पटना, 10 सितंबर।राजधानी पटना में आयोजित कार्यशाला “आधार सत्यापन सह सुदृढ़ डिजिटल सुशासन” में बिहार के विकास आयुक्त डॉ. एस. सिद्धार्थ ने कहा कि मजबूत डिजिटल गवर्नेंस के लिए आधार सबसे प्रभावी और प्रमुख माध्यम है। इसके जरिए न केवल सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुँचाया जा सकता है, बल्कि योग्य लाभार्थियों की सटीक पहचान भी सुनिश्चित होती है।
कार्यशाला की अहम बातें
- आयोजन : सूचना प्रावैधिकी विभाग, बिहार सरकार
- विषय : आधार सत्यापन सह सुदृढ़ डिजिटल सुशासन
- मौजूद रहे : सूचना प्रावैधिकी विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह, विशेष सचिव, UIDAI के उप महानिदेशक और विभिन्न विभागों के वरीय अधिकारी।
डॉ. सिद्धार्थ ने कही महत्वपूर्ण बातें
- बिहार में फर्जी राशन कार्ड की पहचान आधार सत्यापन से संभव हुई है।
- कई योजनाओं के क्रियान्वयन में आधार की त्रुटियों से कठिनाइयाँ आ रही हैं।
- बच्चों के नामांकन में आधार की अनिवार्यता न होने से शिक्षा विभाग को चुनौतियाँ झेलनी पड़ रही हैं।
- कई बच्चों के आधार कार्ड में मोबाइल नंबर, जन्मतिथि और माता-पिता का नाम गलत दर्ज पाया गया है।
- यदि जन्म के साथ ही बच्चों का आधार बन जाए, तो इन विसंगतियों को दूर किया जा सकता है।
- एक यूनिक पहचान संख्या से पारदर्शिता और डिजिटल गवर्नेंस दोनों को मजबूती मिलेगी।
अभय कुमार सिंह, सचिव – सूचना प्रावैधिकी विभाग
उन्होंने कहा कि सरकार की हर योजना में आधार सत्यापन की कारगरता बेहद जरूरी है।
बिहार आज आधार उपयोग में देश के शीर्ष छह राज्यों में शामिल है। सही आधार सत्यापन से योजनाओं का लाभ वास्तविक व्यक्ति तक पहुँचेगा और समय की बचत भी होगी।


