉलेज प्रशासन छात्रों और अभिभावकों को पूरी जानकारी दिए बिना जल्दबाजी में इंटर्नशिप प्रक्रिया पूरी कराने में लगा हुआ है। कई छात्रों को यह तक नहीं बताया गया कि उन्हें किस संस्था में भेजा जाएगा और वहाँ उन्हें क्या प्रशिक्षण मिलेगा। एबीवीपी ने इसे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है।
संगठन के अनुसार, यदि विश्वविद्यालय वास्तव में छात्रों के हित में काम करना चाहता है, तो उसे पहले सभी महाविद्यालयों में समान नियम लागू करने होंगे। साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी कॉलेज इंटर्नशिप के नाम पर अवैध वसूली न करे। एबीवीपी ने यह भी कहा कि छात्रों के हितों की अनदेखी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मामले को लेकर छात्र राजनीति भी गर्म होती दिखाई दे रही है। एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि सभी छात्रों के लिए निःशुल्क इंटर्नशिप व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो संगठन अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेगा। संगठन ने कहा कि जरूरत पड़ने पर विश्वविद्यालय बंद कराने तक का आंदोलन किया जाएगा।
छात्र संगठन का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को जल्द से जल्द स्पष्ट नीति बनाकर सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि छात्रों के बीच भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
शिक्षा जगत से जुड़े कई लोगों का मानना है कि इंटर्नशिप आज के समय में छात्रों के करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। ऐसे में इसकी प्रक्रिया पारदर्शी, व्यवस्थित और सभी छात्रों के लिए समान होनी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इंटर्नशिप व्यवस्था में अनियमितता और आर्थिक बोझ बढ़ेगा, तो इसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा।
फिलहाल एसएम कॉलेज और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन एबीवीपी के आरोपों के बाद छात्र समुदाय में चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विश्वविद्यालय की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।


