पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन के सबसे बड़े चेहरे तेजस्वी यादव को इस बार करारी हार का सामना करना पड़ा। RJD को उम्मीद थी कि कांग्रेस के साथ गठबंधन उनकी स्थिति सुधार देगा और पिछली गलतियों को ठीक करने में मदद करेगा, लेकिन नतीजों ने सभी राजनीतिक गणनाओं को ध्वस्त कर दिया।
कांग्रेस इस बार महागठबंधन की “डूबती नैया का तिनका” तो बनी, पर उसकी पकड़ सिर्फ 6 सीटों तक सीमित रह गई। हालांकि ये छह सीटें कई राजनीतिक संदेशों के साथ सामने आई हैं—खासतौर पर यह कि जिन इलाकों में कांग्रेस जीती है, वहां के उम्मीदवारों ने जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ बनाई थी।
तेजस्वी को नहीं मिली बड़ी राहत, कांग्रेस सिर्फ 6 सीटें बचा पाई
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, तेजस्वी यादव ने पूरे चुनाव अभियान में कांग्रेस को “महत्वपूर्ण सहयोगी” के रूप में प्रोजेक्ट करने की कोशिश की। लेकिन चुनाव के नतीजों में यह साफ दिखा कि जनता ने महागठबंधन से दूरी बनाकर एनडीए के पक्ष में निर्णायक वोट दिया।
कांग्रेस के प्रदर्शन ने यह संकेत दिया कि पार्टी अभी भी कुछ विशेष क्षेत्रों में अपना आधार बचाए हुए है, लेकिन राज्यव्यापी प्रभाव बेहद कमजोर हो चुका है।
कांग्रेस के जीते हुए सभी 6 विधायकों की पूरी सूची
कांग्रेस ने जिन छह सीटों पर जीत दर्ज की है, वे सभी क्षेत्रीय और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इन प्रत्याशियों की जीत यह दिखाती है कि जमीनी काम, स्थानीय मुद्दों पर पकड़ और जनता से संवाद अभी भी किसी भी स्टार प्रचार से ज्यादा प्रभावी साबित होता है।
1. वाल्मीकिनगर (कोड 1) — सुरेन्द्र प्रसाद
सीमा क्षेत्र से आने वाले सुरेंद्र प्रसाद ने ग्रामीण इलाकों, वन क्षेत्र के लोगों और किसानों के बीच मजबूत संपर्क बनाए रखा। इसी जमीनी नेटवर्क ने उन्हें यह महत्वपूर्ण जीत दिलाई।
2. चनपटिया (कोड 7) — अभिषेक रंजन
अभिषेक रंजन युवा नेतृत्व का चेहरा बनकर उभरे हैं। रोजगार, शिक्षा और स्थानीय आधारभूत संरचना पर उनके फोकस ने युवाओं का भारी समर्थन दिलाया।
3. फारबिसगंज (कोड 48) — मनोज विश्वास
फारबिसगंज में मुकाबला कड़ा था, लेकिन मनोज विश्वास की लगातार जनसंपर्क और स्थानीय मुद्दों पर उनकी सक्रिय भूमिका ने यह सीट कांग्रेस की झोली में डाली।
4. अररिया (कोड 49) — आबिदुर रहमान
अररिया में आबिदुर रहमान का व्यक्तिगत प्रभाव और अल्पसंख्यक समुदाय में उनकी पकड़ निर्णायक रही। उन्होंने विकास और सामाजिक समरसता पर जोर दिया।
5. किशनगंज (कोड 54) — मोहम्मद कमरूल होदा
किशनगंज हमेशा से कांग्रेस का मजबूत आधार रहा है। कमरूल होदा ने इस परंपरा को बनाए रखते हुए साफ-सुथरी छवि के दम पर जीत हासिल की।
6. मनिहारी (कोड 67) — मनोहर प्रसाद सिंह
मनिहारी में बुनियादी सुविधाओं, बाढ़ राहत और कृषि समस्याओं पर मनोहर प्रसाद सिंह का गहरा काम उन्हें जीत तक ले गया।
विजेताओं की जीत ने दिया बड़ा संदेश—बदलाव की चाह और भरोसेमंद चेहरों की तलाश
कांग्रेस की सिर्फ 6 सीटों की जीत भले ही महागठबंधन के लिए निराशाजनक रही हो, लेकिन चुनाव परिणाम यह संकेत जरूर देते हैं कि:
- जिन नेताओं ने क्षेत्र में काम किया,
- जनता से सीधा संवाद रखा,
- और बड़े वादों की बजाय वास्तविक मुद्दों पर ध्यान दिया,
उन्हें जनता ने समर्थन दिया।
यह बताता है कि बिहार में राजनीतिक हवा अब सिर्फ बड़े चेहरों या आक्रामक प्रचार पर निर्भर नहीं है, बल्कि जनता विश्वसनीय और मेहनती नेतृत्व की ओर झुक रही है।


