
HIGHLIGHTS: सिल्क सिटी में ‘बिहार दिवस’ पर अनूठी पहल; जागरूकता की कमी से ‘असमय मौत’ के खिलाफ जंग
- बड़ी पहल: बिहार दिवस (22 मार्च 2026) के उपलक्ष्य में ‘बहना जागो मंच’ द्वारा भागलपुर में मेगा नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन।
- भारी भागीदारी: शिविर में शहर के 500 से अधिक लोगों ने पहुँचकर बीपी, शुगर और अन्य गंभीर बीमारियों की जांच कराई।
- भावुक क्षण: सचिव प्रियंका झा ने अपनी दिवंगत मां (शिक्षित वकील) का उदाहरण देते हुए कहा— “जागरूकता होती तो मां आज हमारे बीच होतीं।”
- विशेषज्ञों की टीम: डॉ. प्रवीण कौशल (MD), डॉ. विनय कुमार (MS) और नारायणी हॉस्पिटल के डॉ. कामाख्या प्रसाद सहित दिग्गजों ने दी सेवाएं।
- सामाजिक जुड़ाव: वार्ड पार्षद अभिषेक मिश्रा और कई गणमान्य लोगों की उपस्थिति में संपन्न हुआ सफल कार्यक्रम।
भागलपुर | 22 मार्च, 2026
आज जब पूरा प्रदेश बिहार दिवस की खुशियाँ मना रहा है, भागलपुर में ‘सेवा परमो धर्म:’ के मंत्र को चरितार्थ किया गया। स्थानीय सामाजिक संगठन ‘बहना जागो मंच’ ने इस पावन अवसर पर उन लोगों की सुध ली जो अक्सर अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं। मंच के अध्यक्ष अरविंद कुमार झा एवं सचिव प्रियंका झा के नेतृत्व में आयोजित इस नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविर ने न केवल लोगों का उपचार किया, बल्कि उन्हें ‘जागरूकता’ का वह मंत्र भी दिया जो जीवन और मृत्यु के बीच की कड़ी है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की रिपोर्ट के अनुसार, इस शिविर का उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विश्वस्तरीय परामर्श पहुँचाना था।
“शिक्षित होना ही काफी नहीं, जागरूक होना जरूरी है”: प्रियंका झा का दर्द
शिविर के दौरान एक बेहद भावुक क्षण तब आया जब मंच की सचिव प्रियंका झा ने अपने व्यक्तिगत जीवन की एक त्रासदी साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी माता, जो स्वयं एक सुशिक्षित वकील थीं, समय पर डायबिटीज (मधुमेह) की जानकारी न होने के कारण अपना उचित ध्यान नहीं रख सकीं और आज वे हमारे बीच नहीं हैं।
प्रियंका झा ने रुंधे गले से कहा, “अगर मेरी मां जैसी शिक्षित महिला जागरूकता की कमी का शिकार हो सकती हैं, तो आम जनता की स्थिति क्या होगी? उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियां ‘साइलेंट किलर’ हैं। हमारा उद्देश्य यही है कि कोई और परिवार उस त्रासदी का शिकार न हो जिसे मैंने झेला है।”
चिकित्सकों का ‘महाकुंभ’: गंभीर बीमारियों पर प्रहार
शिविर में भागलपुर के नामी चिकित्सकों ने अपनी सेवाएं दीं। नारायणी हॉस्पिटल के निदेशक और एचओडी डॉ. कामाख्या प्रसाद के साथ-साथ डॉ. प्रवीण कौशल (एमडी) और डॉ. विनय कुमार (एमएस) ने मरीजों की जांच की। फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. दीपक ने हड्डी और मांसपेशियों के दर्द से जूझ रहे मरीजों को व्यायाम और आधुनिक उपचार के तरीके बताए।
शिविर में मुख्य रूप से इन पहलुओं पर ध्यान दिया गया:
- ब्लड प्रेशर (BP) और शुगर की जांच: 500 से अधिक लोगों का स्क्रीन टेस्ट किया गया।
- फ्री परामर्श: गंभीर रोगों के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान और बचाव के उपाय बताए गए।
- जीवनशैली में बदलाव: खान-पान और नियमित व्यायाम के प्रति लोगों को जागरूक किया गया।
समाज के दिग्गजों ने बढ़ाया हाथ: एकजुट हुआ भागलपुर
इस नेक पहल को सफल बनाने के लिए शहर के कई गणमान्य लोग भी मैदान में उतरे। वार्ड पार्षद अभिषेक मिश्रा ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे ‘सच्ची बिहार सेवा’ करार दिया। मौके पर जितेंद्र पांडेय, शंभू झुनझुनवाला, हैप्पी आनंद, गोपाल, पप्पू यादव और शिव तिवारी जैसे समाजसेवियों ने व्यवस्था संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अध्यक्ष अरविंद कुमार झा ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ‘बहना जागो मंच’ भविष्य में भी ऐसे जनहितैषी कार्य जारी रखेगा।
VOB का नजरिया: क्या स्वास्थ्य शिविर ही एकमात्र समाधान हैं?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि भागलपुर में ‘बहना जागो मंच’ की यह पहल काबिल-ए-तारीफ है। बिहार दिवस पर केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम करना काफी नहीं है, बल्कि प्रियंका झा की तरह समाज की ‘नब्ज’ को पकड़ना जरूरी है।
- प्रिवेंटिव हेल्थकेयर: बिहार के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में ‘चेकअप’ तभी कराया जाता है जब बीमारी बढ़ जाती है। ऐसे शिविरों से बीमारियों को प्रारंभिक स्तर पर पकड़ने में मदद मिलती है।
- भावुक अपील का असर: जब कोई अपना दर्द साझा करता है, तो लोग ज्यादा जुड़ाव महसूस करते हैं। प्रियंका झा की कहानी ने निश्चित रूप से वहां मौजूद लोगों को अपनी सेहत के प्रति गंभीर किया होगा।
- सरकारी बनाम निजी प्रयास: भागलपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को देखते हुए, निजी संगठनों का आगे आना प्रशासन के लिए भी एक संदेश है कि उसे नियमित अंतराल पर मोहल्ला स्तर पर ऐसी जांचें करानी चाहिए।
सुशासन और सेवा का ‘समन्वय’
114वें बिहार दिवस पर भागलपुर का यह स्वास्थ्य शिविर एक ‘उन्नत बिहार’ की सच्ची तस्वीर पेश करता है। जहाँ एक तरफ तकनीकी शिक्षा (IIIT/BCE) में युवा आगे बढ़ रहे हैं, वहीं ‘बहना जागो मंच’ जैसे संगठन समाज के शारीरिक स्वास्थ्य की सुरक्षा कर रहे हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस निस्वार्थ सेवा के लिए पूरी टीम को बधाई देता है।


