​औरंगाबाद में ‘खाकी’ के नाम पर फरेब का साम्राज्य: दाऊदनगर में दबोचा गया यूपी का शातिर ‘फर्जी आईपीएस’, सूटकेस में मिला पहचान पत्रों का जखीरा

औरंगाबाद/दाऊदनगर। बिहार के औरंगाबाद जिले के दाऊदनगर इलाके में कानून के रक्षक के वेश में छिपे एक बड़े जालसाज का पर्दाफाश हुआ है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से चलकर बिहार के व्यवसायी को अपनी झूठी धौंस में फंसाने वाले एक कथित आईपीएस अधिकारी को दाऊदनगर पुलिस ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यह मामला केवल एक साधारण ठगी का नहीं है, बल्कि एक अपराधी द्वारा देश की सुरक्षा एजेंसियों और संवैधानिक पदों के नाम पर चलाए जा रहे ‘सिंडिकेट’ का बड़ा उदाहरण है। 5 अप्रैल 2026 की यह कार्रवाई औरंगाबाद पुलिस के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जिसने एक ऐसे शख्स को सलाखों के पीछे पहुँचाया है जो न केवल पुलिस की वर्दी का अपमान कर रहा था, बल्कि एनआईए (NIA), सीआईए (CIA) और मानवाधिकार आयोग जैसे नामों का सहारा लेकर वसूली का गंदा खेल खेल रहा था।

ठगी की पटकथा: गोरखपुर के ‘राजेश’ ने दाऊदनगर में कैसे डाला जाल?

​पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब दाऊदनगर शहर के वार्ड संख्या 10, छत्तर दरवाजा निवासी व्यवसायी राकेश कुमार ने अपनी हिम्मत जुटाई और पुलिस के पास पहुँचने का फैसला किया। व्यवसायी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के शाहपुर थाना अंतर्गत सुधरपूर बाड़गांव निवासी राजेश शुक्ला पिछले कुछ समय से उनके संपर्क में था। राजेश ने अपनी पहचान एक कड़क और रसूखदार आईपीएस अधिकारी के रूप में दी थी। अपनी बातों के जाल और फर्जी रौब के दम पर उसने राकेश कुमार को डरा-धमकाकर या किसी काम का झांसा देकर 47 हजार रुपये पहले ही ऑनलाइन और नगद माध्यम से ऐंठ लिए थे।

​राजेश शुक्ला का लालच यहीं नहीं रुका। वह राकेश कुमार पर लगातार दबाव बना रहा था कि उसे 1 लाख 20 हजार रुपये और दिए जाएं। बार-बार मिल रही धमकियों और ‘आईपीएस’ के पद का हवाला देकर की जा रही वसूली से तंग आकर व्यवसायी ने एसडीपीओ दाऊदनगर अशोक कुमार दास से संपर्क किया। पुलिस ने व्यवसायी के आवेदन को गंभीरता से लेते हुए तुरंत एक जाल बिछाने की योजना तैयार की।

हनुमान मंदिर के पास ‘ऑपरेशन अरेस्ट’: पुलिस की घेराबंदी में फंसा जालसाज

​दाऊदनगर पुलिस को सूचना मिली कि फर्जी आईपीएस राजेश शुक्ला दाऊदनगर के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर के पास किसी से मिलने या बकाया रकम लेने के लिए आने वाला है। एसडीपीओ अशोक कुमार दास के निर्देशन में दाऊदनगर थाना पुलिस ने सादे लिबास में मंदिर के आसपास मोर्चा संभाला। जैसे ही राजेश शुक्ला वहां पहुँचा, पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। पुलिस को देखते ही उसके चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। जब पुलिस ने उससे उसकी असली पहचान पूछी और कड़ाई से पूछताछ की, तो उसका ‘आईपीएस’ वाला मुखौटा चंद मिनटों में ही उतर गया। उसने स्वीकार किया कि वह कोई अधिकारी नहीं बल्कि एक पेशेवर जालसाज है जो अधिकारियों के नाम पर लोगों को ठगता है।

सूटकेस में ‘झूठ’ का जखीरा: एनआईए से लेकर भाजपा तक के फर्जी कार्ड (विशेष विश्लेषण)

​गिरफ्तारी के बाद पुलिस को एक सूटकेस बरामद हुआ, जिसे व्यवसायी ने पुलिस के सुपुर्द किया। इस सूटकेस की तलाशी के दौरान जो मिला, उसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। राजेश शुक्ला ने खुद को ‘सुरक्षित’ रखने और लोगों पर दबाव बनाने के लिए पहचान पत्रों का पूरा कारखाना ही खोल रखा था।

द वॉयस ऑफ बिहार के विशेष विश्लेषण के अनुसार, बरामदगी में शामिल प्रमुख वस्तुएं:

  1. आईपीएस आईडी कार्ड: राजेश शुक्ला के नाम से बने चार अलग-अलग फर्जी आईपीएस पहचान पत्र।
  2. सुरक्षा एजेंसियां: सीआईए (CIA) का एक आई कार्ड, एनआईए (NIA) का एक फर्जी आई कार्ड और पुलिस मुखबिर का एक परिचय पत्र।
  3. वर्दी और टोपी: खाकी रंग की पुलिस टोपी जिस पर आधिकारिक बैच लगा हुआ था और एक उजला शर्ट जिसके पीछे ‘NIA राजेश शुक्ला’ अंकित था।
  4. राजनीतिक और मानवाधिकार: भारतीय जनता पार्टी के नाम से एक सदस्यता कार्ड और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कमेटी ऑफ इंडिया के दो फर्जी नियुक्ति पत्र।

​यह बरामदगी इस बात की पुष्टि करती है कि राजेश शुक्ला एक अंतरराज्यीय ठग हो सकता है। वह स्थिति के अनुसार अपना ‘कार्ड’ बदलता था। अगर उसे पुलिस पर दबाव बनाना होता, तो वह आईपीएस बन जाता; अगर जनता को डराना होता, तो एनआईए का सहारा लेता; और अगर किसी राजनीतिक काम में हस्तक्षेप करना होता, तो भाजपा का कार्ड दिखाता।

प्रशासनिक रुख: एसडीपीओ अशोक कुमार दास की कड़ी कार्रवाई

​दाऊदनगर के एसडीपीओ अशोक कुमार दास ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि इस मामले में दाऊदनगर थाना कांड संख्या 221/26 दर्ज की गई है। राजेश शुक्ला को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब इस बिंदु पर जांच कर रही है कि राजेश शुक्ला के तार और कहाँ-कहाँ जुड़े हैं।

​अशोक कुमार दास के अनुसार, यह गिरोह काफी संगठित हो सकता है। क्या गोरखपुर में बैठकर वह बिहार के अन्य जिलों में भी इसी तरह का जाल फैला चुका है? पुलिस उन बैंक खातों की भी जांच कर रही है जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी। एसडीपीओ ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति के बाहरी पहनावे या कार्ड पर भरोसा न करें और यदि कोई अधिकारी के नाम पर पैसे मांगे, तो तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित करें।

व्यवस्था की साख और जनता का विश्वास

​एक तटस्थ दृष्टिकोण से देखें तो, राजेश शुक्ला जैसे अपराधी न केवल आम जनता को लूटते हैं, बल्कि वे पुलिस और प्रशासन की उस छवि को भी धूमिल करते हैं जिसे बनाने में वर्षों की मेहनत लगती है। एक व्यवसायी से आईपीएस के नाम पर पैसे मांगना यह दर्शाता है कि समाज में अभी भी प्रशासनिक पदों का कितना खौफ है, जिसका फायदा ऐसे अपराधी उठाते हैं।

  • अभिभावकों और युवाओं के लिए सबक: गोरखपुर से बिहार आकर इस तरह की वारदात करना यह बताता है कि अपराधी अब भौगोलिक सीमाओं को पार कर रहे हैं।
  • पुलिस की मुस्तैदी: दाऊदनगर पुलिस ने जिस त्वरित गति से हनुमान मंदिर के पास छापेमारी की, वह सराहनीय है। अगर थोड़ी भी देरी होती, तो आरोपी फरार हो सकता था।

समाधान की दिशा में बढ़ते कदम

​4 अप्रैल और 5 अप्रैल 2026 की यह कार्रवाई औरंगाबाद जिले के उन तमाम ठगों के लिए एक चेतावनी है जो फर्जी पहचान के सहारे जी रहे हैं। राजेश शुक्ला अब सलाखों के पीछे है और पुलिस उसके पूरे नेटवर्क की तलाश में उत्तर प्रदेश पुलिस से भी संपर्क साध सकती है। एनआईए और आईपीएस जैसे नामों का दुरुपयोग करने वाले इस शातिर अपराधी का अंत अब कानूनी प्रक्रिया के जरिए होगा।

द वॉयस ऑफ बिहार की टीम इस पूरे हाई-प्रोफाइल ठगी मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। हमारा मानना है कि न्याय तभी पूर्ण होगा जब राजेश शुक्ला के उन सभी शिकारों को इंसाफ मिले जिन्हें उसने अब तक अपनी ठगी का निशाना बनाया है। फिलहाल, दाऊदनगर में चर्चा का विषय उस सूटकेस की है जिसने एक ‘नकली साहब’ की हकीकत को सबके सामने ला खड़ा किया।

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