
जमुई की अदालत ने चर्चित दारोगा प्रभात रंजन हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वहीं तीन अन्य आरोपियों को अलग-अलग धाराओं में दो-दो साल की सजा दी गई है।
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय सुधीर सिन्हा की अदालत ने आरोपी कृष्ण दास, मिथिलेश ठाकुर और पवन दास को दोषी करार देते हुए उम्रकैद और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
पुलिस टीम पर ट्रैक्टर चढ़ाने का आरोप
यह मामला 14 नवंबर 2023 का है, जब बिहार पुलिस की टीम अवैध बालू खनन की सूचना पर कौआकोल महुलियाटांड़ स्थित भड़ोइया नदी इलाके में छापेमारी करने पहुंची थी।
आरोप है कि दारोगा प्रभात रंजन ने अवैध बालू लदे ट्रैक्टर को रोकने का प्रयास किया, लेकिन चालक ने ट्रैक्टर रोकने के बजाय पुलिस टीम पर ही वाहन चढ़ा दिया। इस घटना में एसआई प्रभात रंजन की मौके पर मौत हो गई थी, जबकि एक होमगार्ड जवान गंभीर रूप से घायल हुआ था।
5 आरोपी दोषी करार
अदालत ने भुलिया उर्फ झुलिया, चिंता देवी और दशरथ दास को पुलिस कार्य में बाधा और हमला करने के मामले में दो-दो साल की सजा सुनाई है। इस तरह पूरे मामले में कुल पांच आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा दी गई।
2018 बैच के थे प्रभात रंजन
मृतक प्रभात रंजन 2018 बैच के दारोगा थे और मूल रूप से वैशाली जिले के भगवानपुर खजूरी गांव के रहने वाले थे। दारोगा बनने से पहले उन्होंने शिक्षक और रेलवे कर्मचारी के रूप में भी काम किया था।
उनके परिवार में माता-पिता, पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं। बताया जाता है कि उनकी मौत से महज तीन महीने पहले ही उनके घर बेटे का जन्म हुआ था।
अदालत ने माना गंभीर अपराध
सरकारी पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक मनोज कुमार सिंह ने अदालत में मजबूत पैरवी की। गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने सभी दोषियों को सजा सुनाई।
इस फैसले को पुलिसकर्मियों पर हमले के मामलों में एक अहम न्यायिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।


