भागलपुर, 5 अगस्त 2025: मनरेगा में घोटाले की बू आई, जांच हुई, और आखिरकार पंचायत रोजगार सेवक छट्टू दास की कुर्सी उड़ गई! भागलपुर के जगदीशपुर प्रखंड के पंचायत रोजगार सेवक छट्टू दास को 20 करोड़ से अधिक की अवैध कमाई, फर्जी वेंडर, और 13 जगहों पर ज़मीन खरीद जैसे सनसनीखेज आरोपों के बाद सेवा मुक्त कर दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता संतोष कुमार ने दावा किया कि छट्टू दास ने अपने पिता कैलाश दास के नाम पर “निशांत ट्रेडर्स” नामक फर्जी वेंडर बनाकर मनरेगा में सामग्रियों की आपूर्ति दिखाकर धन की हेराफेरी की।
जांच में यह सामने आया कि छट्टू दास, उनकी पत्नी और रिश्तेदारों के नाम पर जमीन, बैंक खातों में ट्रांजेक्शन, और गोपनीय तरीके से कैश निकासी की गई।
जमीन का खेल!
छट्टू दास के नाम से अकेले नहीं — उनके माता-पिता, पत्नी और नाबालिग बेटों के नाम पर भी जमीनें खरीदी गईं। जांच में कुल 13 ज़मीनों के डीड मिले, जिनकी कीमत लगभग 59 लाख रुपये आँकी गई।
जवाब में दास ने कहा – “आय के स्रोत हैं, ITR भी है”, लेकिन जब पूछा गया “साक्ष्य कहाँ है?”, तो चुप्पी छा गई।
नकद में लाखों का खेल!
सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि निशांत ट्रेडर्स ने दास दंपती के जॉइंट अकाउंट में लाखों रुपये ट्रांसफर किए, जो तुरंत कैश में निकाले गए। नियमों के मुताबिक, ये पूरी तरह वित्तीय अनियमितता है।
ITR या कहानी?
दास ने बाद में आयकर रिटर्न की एक कॉपी पेश की, लेकिन इनकम डिटेल्स गायब थीं। मतलब साफ है – पैसे कहाँ से आए, कोई जवाब नहीं।
अब क्या हुआ?
जांच में आरोप प्रमाणित पाए गए और उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह ने छट्टू दास को तुरंत सेवा मुक्त कर दिया।
अब दास चाहें तो अगले 30 दिनों में अपील कर सकते हैं, लेकिन साख और सरकारी नौकरी – दोनों अब शायद ही बच पाए।
“घोटालेबाज़ पंचायत सेवक” की पूरी कुंडली खुल गई!
क्या और भी ऐसे घोटालेबाज़ सिस्टम में छुपे हैं?
क्या बाकी योजनाओं में भी ऐसा ही खेल चल रहा है?
अब अगली बारी किसकी?


