
गया: इस बार गया में रामनवमी के अवसर पर अभूतपूर्व उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला। गुरुवार को पूरा शहर भगवा रंग में रंगा हुआ था और “जय श्री राम” के जयघोष से वातावरण गूंज रहा था। अंतर्राष्ट्रीय हिंदू युवा शक्ति संघ और श्री रामनवमी केंद्रीय पूजा समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भव्य शोभा यात्रा ने इस धार्मिक पर्व को और भी विशेष बना दिया।
विष्णुपद मंदिर से शुरू हुई भव्य शोभा यात्रा
गया के प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर के बाहरी प्रांगण से दोपहर 12 बजे भव्य शोभा यात्रा शुरू हुई। यह यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों—चाँद चौरा, कोइरी बारी, जीबी रोड और आजाद पार्क—से गुजरते हुए पुनः मंदिर परिसर में समाप्त हुई। यात्रा मार्गों पर हजारों श्रद्धालु पहले से ही एकत्रित होकर यात्रा का स्वागत कर रहे थे।
देशभर के कलाकारों ने बिखेरा रंग
इस शोभा यात्रा में महाराष्ट्र, हरियाणा और कोलकाता समेत देश के विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों ने युद्ध कला, लोक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
- बच्चों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही।
- पारंपरिक वेशभूषा में सजे छोटे-छोटे बच्चों ने युद्ध कला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी।
- इन प्रस्तुतियों ने यात्रा को न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी समृद्ध बनाया।
शहर रंगा भगवा
रामनवमी के अवसर पर गया शहर पूरी तरह भगवा रंग में रंगा हुआ था।
- पुरुष, महिलाएं और बच्चे भगवा वस्त्र और पगड़ी पहनकर जुलूस में शामिल हुए।
- हाथों में झंडे और फूलों के साथ यात्रा का स्वागत किया गया।
- विभिन्न झांकियों के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन और उनके आदर्शों का संदेश लोगों तक पहुंचाया गया।
- संस्कृत श्लोक और भजन लोगों के आकर्षण का केंद्र बने।
5 लाख से अधिक राम भक्त हुए शामिल
श्री रामनवमी केंद्रीय पूजा समिति के जिला अध्यक्ष राजू बरनवाल के अनुसार, इस बार शोभा यात्रा में 5 लाख से अधिक राम भक्त शामिल हुए। उन्होंने बताया कि यह आयोजन केवल धार्मिक जुलूस नहीं, बल्कि हमारी आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक है।
- जिला प्रशासन ने सुरक्षा के लिए शहर में भारी पुलिस बल तैनात किया।
- सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन से निगरानी रखी गई।
भक्ति, संस्कृति और एकता का प्रतीक
गया में इस बार की रामनवमी ने यह साबित कर दिया कि धार्मिक आयोजन केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का भी कार्य करते हैं। कलाकारों की प्रस्तुतियां, बच्चों की भागीदारी और लाखों लोगों की उपस्थिति ने इसे ऐतिहासिक बना दिया।


